राजस्थान

Barmer: रविंद्र सिंह भाटी के कड़े तेवर शिव में 4 नए ट्यूबवेल मंजूर

बलजीत सिंह शेखावत · 25 मई 2026, 04:27 दोपहर
शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी के आंदोलन के आगे झुकी सरकार, पेयजल संकट दूर करने को मिली बड़ी सौगात।

बाड़मेर | राजस्थान की सरहदी सियासत और थार के रेगिस्तान की तपती रेत के बीच अधिकारों की एक अभूतपूर्व लड़ाई लड़ी जा रही है। शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी और भजनलाल सरकार के बीच संघर्ष तेज है। विधायक रविंद्र सिंह भाटी और सूबे की भजनलाल शर्मा सरकार के बीच चल रही राजनीतिक शह-मात के खेल में आज एक नया मोड़ आया है। प्रशासनिक मशीनरी ने आखिरकार भाटी के तेवरों के आगे घुटने टेके हैं। बाड़मेर जिले के गिरल लिग्नाइट माइंस क्षेत्र में मजदूरों और ट्रक ऑपरेटरों की मांगों को लेकर पिछले 47 दिनों से धरना चल रहा है। निर्दलीय विधायक भाटी स्वयं इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।

शिव विधानसभा के लिए ₹78.48 लाख की मंजूरी

जयपुर के जल भवन यानी पीएचईडी मुख्यालय से एक महत्वपूर्ण सरकारी आदेश जारी हुआ है। यह आदेश शिव विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में पानी की किल्लत को दूर करने के लिए जारी किया गया है। सरकार ने करीब ₹78.48 लाख की लागत से बनने वाले 4 नए ट्यूबवेल को हरी झंडी दे दी है। इस फैसले को विधायक भाटी के आंदोलन की पहली बड़ी नैतिक जीत माना जा रहा है। रेगिस्तानी इलाकों में पानी की समस्या हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रही है। भाटी लगातार इन बुनियादी सुविधाओं के लिए सरकार पर दबाव बना रहे थे। इस मंजूरी से स्थानीय निवासियों को बड़ी राहत मिलेगी।

आंदोलन की दिशा और बदलती राजनीतिक दशा

गिरल माइंस के मजदूरों के शोषण के खिलाफ चल रहे इस ऐतिहासिक आंदोलन का आज 47वां दिन है। सरकारी आदेश ने इस पूरे आंदोलन की दिशा और दशा को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। प्रशासनिक मशीनरी अब हरकत में आती दिख रही है। विधायक भाटी के कड़े रुख ने जयपुर तक हलचल पैदा कर दी है। सरकार अब डैमेज कंट्रोल मोड में नजर आ रही है ताकि विवाद अधिक न बढ़े।

संघर्ष की दास्तां: आत्मदाह की कोशिश और खून की चिट्ठी

इस आंदोलन के दौरान कई चौंकाने वाली घटनाएं घटी हैं। शुरुआती हफ्तों में जब प्रशासन ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो विधायक भाटी ने एक खौफनाक कदम उठाने का प्रयास किया था। हताशा में आकर युवा विधायक ने खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह करने की कोशिश की थी। इस घटना ने पूरे राजस्थान की कानून व्यवस्था और राजनीतिक गलियारों को हिलाकर रख दिया था।

"मजदूरों के हक के लिए अगर मुझे अपनी जान भी देनी पड़े, तो मैं पीछे नहीं हटूंगा। यह लड़ाई उनके स्वाभिमान की है।"

अमित शाह को खून से लिखा पत्र

आंदोलन के 46वें दिन एक और बड़ी घटना हुई। जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बीकानेर के दौरे पर थे, तब भाटी और प्रदर्शनकारियों ने अपने खून से उन्हें पत्र लिखा। इस पत्र में गिरल माइंस क्षेत्र के मजदूरों को मिल रहे 12 घंटे के अमानवीय कामकाजी शिफ्ट के खिलाफ शिकायत की गई। उन्होंने दमनकारी नीतियों के खिलाफ सीधे गृह मंत्री से न्याय मांगा।

मजदूरों का शोषण और दमनकारी नीतियां

गिरल माइंस में काम करने वाले मजदूरों की स्थिति काफी दयनीय बताई जा रही है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वहां 12 घंटे की शिफ्ट में काम लिया जा रहा है, जो अमानवीय है। ट्रक ऑपरेटरों को भी उनकी वाजिब मजदूरी और काम नहीं मिल रहा है। इन स्थानीय समस्याओं को लेकर विधायक भाटी ने रेगिस्तान की तपती धूप में डेरा डाल रखा है और पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। यह आंदोलन अब राजस्थान की राजनीति में युवा नेतृत्व की ताकत को फिर से साबित कर रहा है। सरकार द्वारा ट्यूबवेल की मंजूरी देना भाटी के बढ़ते प्रभाव का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार मजदूरों की अन्य मांगों को भी स्वीकार करती है। फिलहाल, शिव विधानसभा क्षेत्र में भाटी का पलड़ा भारी नजर आ रहा है।

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