सफलता की कहानी

ड्राइवर के बेटे ने रचा इतिहास: RAS Result 2024: कुंभलगढ़ के ड्राइवर के बेटे हरपाल सिंह ने 319वीं रैंक के साथ मारी बाजी, पिता के संघर्ष की हुई जीत

प्रदीप बीदावत · 19 अप्रैल 2026, 08:19 सुबह
राजसमंद के बारिण्ड गांव के हरपाल सिंह सोलंकी ने RAS परीक्षा 2024 में 319वीं रैंक हासिल की है। एक ड्राइवर पिता के बेटे की यह सफलता पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है।

राजसमंद |  राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) परीक्षा 2024 के परिणाम घोषित हो चुके हैं। इस बार की सफलता की कहानियों में कुंभलगढ़ के एक छोटे से गांव की कहानी सबसे अलग और प्रेरणादायक है।
गजपुर पंचायत के बारिण्ड गांव के हरपाल सिंह सोलंकी ने इस कठिन परीक्षा में 319वीं रैंक हासिल की है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे जिले का मान बढ़ाया है।
जैसे ही शनिवार को परिणाम की घोषणा हुई, हरपाल के घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। गांव की गलियों में जश्न का माहौल है और हर कोई हरपाल की तारीफ कर रहा है।

पिता के संघर्ष की अटूट कहानी

इस चमकती सफलता के पीछे वर्षों का कठिन संघर्ष और आंसुओं की स्याही छिपी हुई है। यह कहानी एक ऐसे पिता की है जिसने स्टीयरिंग थामकर अपने बेटे के सपनों को नई दिशा दी।
हरपाल के पिता मोती सिंह सोलंकी पेशे से ड्राइवर हैं। उनका पूरा जीवन लंबी दूरी तय करने और सड़कों पर गाड़ियां दौड़ाने में बीता है। ताकि उनके बच्चों का भविष्य संवर सके।
ड्राइवर की नौकरी में न तो समय का ठिकाना होता है और न ही आराम का। मोती सिंह ने दिन-रात मेहनत की ताकि सीमित आय में भी हरपाल की पढ़ाई में कोई बाधा न आए।
जब परिणाम आया और बेटे का नाम चयनित सूची में दिखा, तो पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। यह आंसू उस थकान को मिटाने वाले थे जो उन्होंने बरसों से झेली थी।

नवोदय से शुरू हुआ सफलता का सफर

हरपाल सिंह सोलंकी की शुरुआती पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय से हुई। नवोदय के अनुशासित माहौल ने उन्हें बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करना सिखाया।
वे बताते हैं कि उनके पास संसाधनों की कमी जरूर थी, लेकिन हौसलों में कोई कमी नहीं थी। उन्होंने हमेशा अपने पिता के पसीने की कीमत को समझा और पढ़ाई को अपनी प्राथमिकता बनाया।
वर्तमान में हरपाल सिंह कांकरोली में ट्रेनी पटवारी के पद पर कार्यरत हैं। पटवारी की नौकरी करते हुए भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और प्रशासनिक अधिकारी बनने का लक्ष्य नहीं छोड़ा।

असफलता से नहीं मानी हार

RAS में सफलता पाना हरपाल के लिए आसान नहीं था। यह उनका तीसरा प्रयास था। इससे पहले दो बार उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा था, जिससे वे काफी निराश भी हुए थे।
लेकिन हरपाल ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी पिछली गलतियों से सीखा और नए सिरे से तैयारी शुरू की। उनका मानना है कि असफलता केवल यह बताती है कि सफलता का प्रयास पूरे मन से नहीं हुआ।
तीसरे प्रयास में उन्होंने अपनी रणनीति बदली और सेल्फ स्टडी पर अधिक ध्यान दिया। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने 319वीं रैंक के साथ अपना और अपने पिता का सपना पूरा कर दिखाया।

गांव में जश्न और उम्मीद की नई किरण

बारिण्ड गांव के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण है। ग्रामीणों का कहना है कि हरपाल ने यह साबित कर दिया कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो गांव की पगडंडियों से निकलकर भी बड़े मुकाम पाए जा सकते हैं।
गांव के युवाओं के लिए हरपाल अब एक रोल मॉडल बन चुके हैं। उनकी सफलता ने यह संदेश दिया है कि आर्थिक स्थिति कभी भी प्रतिभा के आड़े नहीं आ सकती है।

मां का त्याग और परिवार का पूरा साथ

हरपाल की मां मुन्ना कुंवर एक गृहिणी हैं। उन्होंने घर की जिम्मेदारियों को बखूबी संभाला ताकि हरपाल बिना किसी चिंता के अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
एक मध्यमवर्गीय परिवार में जब बेटा इतनी बड़ी परीक्षा की तैयारी करता है, तो पूरा परिवार उसके साथ तपस्या करता है। हरपाल के मामले में भी उनके माता-पिता ने हर सुख-सुविधा का त्याग किया।

युवाओं के लिए विशेष संदेश

अपनी सफलता पर हरपाल कहते हैं कि युवाओं को कभी भी अपनी परिस्थितियों को दोष नहीं देना चाहिए। मेहनत और निरंतरता ही सफलता की एकमात्र कुंजी है।
वे अपनी इस जीत का श्रेय अपने माता-पिता के आशीर्वाद और उनके द्वारा किए गए त्याग को देते हैं। अब वे एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में समाज की सेवा करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
यह कहानी हमें सिखाती है कि सपने चाहे कितने भी बड़े क्यों न हों, अगर उनके पीछे एक पिता का संघर्ष और बेटे का अटिग संकल्प हो, तो उन्हें हकीकत में बदला जा सकता है।

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