राजस्थान

रणथंभौर: टाइगर T-2402 की मौत: रणथंभौर में टेरिटोरियल फाइट, युवा टाइगर T-2402 की मौत

मानवेन्द्र जैतावत · 28 अप्रैल 2026, 04:10 दोपहर
सवाई माधोपुर के रणथंभौर टाइगर रिजर्व में अपनी सल्तनत बचाने की जंग में युवा बाघ T-2402 की जान चली गई।

सवाई माधोपुर | राजस्थान के विश्व प्रसिद्ध रणथंभौर टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद हृदयविदारक खबर सामने आई है।

यहां के फलौदी रेंज में रहने वाले एक अत्यंत फुर्तीले और युवा बाघ T-2402 की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, अपनी सल्तनत और इलाके को बचाने की एक भीषण जंग में इस युवा बाघ ने अपनी जान गंवा दी।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस बाघ का शव फलौदी रेंज के हिंदवाड इलाके में एक दुर्गम पहाड़ी पर मिला है।

यह पहाड़ी करीब 500 फीट ऊंची थी और चारों तरफ से घनी झाड़ियों और कंटीले पेड़ों से पूरी तरह से घिरी हुई थी।

इतनी ऊंचाई और कठिन रास्तों के कारण वन विभाग की टीम के लिए शव तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा था।

500 फीट ऊंची पहाड़ी पर रेस्क्यू ऑपरेशन

कड़ी मशक्कत और घंटों के प्रयास के बाद वन कर्मियों ने शव को पहाड़ी से नीचे उतारा और नाका राजबाग वन चौकी लेकर आए।

बाघ T-2402 की उम्र अभी करीब साढ़े चार साल ही थी और वह जंगल के नियमों के अनुसार अपनी जवानी के पड़ाव पर था।

वह रणथंभौर की मशहूर बाघिन T-99 का बेटा था और पूरे जंगल में अपनी धाक और दबदबा कायम करने की कोशिश कर रहा था।

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि युवा बाघ अक्सर अपनी नई टेरिटरी बनाने के लिए पुराने और शक्तिशाली बाघों से भिड़ जाते हैं।

T-2402 के मामले में भी यही हुआ कि उसने अपने अस्तित्व को बचाने के लिए जंगल के अन्य योद्धाओं से सीधा मुकाबला किया।

इस संघर्ष की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बाघ का शव इतनी ऊंचाई पर जाकर मिला है।

वर्चस्व की जंग और खूनी संघर्ष

रणथंभौर के फील्ड डायरेक्टर शारदा प्रताप सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला पूरी तरह से 'टेरिटोरियल फाइट' का लग रहा है।

जिस इलाके में T-2402 सक्रिय रहता था, उसी क्षेत्र में टाइगर T-108 और T-2310 की भी निरंतर आवाजाही बनी रहती है।

वनाधिकारियों का मानना है कि अपनी जगह बचाने की होड़ में T-2402 की भिड़ंत इन्हीं में से किसी एक ताकतवर बाघ से हुई होगी।

इस खूनी संघर्ष के दौरान T-2402 गंभीर रूप से घायल हो गया होगा और अंततः उसने दम तोड़ दिया होगा।

"शुरुआती जांच से पता चलता है कि यह टेरिटोरियल फाइट है, लेकिन मौत की सटीक वजह पोस्टमार्टम के बाद ही स्पष्ट होगी।" - शारदा प्रताप सिंह, फील्ड डायरेक्टर

हालांकि, मौत के वास्तविक और वैज्ञानिक कारणों का खुलासा विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तरह से साफ हो पाएगा।

रणथंभौर में घटती जगह का बड़ा संकट

यह घटना एक बार फिर जंगल की उस कड़वी और डरावनी सच्चाई को दुनिया के सामने लाती है जिससे बाघ जूझ रहे हैं।

रणथंभौर में बाघों की संख्या में निरंतर हो रही बढ़ोतरी हमारे लिए गर्व की बात है, लेकिन उनके लिए जंगल अब छोटा पड़ रहा है।

सीमित भौगोलिक क्षेत्र और बढ़ती आबादी की वजह से युवा बाघों के बीच आपसी संघर्ष की घटनाएं अब काफी बढ़ गई हैं।

जब एक ही इलाके में कई शक्तिशाली शिकारी रहते हैं, तो संसाधनों और क्षेत्र के लिए ऐसी हिंसक भिड़ंत होना अनिवार्य हो जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बाघों को नया कॉरिडोर नहीं मिला, तो भविष्य में ऐसी दुखद घटनाएं और भी ज्यादा बढ़ सकती हैं।

वन विभाग अब इस बात पर विचार कर रहा है कि कैसे बाघों के लिए सुरक्षित आवाजाही के रास्ते और नए आवास विकसित किए जाएं।

अंतिम संस्कार और भविष्य की निगरानी

मंगलवार को सरकारी गाइडलाइन (NTCA) के अनुसार, प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में बाघ के शव का पोस्टमार्टम संपन्न किया गया।

इसके बाद पूरे सम्मान और विधि-विधान के साथ वन विभाग के अधिकारियों ने बाघ के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार कर दिया।

इस दुखद घटना के बाद वन विभाग की विशेष निगरानी टीम ने संबंधित इलाके में अपनी गश्त और पेट्रोलिंग को काफी बढ़ा दिया है।

अधिकारी अब अन्य बाघों की गतिविधियों पर भी नजर रख रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई अन्य बाघ घायल तो नहीं है।

पूरे मामले की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि संघर्ष के पीछे की पूरी कड़ियों को वैज्ञानिक तरीके से जोड़ा जा सके।

यह घटना वन्यजीव संरक्षण की दिशा में नई चुनौतियों और बाघों के प्रबंधन की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है।

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