राजस्थान

राजसमंद में ओवरलोड ट्रकों का आतंक: राजसमंद: सड़कों पर मौत का बोझ ढो रहे ओवरलोड ट्रक, नियमों की धज्जियां उड़ाने से जनता में भारी आक्रोश

मानवेन्द्र जैतावत · 13 अप्रैल 2026, 10:59 दोपहर
राजसमंद जिले में मार्बल से लदे ओवरलोड ट्रक और डम्पर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। बेलगाम रफ्तार और क्षमता से अधिक भार के कारण हर पल बड़े हादसे का खतरा बना रहता है, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है।

राजसमंद | राजसमंद जिले की सड़कों पर इन दिनों मार्बल से भरे ट्रक, ट्रेलर और डम्पर मानो 'मौत का बोझ' ढो रहे हैं।

क्षमता से कई गुना अधिक वजनी पत्थरों से लदे ये भारी वाहन न सिर्फ यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि हादसे को न्योता दे रहे हैं।

जिला मुख्यालय सहित आसपास के व्यस्त मार्गों पर दिनभर आमजन की आवाजाही रहती है, लेकिन इन ओवरलोड वाहनों की रफ्तार से दहशत का माहौल है।

नियमों की अनदेखी और बढ़ता खतरा

परिवहन विभाग के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद, सड़कों पर ओवरलोडिंग का खेल धड़ल्ले से जारी है और कोई रोकने वाला नहीं है।

कई ट्रकों की हालत इतनी जर्जर है कि चलते-चलते उनसे पत्थर गिरने का डर बना रहता है, जिससे बाइक सवारों की जान जोखिम में है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि ओवरलोड ट्रकों के कारण सड़कें तेजी से क्षतिग्रस्त हो रही हैं, जिससे दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है।

क्या कहती है परिवहन विभाग की नियमावली?

परिवहन नियमों के अनुसार, हर वाहन की एक तय ग्रॉस व्हीकल वेट सीमा निर्धारित होती है, जिसमें वाहन और लोड दोनों शामिल होते हैं।

सामान्य 10-व्हीलर ट्रक के लिए यह सीमा लगभग 25 से 28 टन तक होती है, जबकि 12-व्हीलर ट्रक के लिए यह 31 टन निर्धारित है।

मल्टी-एक्सल ट्रेलर के लिए वजन सीमा 40 टन या उससे अधिक हो सकती है, जो उसके विशिष्ट मॉडल और एक्सल की संख्या पर निर्भर करती है।

निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाले डम्परों के लिए आमतौर पर 16 से 25 टन तक की वजन सीमा तय की गई है जिसका पालन नहीं हो रहा।

नियमों के तहत इन सीमाओं से अधिक वजन ले जाना अवैध है और इसमें भारी जुर्माना व लाइसेंस निलंबन जैसे कड़े प्रावधान शामिल हैं।

सड़कों की जर्जर हालत और प्रशासनिक चुप्पी

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब नियम इतने स्पष्ट हैं, तो सड़कों पर यह खतरनाक खेल आखिर किसकी मिलीभगत से चल रहा है?

क्या परिवहन विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की यह संयुक्त जिम्मेदारी नहीं है कि वे ऐसे बेलगाम वाहनों पर सख्त नकेल कसें?

भारी वजन के कारण डामर की सड़कें समय से पहले ही उखड़ रही हैं, जिससे सरकारी खजाने को भी करोड़ों का भारी नुकसान हो रहा है।

जनता का आक्रोश और कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों में प्रशासन की इस लापरवाही को लेकर भारी रोष है और वे जल्द से जल्द सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन 'चलती-फिरती आफत' पर लगाम नहीं लगाई गई, तो कभी भी कोई बड़ी जनहानि हो सकती है।

क्षेत्र के युवाओं ने मांग की है कि प्रमुख चौराहों पर धर्मकांटा के माध्यम से नियमित जांच की जाए और दोषियों को बख्शा न जाए।

केवल कागजी कार्रवाई के बजाय धरातल पर सख्त कदम उठाने की जरूरत है ताकि राजसमंद की सड़कें आमजन के लिए सुरक्षित हो सकें।

निष्कर्ष: सुरक्षा से समझौता क्यों?

मार्बल व्यवसाय राजसमंद की पहचान है, लेकिन विकास की यह दौड़ निर्दोष लोगों की जान की कीमत पर कतई नहीं होनी चाहिए।

परिवहन माफियाओं पर लगाम कसना और यातायात नियमों को सख्ती से लागू करना अब प्रशासन के लिए अनिवार्य समय की मांग बन गया है।

प्रशासन को चाहिए कि वह फ्लाइंग स्क्वाड की संख्या बढ़ाए और अवैध रूप से संचालित हो रहे ओवरलोड वाहनों को तुरंत सीज करे।

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