जयपुर | राजस्थान प्रदेश युवा कांग्रेस की एक माह तक चली लंबी चुनावी प्रक्रिया आखिरकार पूरी हो गई है। इस बार के चुनाव ने भागीदारी के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
रिकॉर्ड सदस्यता और मतदान का आंकड़ा
प्रदेशभर में 34.33 लाख युवाओं ने संगठन की सदस्यता ली। यह आंकड़ा राजस्थान के राजनीतिक इतिहास में युवाओं की भारी सक्रियता को दर्शाता है।
हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं युवाओं के वोट वैध माने जाएंगे जिन्होंने सदस्यता शुल्क जमा कराया है।
शुक्रवार शाम तक आए अंतिम आंकड़ों के अनुसार, 32.64 लाख युवाओं के वोट वैध पाए गए हैं। मतदान की प्रक्रिया बुधवार को ही समाप्त हो गई थी।
24 करोड़ से अधिक का चुनावी फंड
इस बार सदस्यता शुल्क के रूप में प्रत्येक युवा से ₹75 लिए गए थे। इससे संगठन को भारी आर्थिक मजबूती मिली है।
अगर 32.64 लाख वैध सदस्यों को ₹75 से गुणा किया जाए, तो कुल 24.48 करोड़ रुपए एकत्र हुए हैं। यह राशि राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
हैरानी की बात यह है कि पिछले साल पूरे राज्य में मुख्य कांग्रेस पार्टी को कुल 25 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त हुआ था।
दिग्गज गुटों के बीच वर्चस्व की जंग
यह चुनाव केवल पदों के लिए नहीं, बल्कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है।
अभिषेक चौधरी को गहलोत-डोटासरा गुट का समर्थन प्राप्त है। उनकी पकड़ जयपुर शहर, सीकर, चूरू और उदयपुर जैसे क्षेत्रों में काफी मजबूत मानी जा रही है।
वहीं, अनिल चोपड़ा को सचिन पायलट का करीबी माना जाता है। उन्होंने जयपुर ग्रामीण, दौसा, पाली और बाड़मेर में अपनी गहरी पैठ बनाई है।
त्रिकोणीय मुकाबले ने बढ़ाई धड़कनें
राजकुमार परसवाल ने शेखावाटी क्षेत्र से अपनी ताकत दिखाकर इस मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। इससे परिणामों का अनुमान लगाना कठिन हो गया है।
जयपुर से विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ चुके कई युवा नेता इस बार मैदान में हैं। उनके बीच कांटे की टक्कर होने की संभावना है।
वोटों की गिनती और सदस्यता सत्यापन के बाद अब सबकी निगाहें दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय पर टिकी हुई हैं।
दिल्ली में राहुल गांधी लेंगे अंतिम फैसला
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष के लिए सर्वाधिक वोट पाने वाले उम्मीदवार को पहली प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि, प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
यदि वोटों का अंतर बहुत कम रहता है या किसी उम्मीदवार पर कोई विवाद होता है, तो राहुल गांधी हस्तक्षेप कर सकते हैं।
ऐसी स्थिति में संभावित दावेदारों को दिल्ली बुलाया जाएगा। राहुल गांधी स्वयं साक्षात्कार लेकर अंतिम नाम पर मुहर लगा सकते हैं।
"प्रदेश अध्यक्ष से लेकर ब्लॉक अध्यक्ष तक के पदों के लिए यह चुनाव भारी राजनीतिक सक्रियता के कारण खासा चर्चित रहा है।"
संगठन की मजबूती पर रहेगा जोर
यह चुनाव प्रदेश अध्यक्ष के साथ-साथ प्रदेश महासचिव, जिलाध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए भी आयोजित किए गए थे।
युवा नेताओं की यह सक्रियता आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए कांग्रेस की जमीनी तैयारी का हिस्सा मानी जा रही है।
नए नेतृत्व के चयन से राजस्थान कांग्रेस में नई ऊर्जा का संचार होने की उम्मीद है। चुनाव परिणाम जल्द ही घोषित किए जा सकते हैं।
राजस्थान यूथ कांग्रेस के इन चुनावों ने यह साबित कर दिया है कि युवाओं में राजनीति के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है।
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