अजमेर | राजस्थान के टोंक जिले की एक महिला अभ्यर्थी द्वारा सरकारी नौकरी पाने के लिए खुद को विधवा बताने का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है।
यह मामला राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की ग्रेड फोर्थ कर्मचारी भर्ती प्रक्रिया के दौरान डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के समय सामने आया है।
महिला अभ्यर्थी पर आरोप है कि उसने विधवा-परित्यक्ता कोटे के तहत अनुचित लाभ लेने के लिए जानबूझकर गलत जानकारी और दस्तावेज प्रस्तुत किए।
अजमेर के तोपदड़ा स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में जब दस्तावेजों की जांच चल रही थी, तभी ग्रामीणों ने वहां पहुंचकर हंगामा कर दिया।
ग्रामीणों ने शिक्षा अधिकारियों को बताया कि जिस महिला ने विधवा कोटे से आवेदन किया है, वह वास्तव में विवाहित है और सुखी जीवन जी रही है।
डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में फर्जीवाड़े का खेल
शुक्रवार को टोंक जिले की यह महिला अभ्यर्थी तोपदड़ा स्कूल में दल संख्या 19 के समक्ष अपने दस्तावेजों का सत्यापन कराने पहुंची थी।
उसने सफलतापूर्वक अपने कागजात दिखाए और वहां से चली गई, लेकिन उसके जाते ही ग्रामीणों का एक बड़ा जत्था स्कूल परिसर में दाखिल हुआ।
इन ग्रामीणों ने अधिकारियों को बताया कि महिला ने भर्ती में लाभ पाने के लिए अपनी वैवाहिक स्थिति के बारे में झूठ बोला है।
उन्होंने दावा किया कि महिला ने अलग-अलग परीक्षाओं के फॉर्म में अपनी स्थिति को अलग-अलग तरीके से पेश किया है ताकि वह पकड़ी न जाए।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि महिला ने सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर पहले भी सरकारी योजनाओं का गलत तरीके से लाभ उठाया है।
शिक्षा अधिकारियों के सामने ग्रामीणों ने 28 पन्नों का एक विस्तृत दस्तावेज पेश किया, जिसमें महिला की पूरी कुंडली मौजूद थी।
ग्रामीणों ने पेश किए 28 पन्नों के पुख्ता सबूत
ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए इस 28 पन्नों के ब्योरे में महिला के पिछले कई वर्षों के आवेदनों और उसकी सामाजिक स्थिति का विवरण दिया गया था।
इसमें बताया गया कि महिला ने साल 2021 में वीडीओ (ग्राम विकास अधिकारी) भर्ती के दौरान खुद को विधवा श्रेणी में दिखाया था।
हालांकि, ग्रामीणों का दावा है कि महिला ने 14 फरवरी 2022 को भीलवाड़ा जिले के एक गांव में दूसरी शादी कर ली थी।
दूसरी शादी करने के बाद भी महिला ने आगामी भर्ती परीक्षाओं में खुद को विधवा या अविवाहित बताकर आवेदन करना जारी रखा।
ग्रामीणों ने अधिकारियों को वे तस्वीरें भी दिखाईं, जो कथित तौर पर महिला की दूसरी शादी के समारोह के दौरान खींची गई थीं।
हालांकि, अधिकारियों ने इन तस्वीरों को प्राथमिक साक्ष्य मानने से इनकार कर दिया और कहा कि शादी के प्रमाण पत्र के बिना कुछ नहीं कहा जा सकता।
विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में बदली अपनी पहचान
ग्रामीणों ने दस्तावेजों के जरिए यह साबित करने की कोशिश की कि महिला ने जानबूझकर अधिकारियों को गुमराह करने के लिए अपनी स्थिति बदली।
7 मार्च 2022 को जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर द्वारा आयोजित पीटीईटी परीक्षा के आवेदन में उसने खुद को अविवाहित बताया था।
हैरानी की बात यह है कि उसी साल 30 अक्टूबर को सीईटी (स्नातक स्तर) की परीक्षा के लिए उसने फिर से खुद को विधवा घोषित कर दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि यह विरोधाभास साफ तौर पर दर्शाता है कि महिला केवल कोटा हासिल करने के लिए झूठ का सहारा ले रही थी।
एक ही साल के भीतर कभी खुद को अविवाहित तो कभी विधवा बताना किसी बड़े सुनियोजित फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि ऐसे अभ्यर्थियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि ईमानदार उम्मीदवारों का हक न मारा जाए।
विधवा पेंशन के नाम पर सरकारी धन की लूट
ग्रामीणों ने एक और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि महिला ने पूर्व में विधवा पेंशन योजना का भी लाभ लिया था।
उसने खुद को विधवा बताकर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराया और नियमित रूप से पेंशन की राशि अपने बैंक खाते में प्राप्त की।
