राजनीति

राजेंद्र राठौड़ बनाम रविंद्र भाटी: राजेंद्र राठौड़ का रविंद्र भाटी पर बड़ा हमला, आचरण पर सवाल

बलजीत सिंह शेखावत · 22 मई 2026, 09:26 सुबह
राजेंद्र राठौड़ ने चूरू में रविंद्र सिंह भाटी के प्रदर्शन के तरीकों की तीखी आलोचना की।

चूरू | राजस्थान की राजनीति में इन दिनों बयानों के तीखे तीर चल रहे हैं। चूरू दौरे पर आए बीजेपी के दिग्गज नेता राजेंद्र राठौड़ ने शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी के हालिया प्रदर्शनों और उनके व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इससे प्रदेश की सियासत गर्मा गई है।

सियासी गलियारों में हलचल

पश्चिमी राजस्थान और शेखावाटी की राजनीति के दो बड़े चेहरे अब आमने-सामने हैं। राजेंद्र राठौड़ ने भाटी के आंदोलन करने के तरीकों को लोकतंत्र के लिए एक गलत मिसाल करार दिया है। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।राठौड़ ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जीवन में मर्यादा का पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि युवाओं के बीच लोकप्रिय चेहरों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। भाटी के हालिया विवादित प्रदर्शनों को लेकर राठौड़ का रुख काफी सख्त नजर आया।

लोकतंत्र और संघर्ष की मर्यादा

मीडिया से बातचीत में राठौड़ ने जोर देकर कहा कि मांगों के लिए संघर्ष करना हर किसी का अधिकार है। लेकिन संघर्ष के दौरान किया जाने वाला आचरण समाज में गलत संदेश नहीं देना चाहिए। उन्होंने भाटी के व्यवहार को मानदंडों के विपरीत बताया।राठौड़ का मानना है कि जनप्रतिनिधियों को ऐसा उदाहरण पेश करना चाहिए जिसका अनुसरण आने वाली पीढ़ी गर्व से कर सके। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि उग्र प्रदर्शन और अमर्यादित आचरण से लोकतांत्रिक संस्थाओं की छवि धूमिल होती है। राठौड़ ने चूरू में स्थानीय कार्यकर्ताओं से मुलाकात के बाद पत्रकारों से चर्चा की थी। उन्होंने कहा कि किसी भी नेता का कद उसके कार्यों और उसके व्यवहार से तय होता है। केवल भीड़ जुटाना ही नेतृत्व की निशानी नहीं है।

"हमें अपनी मांगों के लिए निश्चित तौर पर संघर्ष करना चाहिए पर हम इस प्रकार का आचरण करें या इस प्रकार का उदाहरण प्रस्तुत करें कि अन्य लोग उसके पीछे लगें, मैं इसे किसी तरह से उचित नहीं मानता।"

राजपूत समाज के दो बड़े चेहरों में टकराव

यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों नेता राजपूत समाज से आते हैं और प्रभावशाली कद रखते हैं। राठौड़ का यह प्रहार केवल एक व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं, बल्कि भाटी की बढ़ती सक्रियता पर एक राजनीतिक कटाक्ष भी माना जा रहा है।राठौड़ ने आगे कहा कि राजनीति में धैर्य और संयम का बहुत महत्व है। बिना सोचे-समझे किए गए प्रदर्शनों से केवल अस्थाई सुर्खियां मिल सकती हैं, लेकिन दीर्घकालिक राजनीति के लिए सिद्धांतों पर अडिग रहना और शिष्टाचार बनाए रखना बेहद जरूरी होता है।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं

जैसे ही राठौड़ का यह बयान वायरल हुआ, दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई। भाटी के समर्थकों ने इसे पुरानी पीढ़ी बनाम नई पीढ़ी की लड़ाई बताया, जबकि राठौड़ के समर्थकों ने इसे अनुशासन की सीख करार दिया।राजस्थान की इस सियासी जंग में आने वाले दिनों में और भी मोड़ आने की संभावना है। राठौड़ के इन तीखे तेवरों ने साफ कर दिया है कि वे भाटी की कार्यशैली से बिल्कुल सहमत नहीं हैं और इसे चुनौती देने को तैयार हैं।इस बयान के बाद अब सबकी नजरें रविंद्र सिंह भाटी की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। क्या वे इस आलोचना का जवाब देंगे या अपनी रणनीति में बदलाव करेंगे? यह आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल प्रदेश की राजनीति पूरी तरह सुलग रही है।

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