राजस्थान | पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते के स्थगित होने के लगभग एक साल बाद, राजस्थान सहित कई राज्यों के लिए पानी की उपलब्धता को लेकर एक सकारात्मक तस्वीर उभर रही है। केंद्र सरकार द्वारा तैयार की जा रही नई नहर परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के मसौदे में राजस्थान को विशेष प्राथमिकता दी गई है, जिससे राज्य के जल संकट का स्थायी समाधान होने की उम्मीद जगी है।
सिंधु जल समझौते के बाद नई उम्मीद
भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के बाद न केवल एक मजबूत कूटनीतिक रुख अपनाया है, बल्कि अपने हिस्से के पानी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर भी काम तेज कर दिया है।
इस दिशा में केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय ने व्यापक होमवर्क किया है, जिसके बाद राजस्थान का जल संसाधन विभाग भी पूरी तरह से सक्रिय हो गया है।
दो प्रमुख परियोजनाओं पर फोकस
डीपीआर के मसौदे में दो प्रमुख परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है। पहली, व्यास-गंगनहर लिंक परियोजना, जिसके तहत 130 किलोमीटर लंबी नहर के जरिए व्यास नदी का पानी गंगनहर तक पहुंचाया जाएगा।
दूसरी, यमुना कनेक्टिविटी पर काम किया जाएगा, जिससे यमुना जल समझौते के तहत प्रदेश को अतिरिक्त पानी मिलने की प्रबल संभावना है।
इन 12 जिलों की बदलेगी तस्वीर
इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं से राजस्थान के 12 जिलों को सीधे तौर पर राहत मिलेगी, जो लंबे समय से पानी की कमी से जूझ रहे हैं।
यमुना समझौते से लाभ
यमुना जल समझौते के तहत मिलने वाले पानी से मुख्य रूप से सीकर, चूरू और झुंझुनूं जिलों को पेयजल और सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध होने की उम्मीद है।
ब्यास-गंगनहर लिंक: एक जीवनरेखा
वहीं, ब्यास-गंगनहर लिंक पश्चिमी और उत्तरी राजस्थान के लगभग 9 जिलों के लिए जीवनरेखा साबित होगी। ब्यास और सतलुज के पानी को इंदिरा गांधी नहर के माध्यम से श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, चूरू, जोधपुर, नागौर और झुंझुनूं के क्षेत्रों तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे इन क्षेत्रों की पानी पर निर्भरता कम होगी।
बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर
अतिरिक्त पानी को प्रभावी ढंग से लाने और वितरित करने के लिए मौजूदा बुनियादी ढांचे को मजबूत करना आवश्यक है। वर्तमान में, कई बैराजों से गाद निकालने का काम तेजी से चल रहा है।
इस कदम से न केवल जलाशयों की भंडारण क्षमता में वृद्धि हुई है, बल्कि बिजली उत्पादन में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
फीडर नहरों की क्षमता वृद्धि
पंजाब में सतलुज और व्यास नदियों के संगम पर स्थित हरिके बैराज से इंदिरा गांधी नहर निकलती है। इस प्रणाली को सुधारने के लिए पंजाब में सरहिन्द फीडर, हरियाणा में राजस्थान फीडर और राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर की मरम्मत और क्षमता बढ़ाने का काम चल रहा है।
लगभग 197 किलोमीटर की लंबाई में यह काम होना है, और भविष्य में अतिरिक्त पानी लाने के लिए इसकी क्षमता को और भी बढ़ाना होगा।
प्रदेश को कैसे मिलेगा लाभ?
राजस्थान के कई जिले, विशेषकर मरुस्थलीय क्षेत्र, हर साल गंभीर जल संकट का सामना करते हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।
- शहरी जल आपूर्ति: बीकानेर, जैसलमेर और जोधपुर जैसे प्रमुख शहरों की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होगी।
- भू-जल संरक्षण: सतही जल की उपलब्धता बढ़ने से भू-जल पर दबाव काफी कम होगा।
- कृषि को बढ़ावा: सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता से कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी और इंदिरा गांधी नहर क्षेत्र में दूसरी हरित क्रांति जैसी स्थिति बन सकती है।
अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
डीपीआर में राजस्थान को दी गई प्राथमिकता प्रदेश के लिए एक बड़ा अवसर है। लंबे समय से पानी की कमी झेल रहे क्षेत्रों को अब स्थायी राहत मिल सकती है। ये नई परियोजनाएं न केवल पेयजल की उपलब्धता बढ़ाएंगी, बल्कि खेती और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेंगी।
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