जब ग्रामीणों को इस बात की भनक लगी, तो उन्होंने संबंधित विभाग में शिकायत दर्ज कराई और जांच की मांग की।
जांच के बाद जब यह सच सामने आया कि वह विधवा नहीं है, तो विभाग ने तत्काल प्रभाव से उसकी पेंशन रोक दी थी।
इसके बावजूद महिला ने ग्रेड फोर्थ भर्ती में फिर से वही पुराना पैंतरा आजमाने की कोशिश की और विधवा कोटे से आवेदन कर दिया।
ग्रामीणों ने कहा कि वे लंबे समय से इस महिला की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे और सही मौके का इंतजार कर रहे थे।
शिक्षा विभाग ने मामला चयन बोर्ड को भेजा
अजमेर के संयुक्त निदेशक डॉ. महावीर शर्मा ने इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए इसे उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग इस तरह की किसी भी गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं करेगा और मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी।
ग्रामीणों द्वारा दी गई शिकायत को अब एक विशेष परिवेदना समिति (ग्रीवेंस कमेटी) के सामने रखा जाएगा जो इसकी समीक्षा करेगी।
इस समिति में मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (सीडीईओ) सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए गए हैं।
"महिला अभ्यर्थी के प्रकरण में शिकायत मिली है। कुछ डॉक्यूमेंट भी शिकायत के साथ दिए गए हैं। इस मामले को परिवेदना समिति में रखेंगे। समिति की रिपोर्ट के आधार पर फिर इसे कर्मचारी चयन बोर्ड को भेजा जाएगा।" - डॉ. महावीर शर्मा, संयुक्त निदेशक
समिति यह जांच करेगी कि महिला द्वारा जमा किए गए दस्तावेज असली हैं या उन्हें फर्जी तरीके से बनवाया गया है।
ग्रामीणों की सतर्कता ने रोका बड़ा फर्जीवाड़ा
ग्रामीणों ने बताया कि ग्रेड फोर्थ भर्ती के लिए इस महिला का वेरिफिकेशन पहले ही होना था, लेकिन किसी कारणवश वह टल गया था।
जैसे ही उन्हें पता चला कि शुक्रवार को महिला फिर से तोपदड़ा स्कूल आने वाली है, वे पूरी तैयारी के साथ वहां पहुंच गए।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर वे समय पर नहीं पहुंचते, तो शायद यह महिला फर्जी तरीके से नौकरी पाने में सफल हो जाती।
इलाके के लोगों में इस घटना को लेकर काफी गुस्सा है और वे महिला के खिलाफ पुलिस केस दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।
उनका कहना है कि राजस्थान में पहले ही पेपर लीक और भर्ती घोटालों से युवा परेशान हैं, ऊपर से ऐसे फर्जीवाड़े और दुख देते हैं।
शिक्षा विभाग ने फिलहाल महिला के दस्तावेजों को संदिग्ध श्रेणी में डाल दिया है और अंतिम निर्णय बोर्ड पर छोड़ दिया है।
सरकारी नौकरियों में बढ़ती धोखाधड़ी की प्रवृत्ति
राजस्थान में सरकारी नौकरी पाने की होड़ में अब कई लोग गलत रास्तों का चुनाव करने लगे हैं, जो एक गंभीर चिंता का विषय है।
विधवा, परित्यक्ता और विकलांग कोटे का गलत इस्तेमाल करने के मामले पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़े हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और डिजिटल रूप से मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
अगर कोई व्यक्ति गलत जानकारी देकर नौकरी पा भी लेता है, तो बाद में पकड़े जाने पर उसे जेल की हवा खानी पड़ सकती है।
इस मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि समाज की जागरूकता ही भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी को रोकने का सबसे बड़ा हथियार है।
अब देखना यह होगा कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड इस मामले में महिला अभ्यर्थी के खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई करता है।
निष्कर्ष: सिस्टम को सुदृढ़ करने की जरूरत
टोंक की इस महिला का मामला महज एक बानगी है कि कैसे कोटे का लाभ लेने के लिए लोग अपनी पहचान तक बदलने को तैयार हैं।
ग्रामीणों की सजगता ने एक अपात्र व्यक्ति को सिस्टम में घुसने से रोक दिया, जो कि एक सराहनीय कार्य है।
प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई करे ताकि भविष्य में कोई भी ऐसा दुस्साहस करने की हिम्मत न कर सके।
भर्ती परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखना सरकार और समाज दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसे पूरी निष्ठा से निभाना होगा।
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