बाड़मेर | राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित गिरल लिग्नाइट माइंस के मजदूरों और ट्रक चालकों का आंदोलन अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। प्रशासन के साथ बुधवार को हुई दूसरे दौर की वार्ता भी पूरी तरह विफल रही है।
इस विफलता के बाद आंदोलनकारियों ने संघर्ष को और अधिक व्यापक बनाने की चेतावनी दी है। विधायक रविंद्र सिंह भाटी खुद इस धरने का नेतृत्व कर रहे हैं और देर रात तक धरना स्थल पर मौजूद रहे।
बाड़मेर के कलेक्ट्रेट परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। मजदूरों और ट्रक चालकों की मांगों पर सहमति नहीं बन पाने के कारण प्रशासन और पुलिस के लिए भी स्थिति को संभालना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
प्रशासन के साथ 4 घंटे चली मैराथन वार्ता रही निष्फल
बुधवार को प्रशासन और आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल के बीच करीब चार घंटे तक गहन चर्चा हुई। हालांकि, ठेकेदार और कंपनी प्रबंधन के अड़ियल रुख के कारण कोई भी ठोस समाधान नहीं निकल सका।
विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने स्पष्ट किया कि जब तक ठेकेदार को सामने नहीं बुलाया जाता और मांगों पर लिखित भरोसा नहीं मिलता, तब तक यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा। मजदूर अपनी मांगों पर अडिग हैं।
भीषण गर्मी में भी डटे रहे हजारों आंदोलनकारी
बाड़मेर की तपती धूप और भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में श्रमिक और ग्रामीण धरना स्थल पर डटे हुए हैं। उनकी मांग है कि हटाए गए 100 से अधिक कर्मियों को तुरंत बहाल किया जाए।
इसके अलावा मजदूरों के लिए 8 घंटे की ड्यूटी व्यवस्था लागू करने और स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई जा रही है। श्रमिक अपने अधिकारों के लिए लड़ने को तैयार हैं।
रविंद्र सिंह भाटी का पेट्रोल कांड और आक्रोश
इससे पहले मंगलवार को कलेक्ट्रेट कूच के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई जब विधायक भाटी ने खुद पर पेट्रोल उड़ेल लिया। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें आत्मदाह करने से रोका और बोतल छीन ली।
इस दौरान भाटी काफी भावुक दिखे और उन्होंने पुलिसिया कार्रवाई का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन को मजदूरों की समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय उनका समाधान निकालना चाहिए, अन्यथा परिणाम गंभीर होंगे।
मुझे मारो, मजदूरों को मत मारो। हमारी लड़ाई हक की है और हम पीछे नहीं हटेंगे। प्रशासन को मजदूरों के साथ न्याय करना ही होगा।
श्रम कानूनों के उल्लंघन का आरोप
आंदोलनकारियों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन श्रम कानूनों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहा है। मजदूरों को न तो समय पर वेतन मिल रहा है और न ही बोनस जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।
स्थानीय ग्रामीणों ने भी इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। उनका कहना है कि गिरल माइंस में स्थानीय युवाओं की अनदेखी की जा रही है, जो कि क्षेत्र के विकास के लिए अनुचित है।
आगामी रणनीति और संभावित असर
वार्ता विफल होने के बाद अब आंदोलन के और अधिक उग्र होने की संभावना है। रविंद्र सिंह भाटी ने संकेत दिए हैं कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो पूरे जिले में चक्का जाम किया जा सकता है।
प्रशासन इस समय बैकफुट पर नजर आ रहा है और उच्च अधिकारियों से निर्देश मिलने का इंतजार कर रहा है। बाड़मेर की इस औद्योगिक अशांति का असर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
अंततः, यह संघर्ष केवल मजदूरों की बहाली का नहीं, बल्कि बाड़मेर के स्थानीय युवाओं के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई बन चुका है। आने वाले दिन इस आंदोलन के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होंगे।
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