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राजस्थान युवा कांग्रेस: करोड़ों का खेल: राजस्थान युवा कांग्रेस चुनाव: 25 लाख मेंबर्स और करोड़ों का खेल

मानवेन्द्र जैतावत · 29 अप्रैल 2026, 10:56 दोपहर
राजस्थान युवा कांग्रेस चुनाव में 25 लाख सदस्यों का लक्ष्य और करोड़ों की फंडिंग ने बढ़ाई सियासी हलचल।

जयपुर | राजस्थान की राजनीति में युवा कांग्रेस के चुनाव इन दिनों चर्चा का केंद्र बने हुए हैं, जो अब महज एक संगठनात्मक कवायद नहीं बल्कि शक्ति प्रदर्शन का बड़ा मंच बन चुके हैं। डिजिटल वोटिंग प्रणाली लागू होने के बावजूद जमीन पर 'पावर और पैसे' का प्रभाव साफ तौर पर देखा जा रहा है। प्रदेश भर में इस बार करीब 25 लाख नए सदस्य बनाने का विशाल लक्ष्य रखा गया है, जिसे पूरा करने के लिए सभी दावेदारों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। सदस्यता अभियान से लेकर वोटिंग मैनेजमेंट तक, हर स्तर पर उम्मीदवार अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए कई तरह की रणनीतियां अपना रहे हैं।

युवा कांग्रेस चुनाव में धनबल का बढ़ता प्रभाव

संगठन के नियमों के अनुसार भले ही वरिष्ठ नेताओं को इन चुनावों से औपचारिक रूप से दूर रखा गया है, लेकिन पर्दे के पीछे उनकी सक्रियता चर्चा में है। बड़े नेताओं का वरदहस्त प्राप्त उम्मीदवार आर्थिक रूप से अधिक मजबूत नजर आ रहे हैं और प्रचार में जमकर खर्च कर रहे हैं। युवा कांग्रेस का यह चुनाव प्रदेश के सबसे महंगे संगठनात्मक चुनावों में गिना जा रहा है, विशेष रूप से प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवारों को भारी खर्च करना पड़ रहा है। इस स्थिति के कारण सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले कई प्रतिभावान युवा इस चुनावी दौड़ में पिछड़ते नजर आ रहे हैं।

करोड़ों की फंडिंग और सदस्यता शुल्क का गणित

इस चुनावी प्रक्रिया में सदस्यता शुल्क 75 रुपये निर्धारित किया गया है, जो सीधे चुनाव प्राधिकरण के खाते में जमा होता है। अब तक लगभग 8.60 लाख युवाओं ने सदस्यता के लिए आवेदन किया है, जिनमें से 4.70 लाख से अधिक ने शुल्क जमा कर दिया है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार अब तक लगभग 3.52 करोड़ रुपये का फंड एकत्र हो चुका है। यदि पार्टी अपने 25 लाख सदस्यों के लक्ष्य को प्राप्त कर लेती है, तो यह राशि बढ़कर 18.75 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।

डिजिटल वोटिंग और छह वोटों का अधिकार

पूरी चुनावी प्रक्रिया इंडियन यूथ कांग्रेस (आईवाईसी) के मोबाइल ऐप के माध्यम से संचालित की जा रही है। इसमें पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लाइव फोटो, वोटर आईडी और ओटीपी सत्यापन को अनिवार्य बनाया गया है ताकि फर्जीवाड़े को रोका जा सके। एक पंजीकृत सदस्य को अलग-अलग पदों के लिए कुल छह वोट डालने का अधिकार दिया गया है। इसमें प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री, जिलाध्यक्ष, जिला महामंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए मतदान की व्यवस्था की गई है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी वर्चस्व की जंग

चुनाव प्रचार के लिए दावेदारों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, विशेषकर 'एक्स' और इंस्टाग्राम का सहारा लिया है। बड़े फॉलोअर वाले अकाउंट्स के माध्यम से विज्ञापनों और पेड प्रमोशन के जरिए अपने पक्ष में माहौल बनाने की कड़ी कोशिश की जा रही है। दावेदार अपनी रैलियों और जनसंपर्क अभियानों की तस्वीरें साझा कर अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहे हैं। सोशल मीडिया अब इन चुनावों में हार-जीत तय करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक बनकर उभरा है, जहां हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। युवा राजनीति में डिजिटल बदलाव स्वागत योग्य है, लेकिन बढ़ता चुनावी खर्च आम कार्यकर्ताओं के सपनों को सीमित कर रहा है, जिसे रोकने की जरूरत है।

भविष्य की राजनीति और चयन प्रक्रिया

मतदान संपन्न होने के बाद, प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए सर्वाधिक वोट प्राप्त करने वाले शीर्ष तीन उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए दिल्ली बुलाया जाएगा। वहां पार्टी आलाकमान के साथ इंटरव्यू के आधार पर एक अध्यक्ष और दो उपाध्यक्षों के नाम तय होंगे। यह चयन प्रक्रिया न केवल संगठन की नई टीम तैयार करेगी, बल्कि आगामी मुख्यधारा की राजनीति के लिए नए चेहरों की क्षमता का भी परीक्षण करेगी। 18 से 35 वर्ष की आयु के युवाओं का उत्साह प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत दे रहा है। यह पूरी प्रक्रिया राजस्थान में कांग्रेस की जमीनी पकड़ को मजबूत करने और नए नेतृत्व को उभारने का एक बड़ा अवसर प्रदान करती है। हालांकि, आर्थिक प्रभाव को संतुलित करना संगठन के सामने एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी ताकि निष्ठावान कार्यकर्ता उपेक्षित महसूस न करें।

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