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राजनाथ सिंह का आतंकवाद पर कड़ा प्रहार: आतंकवाद के खिलाफ राजनाथ सिंह की हुंकार: 'ऑपरेशन सिंदूर' का जिक्र

मानवेन्द्र जैतावत · 28 अप्रैल 2026, 03:18 दोपहर
किर्गिस्तान में एससीओ की बैठक में राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का आह्वान किया।

बिश्केक | रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत का कड़ा रुख स्पष्ट किया। उन्होंने आतंकवाद को क्षेत्रीय शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया।

राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में 'ऑपरेशन सिंदूर' का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन भारत के उस संकल्प का प्रतीक है कि अब आतंकवाद के गढ़ सुरक्षित नहीं रहेंगे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाता है। आतंकवाद के किसी भी कृत्य को अब न्यायोचित दंड से बचाना असंभव होगा।

रक्षा मंत्री ने सदस्य देशों से अपील की कि वे आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ एकजुट हों। इन बुराइयों से निपटने के लिए एक एकीकृत मोर्चा बनाना समय की मांग है।

उन्होंने कहा कि आतंकवादियों को आश्रय देने वाले सुरक्षित ठिकानों को पूरी तरह खत्म करना होगा। किसी भी राजनीतिक कारण से आतंकवाद को छूट देना स्वीकार्य नहीं है।

राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि राज्य-प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद संप्रभुता पर हमला है। इसे किसी भी परिस्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

आतंकवाद और 'ऑपरेशन सिंदूर' का संदेश

रक्षा मंत्री ने कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म या विचारधारा नहीं होती। यह मानवता के खिलाफ एक अपराध है जिसका सामूहिक रूप से मुकाबला करना आवश्यक है।

उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' के माध्यम से दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। आतंकवादियों को अब उनके गढ़ों में ही दंडित किया जाएगा।

राजनाथ सिंह ने एससीओ देशों से आतंकवादियों को भड़काने और शरण देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि इसमें किसी भी प्रकार की हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने दोहरे मापदंडों की कड़ी आलोचना की और कहा कि आतंकवाद पर वैश्विक सहमति होनी चाहिए। आतंकवाद को केवल सामूहिक प्रयासों से ही जड़ से मिटाया जा सकता है।

रक्षा मंत्री ने तियानजिन घोषणापत्र का भी जिक्र किया, जो आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह घोषणापत्र साझा सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से बिना किसी अपवाद के निपटना होगा। तभी हम क्षेत्रीय सुरक्षा को शांति और समृद्धि की आधारशिला में बदल सकते हैं।

सुरक्षित ठिकानों और दोहरे मापदंडों का अंत

राजनाथ सिंह ने कहा कि आज की वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच एससीओ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। दुनिया के कई हिस्से आज संघर्ष और अशांति का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि कुछ देश अभी भी आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाने प्रदान कर रहे हैं। ऐसे कृत्यों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा होनी चाहिए।

“आतंकवाद की कोई राष्ट्रीयता या विचारधारा नहीं होती, राष्ट्रों को इस खतरे के खिलाफ दृढ़ और सामूहिक रवैया अपनाना चाहिए।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि सामूहिक विश्वसनीयता की असली कसौटी निरंतरता में निहित है। हमें आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में कभी भी ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए।

उन्होंने कट्टरपंथ का मुकाबला करने के लिए भारत की अध्यक्षता के दौरान जारी संयुक्त वक्तव्य को याद किया। यह साझा प्रतिबद्धता ही संगठन की असली ताकत है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि एससीओ को आतंकवादियों को रसद और वित्तीय सहायता देने वाले तंत्र को तोड़ना होगा। इसके बिना आतंकवाद का खात्मा संभव नहीं है।

एक व्यवस्थित विश्व व्यवस्था की मांग

रक्षा मंत्री ने सवाल उठाया कि क्या हमें एक नई विश्व व्यवस्था की आवश्यकता है या एक अधिक व्यवस्थित दुनिया की? उन्होंने गरिमा और सम्मान पर आधारित व्यवस्था की वकालत की।

उन्होंने कहा कि हमें एक ऐसी व्यवस्था चाहिए जहां मतभेद विवाद न बनें और विवाद आपदाओं का कारण न बनें। नियम-आधारित विश्व व्यवस्था का सम्मान करना अनिवार्य है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि आज का वास्तविक संकट स्थापित नियमों पर सवाल उठाने की प्रवृत्ति है। वैश्विक सहमति सह-अस्तित्व और करुणा पर आधारित होनी चाहिए।

उन्होंने अराजकता और प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग और सहजीवन को प्राथमिकता देने की अपील की। विश्व के प्रत्येक नागरिक को सम्मान के साथ जीने का अधिकार मिलना चाहिए।

रक्षा मंत्री ने कहा कि एससीओ के पास शांति और स्थिरता में योगदान देने की अपार शक्ति है। यह संगठन वैश्विक सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है।

उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम के दर्शन को दोहराते हुए कहा कि पूरी दुनिया एक परिवार है। जाति और धर्म के मतभेदों को भुलाकर हमें एकजुट होना होगा।

शांति, समृद्धि और गांधीवादी विचारधारा

राजनाथ सिंह ने महात्मा गांधी के संदेश को याद करते हुए कहा कि 'आंख के बदले आंख' पूरी दुनिया को अंधा कर देती है। हमें हिंसा के बजाय संवाद का मार्ग अपनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शक्ति की असली परीक्षा गरीबों और कमजोरों की रक्षा करने में है। रक्षा मंत्रियों के रूप में भाईचारे की भावना को बनाए रखना हमारा कर्तव्य है।

रक्षा मंत्री ने बल प्रयोग के बजाय कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात कही। हमें युद्ध के युग को पीछे छोड़कर शांति के युग की ओर बढ़ना होगा।

उन्होंने कहा कि हर कार्य से पहले यह सोचना चाहिए कि वह गरीब और जरूरतमंद के जीवन में क्या बदलाव लाएगा। यही सच्ची सेवा और सुरक्षा की भावना है।

राजनाथ सिंह ने एससीओ के जनादेश के कार्यान्वयन में भारत के रचनात्मक योगदान को दोहराया। समानता और पारस्परिक सम्मान ही संगठन की सफलता की कुंजी है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आपसी विश्वास और गहरी समझ के माध्यम से एससीओ आशा का प्रतीक बनेगा। यह संगठन भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है।

एससीओ की 25वीं वर्षगांठ और भारत का संकल्प

बैठक के दौरान सदस्य देशों ने 2026 के प्रतीकात्मक महत्व पर चर्चा की, जो संगठन की 25वीं वर्षगांठ होगी। यह संगठन की यात्रा का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण एससीओ की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। हमें क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए नई रणनीतियां विकसित करनी होंगी।

उन्होंने बैठक में सुरक्षा, आतंकवाद और कट्टरपंथ से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। भारत ने क्षेत्र की शांति के लिए अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया।

रक्षा मंत्री ने समापन करते हुए कहा कि एससीओ के सदस्य देशों के बीच सहयोग वैश्विक स्थिरता के लिए आवश्यक है। भारत इस दिशा में अपना सक्रिय योगदान जारी रखेगा।

इस बैठक ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। शांति और समृद्धि ही हमारा अंतिम लक्ष्य है।

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