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राजस्थान

बच्चों में हर बुखार संक्रमण नहीं: हर बुखार नहीं संक्रमण, समय पर पहचान बचाएगी बच्चे की जान

महेन्द्रसिंह शेखावत

पुष्कर के गोल्डन जुबली राजपेडिकॉन में डॉ. जी.एस. तंवर ने बताया कि बच्चों में हर बुखार संक्रमण नहीं होता। सही समय पर जांच और सटीक पहचान बच्चे को गंभीर जटिलताओं से बचा सकती है।

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HIGHLIGHTS

  • पुष्कर में आयोजित गोल्डन जुबली राजपेडिकॉन में बीकानेर के चिकित्सकों ने भाग लिया।
  • डॉ. जी.एस. तंवर ने स्पष्ट किया कि बच्चों में हर बुखार संक्रमण के कारण नहीं होता।
  • कावासाकी रोग की समय पर पहचान न होने से कोरोनरी धमनियों को नुकसान संभव है।
  • डॉ. चंद्र कुमार चहार को प्रतिष्ठित लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्रदान किया गया।
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बीकानेर | बच्चों में होने वाला हर बुखार सिर्फ संक्रमण की वजह से नहीं होता है। सही समय पर बीमारी की सटीक पहचान बच्चे को गंभीर जटिलताओं से बचा सकती है।

पुष्कर में आयोजित हुआ राजपेडिकॉन सम्मेलन

पुष्कर में 24-25 अक्टूबर को गोल्डन जुबली राजपेडिकॉन एवं नॉर्थ जोन पेडिकॉन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बीकानेर के कई वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञों ने विभिन्न वैज्ञानिक सत्रों में हिस्सा लिया।

सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज बीकानेर के बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. जी.एस. तंवर ने इस दौरान एक महत्वपूर्ण पैनल चर्चा का संचालन किया। उन्होंने 'हर बुखार संक्रमण नहीं है' विषय पर अपने विचार साझा किए।

बुखार के अन्य प्रमुख कारण

डॉ. तंवर ने पीबीएम अस्पताल में देखे गए जटिल बाल रोगों के उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि बच्चों में बुखार के अन्य कारण भी हो सकते हैं:

  • प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ी विभिन्न बीमारियां
  • कावासाकी रोग का प्रभाव
  • रक्त संबंधी विकार
  • दवाओं के दुष्प्रभाव

एंटीबायोटिक का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक

डॉ. तंवर ने बताया कि एंटीबायोटिक देने के बाद भी बुखार ठीक न होने पर दोबारा जांच जरूरी है। ऐसा करने से ही बीमारी के वास्तविक कारण की पुष्टि हो पाती है।

उन्होंने एंटीबायोटिक के विवेकपूर्ण उपयोग और अनावश्यक दवाओं के सेवन से बचने पर विशेष जोर दिया। कावासाकी रोग में देरी से हृदय की कोरोनरी धमनियों को नुकसान पहुंच सकता है।

बीकानेर के डॉक्टरों को मिला सम्मान

सम्मेलन में सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. चंद्र कुमार चहार को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टरों ने सम्मेलन में कुल 12 शोध-पत्र प्रस्तुत किए।

नवजात शिशु चिकित्सा के पुरस्कार सत्र में डॉ. दीपिका चौधरी ने प्रथम स्थान हासिल किया। इसी सत्र में डॉ. हर्षित रावल ने तृतीय स्थान प्राप्त कर संस्थान का गौरव बढ़ाया।

*Edit with Google AI Studio

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