राजस्थान

बाड़मेर: रविंद्र सिंह भाटी के पेट्रोल कांड से राजस्थान में सियासी भूचाल

बलजीत सिंह शेखावत · 20 मई 2026, 12:54 दोपहर
बाड़मेर में मजदूरों के हक के लिए विधायक रविंद्र सिंह भाटी के आत्मघाती कदम ने भाजपा को घेरा।

बाड़मेर | राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर में गिरल लिग्नाइट माइंस के मजदूरों का आंदोलन अब एक बड़े राजनीतिक भूचाल में तब्दील हो चुका है। निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी के आत्मघाती कदम ने मरुधरा की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है।

बाड़मेर कलेक्ट्रेट पर भावुक और खौफनाक मंजर

बाड़मेर में पिछले 40 दिनों से मजदूर अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी पिछले 14 दिनों से उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे।

प्रशासन की लगातार अनदेखी से क्षुब्ध होकर भाटी ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया। इस घटना ने वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और समर्थकों के होश उड़ा दिए।

विधायक भाटी का यह भावुक कदम सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता ने इस मुद्दे को पूरे राजस्थान की चर्चा का विषय बना दिया है।

कांग्रेस का मास्टरस्ट्रोक: भाटी के समर्थन में उतरे दिग्गज

इस घटनाक्रम के बाद राजस्थान कांग्रेस पूरी तरह से हमलावर मुद्रा में आ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया है।

कांग्रेस ने इसे भाजपा सरकार की संवेदनहीनता करार दिया है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि भाटी के साथ खड़े होकर वे युवाओं और मजदूर वर्ग का भरोसा जीत सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस इस मौके को भाजपा सरकार की घेराबंदी के लिए सबसे बड़ा हथियार मान रही है। इससे सरकार पूरी तरह बैकफुट पर नजर आ रही है।

अशोक गहलोत ने सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने गृह विभाग और मुख्यमंत्री की कार्यशैली की कड़ी आलोचना करते हुए मजदूरों के हक की बात की।

"भाजपा शासन में जब एक विधायक को अपनी मांगों पर ध्यानाकर्षण के लिए आत्मघाती कदम उठाना पड़ रहा है, तो आम आदमी की स्थिति की कल्पना की जा सकती है।"

गहलोत ने मांग की है कि सरकार को तुरंत सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने मजदूरों की जायज मांगों को बिना किसी देरी के पूरा करने की पुरजोर वकालत की है।

डोटासरा का तीखा प्रहार: 'लोकतंत्र वेंटिलेटर पर'

पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने अपने चिरपरिचित अंदाज में सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने भजनलाल सरकार को 'पर्ची सरकार' कहते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन का आरोप लगाया है।

डोटासरा ने कहा कि यह राजस्थान के इतिहास के लिए एक काला दिन है। एक जनप्रतिनिधि को अपनी बात सुनाने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ रही है, जो बेहद शर्मनाक है।

उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि अगर 45 दिन से भूखे-प्यासे बैठे मजदूरों की सुनवाई नहीं हुई, तो परिणाम गंभीर होंगे। कांग्रेस इस लड़ाई को सड़क से सदन तक ले जाएगी।

युवा आक्रोश और सरकार के सामने बड़ी चुनौती

रविंद्र सिंह भाटी की सोशल मीडिया पर पकड़ बहुत मजबूत है। उनके भावुक बयान ने जनता में भारी सहानुभूति पैदा कर दी है। यह आक्रोश अब केवल बाड़मेर तक सीमित नहीं रहा है।

पूरे प्रदेश के युवा इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ एकजुट होते दिख रहे हैं, जो भाजपा के लिए बड़ी चिंता का विषय है। विपक्ष इस मौके को गंवाना नहीं चाहता।

निष्कर्षतः, बाड़मेर की यह आग अब जयपुर के गलियारों तक पहुंच चुकी है। मजदूरों की यह लड़ाई अब राजस्थान की सत्ता और विपक्ष के बीच एक बड़े शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बन गई है।

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