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लंदन में राजपुरोहित समाज का गौरव: लंदन में गूंजा राजपुरोहित समाज का गौरव, भव्य सम्मेलन संपन्न

गणपत सिंह मांडोली · 06 जुलाई 2026, 07:48 शाम
लंदन में राजपुरोहित समाज का भव्य सम्मेलन 2026 सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें सैकड़ों समाजबंधुओं ने भाग लेकर राजस्थानी संस्कृति और एकता का प्रदर्शन किया।

लंदन में राजपुरोहित समाज का भव्य आयोजन

लंदन | यूनाइटेड किंगडम के हैरो (लंदन) में राजपुरोहित समाज यूके द्वारा एक भव्य राजपुरोहित सम्मेलन 2026 का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम ने इंग्लैंड के विभिन्न शहरों और यूरोप के अन्य क्षेत्रों से आए समाज के सदस्यों को एक साथ लाकर अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं का प्रदर्शन करने का एक अनूठा अवसर प्रदान किया।

सांस्कृतिक एकता का प्रदर्शन

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य विदेश में रहने वाले राजपुरोहित समाज के लोगों को अपनी जड़ों, यानी अपनी मातृभूमि, संस्कृति, भाषा और संस्कारों से फिर से जोड़ना था। इसके साथ ही, नई पीढ़ी को उनकी गौरवशाली विरासत से परिचित कराना भी एक महत्वपूर्ण लक्ष्य था।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक राजस्थानी रीति-रिवाजों और गर्मजोशी से भरे अतिथि स्वागत के साथ हुई, जिससे पूरे माहौल में राजस्थानी संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली।

नेतृत्व और संगठन

इस पूरे कार्यक्रम का सफल संयोजन और नेतृत्व हनवंतसिंघ बाडवा ने किया। उनके प्रयासों को मितेश भोजास और वीरेंद्रसिंघ खैरवा के विशेष सहयोग से और मजबूती मिली, जिन्होंने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

समर्पित टीम का योगदान

सम्मेलन स्थल की आकर्षक और पारंपरिक सजावट की जिम्मेदारी शकुंतला बाडवा ने संभाली, जिसकी सभी ने प्रशंसा की। फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी का कार्य राकेशसिंघ मोरखा, विवान धुंधियारी और शिव मुथा ने कुशलतापूर्वक किया, जबकि टिकट व्यवस्था का प्रबंधन महेंद्रसिंघ धुंधियारी ने संभाला।

परंपरा और स्वाद का संगम

सम्मेलन में परोसे गए पारंपरिक राजस्थानी व्यंजनों ने सभी का दिल जीत लिया। भोजन की व्यवस्था KETRAJ द्वारा की गई थी। स्वादिष्ट भोजन चारुलता राजपुरोहित (अर्थंडी) और ललिता राजपुरोहित (पुनायतां) द्वारा बड़े प्रेम से तैयार किया गया था। उपस्थित सभी लोगों ने दाल-बाटी-चूरमा जैसे पारंपरिक व्यंजनों का भरपूर आनंद लिया।

वरिष्ठजनों का मार्गदर्शन

कार्यक्रम के दौरान, समाज के वरिष्ठ सदस्यों भमरजी सांकरणा, विनोदजी सिरोही, रमेशजी कराड़ी और आनंदजी लेडी ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने युवा पीढ़ी को समाज, संस्कृति और संगठन के प्रति समर्पित रहने के लिए प्रेरित किया।

भविष्य का संकल्प

सम्मेलन में समाज के वरिष्ठों और युवाओं ने एक साथ बैठकर वर्तमान और भविष्य से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान सामाजिक एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों में भारतीय संस्कारों को जीवित रखने का संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम का समापन सामूहिक भोजन और आत्मीय मिलन के साथ हुआ, जिसमें समाज की एकता को और मजबूत करने का संकल्प लिया गया। उपस्थित लोगों ने इस आयोजन को विदेश में राजपुरोहित समाज की संस्कृति और मूल्यों को जीवित रखने वाला एक प्रेरणादायी कदम बताया।

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