सवाई माधोपुर | राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान से इन दिनों एक बेहद सुखद और रोमांचक खबर सामने आ रही है। पार्क के झूमर बावड़ी क्षेत्र में बाघ RBT-2407 और बाघिन RBT-2510 को एक साथ जोड़े के रूप में घूमते हुए देखा गया है। बाघ और बाघिन को इस तरह साथ देखना वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए किसी बड़े रोमांच से कम नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों के बीच मेटिंग की प्रबल संभावना बनी हुई है। इसे रणथंभौर के पारिस्थितिकी तंत्र और बाघों की आबादी के लिए एक बहुत ही सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
बाघ और बाघिन की पारिवारिक पृष्ठभूमि
बाघिन RBT-2510 की बात करें तो वह रणथंभौर की मशहूर बाघिन सुल्ताना (T-107) की बेटी है। सुल्ताना अपनी खूबसूरती और शिकार करने की कला के लिए जानी जाती रही है। RBT-2510 की उम्र वर्तमान में लगभग तीन साल है और वह अब अपना नया इलाका बनाने की कोशिश कर रही है। वहीं, उसका साथी बाघ RBT-2407 भी किसी से कम नहीं है। वह रणथंभौर के ही प्रसिद्ध बाघ T-93 का बेटा है। इस युवा बाघ की उम्र लगभग चार साल है। इन दोनों की जोड़ी ने पर्यटकों के बीच काफी जिज्ञासा पैदा कर दी है और सफारी के दौरान लोग इन्हें देखने के लिए उत्साहित रहते हैं।
झूमर बावड़ी और फतेह कैफे क्षेत्र में मूवमेंट
फिलहाल इन दोनों बाघों का मूवमेंट मुख्य रूप से झूमर बावड़ी वन क्षेत्र में बना हुआ है। वन विभाग की टीम लगातार इनकी गतिविधियों पर नजर रख रही है। बताया जा रहा है कि फतेह कैफे के पीछे वाले हिस्से तक इनकी सक्रियता काफी ज्यादा देखी जा रही है। सोमवार यानी 20 अप्रैल को भी यह जोड़ा फतेह कैफे के ठीक पीछे आराम करता हुआ दिखाई दिया। जब पर्यटकों की नजर इस जोड़े पर पड़ी, तो वहां उत्साह की लहर दौड़ गई। पार्क के गाइडों का कहना है कि दोनों काफी शांत मुद्रा में थे और एक-दूसरे की मौजूदगी का आनंद ले रहे थे।
बाघ RBT-2407 के व्यवहार में आया बदलाव
दिलचस्प बात यह है कि पिछले कुछ महीनों में बाघ RBT-2407 का व्यवहार पूरी तरह से बदल गया है। इससे पहले यह बाघ बार-बार जंगल की सीमा लांघकर आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच जाता था। इसके कारण स्थानीय ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना रहता था। बाघ की सुरक्षा और निगरानी के लिए वन विभाग ने उसे ट्रैंकुलाइज कर रेडियो कॉलर भी लगाया था। रेडियो कॉलर की मदद से उसकी हर हलचल पर नजर रखी जा रही थी। लेकिन अब बाघ का जंगल के अंदर बाघिन के साथ समय बिताना वन अधिकारियों के लिए बड़ी राहत की बात है।
वन विभाग की बढ़ी सतर्कता
बाघों की इस जोड़ी की सक्रियता को देखते हुए वन विभाग ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि मेटिंग पीरियड के दौरान बाघों को शांति की आवश्यकता होती है। इसलिए पर्यटकों से भी अपील की गई है कि वे सफारी के दौरान शोर न मचाएं और निश्चित दूरी बनाए रखें। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो आने वाले समय में रणथंभौर को नए शावकों की सौगात मिल सकती है। यह न केवल वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे पर्यटन को भी काफी बढ़ावा मिलेगा। फिलहाल पूरा वन विभाग इस जोड़े की मॉनिटरिंग में जुटा हुआ है।