सवाई माधोपुर | राजस्थान के सवाई माधोपुर स्थित विश्व प्रसिद्ध रणथंभौर टाइगर रिजर्व से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने वन्यजीव प्रेमियों को रोमांचित कर दिया है। रविवार की सुबह यहां के जंगल में कुदरत का एक बेहद ही दुर्लभ और खौफनाक मंजर देखने को मिला।
आमतौर पर बाघ और मगरमच्छ एक-दूसरे के रास्तों में नहीं आते हैं, लेकिन इस बार बाघिन टी-111, जिसे 'शक्ति' के नाम से जाना जाता है, ने इतिहास दोहरा दिया। उसने पानी के बेताज बादशाह माने जाने वाले एक विशालकाय मगरमच्छ को मौत के घाट उतार दिया।
सफारी के दौरान थम गईं पर्यटकों की सांसें
यह पूरी घटना रणथंभौर के जोन नंबर चार में स्थित जामुन देह क्षेत्र की है। रविवार सुबह की शिफ्ट में जब पर्यटक जिप्सियों और कैंटर में सवार होकर बाघों के दीदार के लिए निकले थे, तब उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि वे क्या देखने वाले हैं।
सुबह के करीब नौ बज रहे थे और जंगल अपनी पूरी लय में था। तभी पर्यटकों की नजर तालाब के किनारे घात लगाकर बैठी बाघिन शक्ति पर पड़ी। बाघिन बिल्कुल शांत थी और उसकी नजरें पानी की हलचल पर टिकी हुई थीं।
जब पानी से बाहर निकला काल
तभी तालाब के भीतर से एक विशाल मगरमच्छ धीरे-धीरे रेंगते हुए किनारे की ओर आने लगा। मगरमच्छ शायद धूप सेंकने या आराम करने के इरादे से बाहर आ रहा था। उसे इस बात का जरा भी इल्म नहीं था कि झाड़ियों के पीछे उसकी मौत खड़ी है।
जैसे ही मगरमच्छ पूरी तरह से जमीन पर आया, बाघिन शक्ति ने बिजली की गति से उस पर छलांग लगा दी। अचानक हुए इस हमले ने मगरमच्छ को संभलने का एक सेकंड का भी समय नहीं दिया। पर्यटकों के लिए यह दृश्य किसी थ्रिलर फिल्म जैसा था।
10 मिनट का महासंग्राम
इसके बाद शुरू हुआ जमीन के सुल्तान और पानी के सुल्तान के बीच का महायुद्ध। मगरमच्छ ने अपने भारी जबड़ों और पूंछ से बाघिन पर पलटवार करने की कोशिश की। वह बार-बार खुद को छुड़ाकर वापस पानी की गहराई में जाने का प्रयास कर रहा था।
लेकिन बाघिन शक्ति के इरादे फौलादी थे। उसने अपनी ताकत और फुर्ती का बेजोड़ तालमेल दिखाते हुए मगरमच्छ की गर्दन को अपने मजबूत जबड़ों में जकड़ लिया। करीब 10 मिनट तक दोनों के बीच जीवन और मृत्यु का कड़ा संघर्ष चलता रहा।
बाघिन की ताकत के आगे पस्त हुआ मगरमच्छ
मगरमच्छ पानी के भीतर बेहद ताकतवर होता है, लेकिन जमीन पर उसकी गति सीमित हो जाती है। इसी कमजोरी का फायदा बाघिन ने उठाया। उसने मगरमच्छ को पानी तक पहुंचने ही नहीं दिया और अंततः उसे मार गिराया।
मगरमच्छ के शांत होते ही बाघिन ने उसे अपने जबड़ों में दबाया और घसीटते हुए घने जंगल की ओर ले गई। वहां मौजूद पर्यटकों ने इस पूरे घटनाक्रम को अपने कैमरों में कैद किया। कई पर्यटक तो डर और रोमांच के मारे कांप रहे थे।
मछली की याद आई ताजा
रणथंभौर के इतिहास में यह पहली बार नहीं है जब किसी बाघ ने मगरमच्छ का शिकार किया हो। इससे पहले रणथंभौर की 'महारानी' कही जाने वाली बाघिन टी-16 'मछली' भी मगरमच्छों का शिकार करने के लिए पूरी दुनिया में मशहूर थी।
मछली के बाद अब उसकी वंशज बाघिन शक्ति ने यह कारनामा कर दिखाया है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, बाघिन शक्ति का यह व्यवहार उसकी बढ़ती आक्रामकता और शिकार करने की अद्भुत क्षमता को दर्शाता है।
विशेषज्ञों की राय और रोमांच
विशेषज्ञों का कहना है कि बाघ आमतौर पर मगरमच्छ जैसे जोखिम भरे शिकार से बचते हैं। मगरमच्छ की खाल बेहद सख्त होती है और उसका एक वार बाघ को गंभीर रूप से घायल कर सकता है। ऐसे में यह शिकार शक्ति के आत्मविश्वास का प्रमाण है।
रणथंभौर प्रशासन का कहना है कि इस तरह की घटनाएं पारिस्थितिकी तंत्र की जीवंतता को दर्शाती हैं। यह घटना बताती है कि जंगल में जीवित रहने के लिए हर पल संघर्ष करना पड़ता है और यहां नियम हमेशा बदलते रहते हैं।
इस रोमांचक नजारे को देखने वाले पर्यटक खुद को भाग्यशाली मान रहे हैं। गाइडों का कहना है कि कई लोग सालों तक जंगल आते हैं लेकिन उन्हें ऐसा दृश्य कभी देखने को नहीं मिलता। यह रणथंभौर की सफारी के इतिहास में एक यादगार दिन बन गया है।