राजसमंद | राजसमंद झील में बढ़ती लापरवाही और हाल ही में हुई दो दुखद मौतों के बाद प्रशासन ने कड़े सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। उपखण्ड मजिस्ट्रेट ने झील क्षेत्र में व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 163 के तहत नए आदेश जारी किए हैं।
झील की सुरक्षा के लिए प्रशासन का कड़ा फैसला
राजसमंद के उपखण्ड अधिकारी एवं मजिस्ट्रेट बृजेश गुप्ता ने आधिकारिक आदेश जारी करते हुए झील क्षेत्र में कई गतिविधियों पर पाबंदी लगा दी है। यह निर्णय झील में डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए लिया गया है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि झील क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हाल के दिनों में पर्यटकों और स्थानीय निवासियों द्वारा बरती गई लापरवाही चिंता का विषय बनी हुई थी।
जारी किए गए नए आदेश 11 मई 2026 से प्रभावी हो चुके हैं और 10 जुलाई 2026 तक लागू रहेंगे। इस अवधि के दौरान झील के किनारों पर प्रशासनिक निगरानी बढ़ा दी गई है।
ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व का संरक्षण
राजसमंद झील न केवल एक जल स्रोत है, बल्कि यह ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। यहां स्थित प्राचीन छतरियां और नौ चौकी पाल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं।
एसडीएम ने अपने आदेश में उल्लेख किया है कि झील का पानी शहर के लिए पेयजल के रूप में भी उपयोग किया जाता है। इसलिए जल की शुद्धता बनाए रखना अनिवार्य है।
झील क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए वहां किसी भी प्रकार की गंदगी फैलाना अब दंडनीय अपराध माना जाएगा। ऐतिहासिक धरोहरों को किसी भी प्रकार का नुकसान पहुंचाना प्रशासन बर्दाश्त नहीं करेगा।
मानसून पूर्व सुरक्षा के कड़े इंतजाम
आमतौर पर मानसून के दौरान झील में हादसों की आशंका बढ़ जाती है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने मानसून से पहले ही सुरक्षा उपायों को लेकर सख्त कदम उठाए हैं।
दो व्यक्तियों की डूबने से हुई मौत के बाद स्थानीय लोगों में भी सुरक्षा को लेकर मांग उठ रही थी। प्रशासन ने अब झील के खतरनाक हिस्सों की पहचान कर वहां विशेष ध्यान देना शुरू किया है।
झील के सौंदर्य को बनाए रखने और जनहानि को रोकने के लिए पुलिस विभाग को भी विशेष निर्देश दिए गए हैं। गश्त बढ़ाने और नियमों का पालन करवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रतिबंधित गतिविधियों की विस्तृत सूची
नए आदेश के अनुसार, अब कोई भी व्यक्ति राजसमंद झील के ऐतिहासिक घाटों और छतरियों पर साबुन या डिटर्जेंट का उपयोग नहीं कर सकेगा। कपड़े धोने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
स्नान करने वाले लोगों को केवल सीढ़ियों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। बिना किसी रासायनिक पदार्थ के ही स्नान करने की अनुमति होगी ताकि जल प्रदूषित न हो।
इसके अलावा, ऐतिहासिक संरचनाओं पर चढ़ना और झील में असुरक्षित तरीके से कूदना भी प्रतिबंधित है। किसी भी प्रकार की ऐसी गतिविधि जो धरोहर को नुकसान पहुंचाए, उस पर रोक रहेगी।
"झील की ऐतिहासिक गरिमा और पेयजल की शुद्धता बनाए रखने के लिए यह कड़े कदम उठाए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।" - बृजेश गुप्ता, एसडीएम
प्रशासनिक विभागों को सख्त निर्देश
नगर परिषद राजसमंद और संबंधित विभागों को झील क्षेत्र में चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए हैं। बैरिकेडिंग की व्यवस्था भी की जा रही है ताकि लोग खतरनाक क्षेत्रों में न जाएं।
पुलिस को आदेश दिया गया है कि वे नियमित रूप से घाटों का निरीक्षण करें। यदि कोई व्यक्ति नियमों की अवहेलना करता पाया जाता है, तो उसे तुरंत हिरासत में लिया जा सकता है।
नियम तोड़ने पर होगी जेल और जुर्माना
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी। यह कानून लोक सेवक के आदेश की अवहेलना से संबंधित है।
दोषी पाए जाने पर व्यक्ति को एक वर्ष तक का कारावास भुगतना पड़ सकता है। इसके साथ ही 5,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं।
अंत में, यह पाबंदी राजसमंद की जनता और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए है। प्रशासन ने सभी नागरिकों से सहयोग की अपील की है ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।
*Edit with Google AI Studio