बाड़मेर | राजस्थान के बाड़मेर जिले में गिरल माइंस के मजदूरों के आंदोलन ने मंगलवार को एक नया और बेहद गंभीर मोड़ ले लिया। शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कलेक्ट्रेट परिसर में खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया।
इस अचानक हुई घटना से पूरे कलेक्ट्रेट परिसर में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। वहां मौजूद पुलिस कर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया। विधायक के इस कदम ने आंदोलन को उग्र बना दिया।
बता दें कि गिरल माइंस में कार्यरत स्थानीय मजदूर पिछले 38 दिनों से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठे थे। मजदूरों की मांगों पर सुनवाई न होने से रोष बढ़ रहा था।
मंगलवार को प्रदर्शनकारी मजदूरों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इससे पहले गिरल धरना स्थल से विधायक रविंद्र सिंह भाटी के नेतृत्व में एक विशाल काफिला बाड़मेर कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हुआ था। इस काफिले में हजारों लोग शामिल थे।
मजदूरों का जनसैलाब और प्रशासनिक चुनौती
विधायक भाटी के साथ बड़ी संख्या में श्रमिक और ग्रामीण गाड़ियों के काफिले में पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लिए हुए थे। वे अपनी मांगों के समर्थन में लगातार नारेबाजी कर रहे थे।
कलेक्ट्रेट पहुंचने से पहले गिरल गांव में एक विशाल मजदूर आंदोलन जनसभा का आयोजन किया गया था। इस सभा में प्रदेशभर से मजदूर संगठनों, किसान समूहों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मजदूर किसी भी प्रदेश और व्यवस्था की असली रीढ़ होते हैं। उनकी समस्याओं को अनदेखा करना पूरी व्यवस्था के लिए घातक साबित हो सकता है।
भाटी ने जोर देकर कहा कि मजदूरों की मांगों को सरकार और प्रशासन द्वारा पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना जाना चाहिए। लेकिन लंबे समय से उनकी आवाज को प्रशासन द्वारा दबाया जा रहा है।
प्रशासन की उदासीनता पर विधायक का कड़ा प्रहार
विधायक ने प्रशासन पर सीधा आरोप लगाया कि पिछले 38 दिनों से आंदोलन चल रहा है, लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई है। प्रशासन केवल समय बिताने की कोशिश कर रहा है।
भाटी ने खुलासा किया कि वह स्वयं पिछले 14 दिनों से मजदूरों के समर्थन में उनके साथ धरने पर बैठे हैं। इतने लंबे समय के बाद भी प्रशासन का सक्रिय न होना काफी चिंताजनक है।
उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के लिए सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता को जिम्मेदार ठहराया। भाटी ने कहा कि जब जनप्रतिनिधि और आम जनता सड़कों पर हैं, तब भी अधिकारियों का मौन रहना दुर्भाग्यपूर्ण है।
कलेक्ट्रेट में तनावपूर्ण स्थिति और सुरक्षा के इंतजाम
विधायक भाटी के बाड़मेर पहुंचने की पूर्व सूचना मिलते ही जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया था। शहर के मुख्य मार्गों और प्रमुख चौराहों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए शहर में जगह-जगह बैरिकेड लगाए गए थे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था को संभालने के लिए चप्पे-चप्पे पर तैनात नजर आए और पूरी स्थिति की निगरानी करते रहे।
मजदूरों का हक उन्हें मिलना ही चाहिए। अगर प्रशासन शांतिपूर्ण तरीके से बात नहीं सुनता, तो हमें कड़े कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। हम पीछे हटने वाले नहीं हैं।
पूरे घटनाक्रम की मॉनिटरिंग बाड़मेर एसपी चूनाराम जाट स्वयं कर रहे हैं। पुलिस की टीमें भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए लगातार मुस्तैद दिखाई दे रही हैं।
आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी
मजदूर संगठनों ने अब स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे अपने आंदोलन को और भी उग्र करेंगे। मजदूर अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।
विधायक भाटी के पेट्रोल छिड़कने की घटना के बाद ग्रामीणों में भी खासा आक्रोश देखा जा रहा है। लोग अब न्याय की मांग को लेकर और भी मुखर होकर सड़कों पर उतरने को तैयार हैं।
इस घटना ने राजस्थान की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर स्थिति से कैसे निपटता है और मजदूरों की मांगों का क्या समाधान निकलता है।
बाड़मेर की यह घटना दर्शाती है कि जब संवाद के रास्ते बंद हो जाते हैं, तो आंदोलन किस तरह चरम पर पहुंच जाता है। फिलहाल जिले में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन पूरी तरह नियंत्रण में बनी हुई है।
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