राजनीति

बीज निगम घूसकांड: किरोड़ी लाल मीणा के समर्थन में उतरे रविंद्र सिंह भाटी, बोले- 'भ्रष्टाचार के आरोप राजनीतिक साजिश'

बलजीत सिंह शेखावत · 11 जून 2026, 06:09 शाम

जयपुर। राजस्थान के कृषि विभाग और राज्य बीज निगम से जुड़े कथित ₹2.43 करोड़ रिश्वत प्रकरण को लेकर प्रदेश की राजनीति में घमासान जारी है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई के बाद कांग्रेस लगातार कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा पर निशाना साध रही है और उनके इस्तीफे की मांग कर रही है। इस बीच कृषि मंत्री के समर्थन में नेताओं के बयान भी सामने आने लगे हैं।

नागौर सांसद और आरएलपी प्रमुख Hanuman Beniwal के बाद अब शिव से निर्दलीय विधायक Ravindra Singh Bhati ने भी खुलकर डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का बचाव किया है। जोधपुर दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में भाटी ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक षड्यंत्र करार देते हुए कृषि मंत्री की ईमानदारी पर भरोसा जताया।

'दशकों लंबे राजनीतिक जीवन पर सवाल उठाना अनुचित'

रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि राजस्थान की जनता अच्छी तरह जानती है कि कौन जनहित में काम कर रहा है और कौन राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का राजनीतिक जीवन लंबे समय से सार्वजनिक जांच के दायरे में रहा है और उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाना तर्कसंगत नहीं है।

भाटी ने कहा, "डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने छात्र जीवन से लेकर आज तक प्रशासनिक भ्रष्टाचार, पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के खिलाफ लगातार आवाज उठाई है। ऐसे व्यक्ति को भ्रष्टाचार से जोड़ना उचित नहीं है।"

'जन-छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास'

निर्दलीय विधायक ने आरोप लगाया कि वर्तमान विवाद को राजनीतिक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उनके अनुसार, कृषि मंत्री की जन-स्वीकृति और सक्रिय राजनीतिक भूमिका को देखते हुए उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

भाटी ने कहा कि किसी भी मामले में तथ्यों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही निर्णय होना चाहिए, न कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर।

'जनहित के मुद्दे उठाने वाले नेताओं की जरूरत'

रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि प्रदेश की राजनीति में ऐसे नेताओं की आवश्यकता है जो आम जनता, किसानों और वंचित वर्गों के मुद्दों को मजबूती से उठाते हों। उन्होंने कहा कि यदि जनहित के सवालों पर मुखर रहने वाले नेताओं को राजनीतिक दबाव में कमजोर किया गया तो इसका असर लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता की आवाज पर पड़ेगा।

उन्होंने कहा, "राजस्थान में किसानों और गरीबों के हितों की आवाज उठाने वाले मजबूत नेताओं का सक्रिय रहना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है।"

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