राजस्थान

रावतभाटा महा-अभ्यास: शहर होगा ब्लैकआउट: चित्तौड़गढ़ के रावतभाटा में महा-अभ्यास: 5 मिनट का ब्लैकआउट और हर घंटे बजेंगे इमरजेंसी सायरन, जानें क्या है पूरा सुरक्षा प्लान

गणपत सिंह मांडोली · 22 अप्रैल 2026, 01:08 दोपहर
रावतभाटा में संभावित हवाई हमलों और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए एक बड़ा महा-अभ्यास आयोजित किया जा रहा है, जिसमें पूरे शहर को ब्लैकआउट किया जाएगा और सुरक्षा बलों की तैयारियों को परखा जाएगा।

रावतभाटा | राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले की परमाणु नगरी रावतभाटा में सुरक्षा के लिहाज से एक बहुत बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रशासन यहां एक विशाल 'महा-अभ्यास' आयोजित करने जा रहा है।

इस मेगा मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य किसी भी संभावित हवाई हमले या आपातकालीन स्थिति के दौरान शहर की तैयारी को पूरी तरह से परखना है। यह आयोजन प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा की तरह होगा।

नगर पालिका सभागार में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में इस अभ्यास की रूपरेखा तैयार की गई। इस बैठक में सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

प्रशासन की बड़ी तैयारी और समीक्षा



बैठक की अध्यक्षता इंसीडेंट कमांडर और अतिरिक्त जिला कलक्टर विनोद कुमार मल्होत्रा ने की। उन्होंने तैयारियों की बारीकी से समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए।

इस मॉक ड्रिल में प्रशासन, पुलिस, परमाणु बिजलीघर, सीआईएसएफ, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ सहित सभी प्रमुख विभाग एक साथ मिलकर काम करेंगे। यह समन्वय का एक बड़ा परीक्षण होगा।

प्रशासन का मानना है कि इस तरह के अभ्यास से भविष्य में आने वाली किसी भी आपदा के समय नुकसान को कम किया जा सकता है। यह अभ्यास पूरी तरह से वास्तविक स्थिति जैसा होगा।

अभ्यास का समय और ब्लैकआउट का प्लान



यह विशेष मॉक ड्रिल 23 अप्रैल को शाम 6 बजे से शुरू होकर रात 8 बजे तक चलेगी। इन दो घंटों के दौरान पूरा शहर एक अलग ही माहौल में रहेगा।

अभ्यास के दौरान हर एक घंटे के अंतराल पर शहर में इमरजेंसी सायरन बजाया जाएगा। यह सायरन नागरिकों को अलर्ट की स्थिति के बारे में जानकारी देने के लिए होगा।

सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रात ठीक 8 बजे होगा, जब पूरे शहर की बिजली काट दी जाएगी। यह 5 मिनट का पूर्ण ब्लैकआउट होगा, जो हवाई हमले की स्थिति का अनुकरण करेगा।

संचार और अलर्ट प्रणाली का परीक्षण



जैसे ही यह महा-अभ्यास शुरू होगा, बीएसएनएल द्वारा सभी उपभोक्ताओं को उनके मोबाइल पर इमरजेंसी मैसेज भेजे जाएंगे। यह संचार प्रणाली की मजबूती की जांच करेगा।

मैसेज के माध्यम से लोगों को सूचित किया जाएगा कि यह केवल एक अभ्यास है और उन्हें घबराने की आवश्यकता नहीं है। इससे अफवाहों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस दौरान शांत रहें और सुरक्षा बलों का सहयोग करें। यह उनकी अपनी सुरक्षा के लिए किया जा रहा एक महत्वपूर्ण कदम है।

संवेदनशील स्थानों का चयन



मॉक ड्रिल को वास्तविकता के करीब रखने के लिए प्रशासन ने तीन अति संवेदनशील स्थानों का चयन किया है। इनमें परमाणु बिजलीघर और भारी पानी संयंत्र शामिल हैं।

भारी पानी संयंत्र (Heavy Water Plant) में गैस रिसाव जैसी खतरनाक स्थिति से निपटने का अभ्यास किया जाएगा। यहां सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन किया जाएगा।

वहीं, एनटीसी गेट पर प्रवेश और सुरक्षा घेरे की मजबूती को जांचा जाएगा। सुरक्षा बल यह देखेंगे कि बाहरी घुसपैठ को कितनी जल्दी रोका जा सकता है।

राणा प्रताप सागर बांध पर रेस्क्यू ऑपरेशन



राणा प्रताप सागर बांध रावतभाटा की एक महत्वपूर्ण संरचना है। यहां रेस्क्यू ऑपरेशन और आपातकालीन प्रबंधन का शानदार प्रदर्शन किया जाएगा।

अभ्यास की सूचना मिलते ही कोटा से एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की विशेष टीमें रावतभाटा के लिए रवाना होंगी। उनकी गति और कौशल की परीक्षा होगी।

बांध क्षेत्र में पानी में फंसे लोगों को बचाने और बाढ़ जैसी स्थिति को नियंत्रित करने का लाइव डेमो भी किया जाएगा। यह दृश्य काफी रोमांचक और शिक्षाप्रद होगा।

ग्रीन कॉरिडोर और सुचारू आवाजाही



सुरक्षा बलों की गाड़ियों की निर्बाध आवाजाही के लिए शहर के प्रमुख मार्गों पर 'ग्रीन कॉरिडोर' बनाया जाएगा। पुलिस इस दौरान यातायात को नियंत्रित करेगी।

ग्रीन कॉरिडोर का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आपातकालीन वाहन बिना किसी देरी के घटना स्थल तक पहुंच सकें। यह समय प्रबंधन का एक अहम हिस्सा है।

नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का भी लाइव डेमो किया जाएगा। इसमें स्थानीय लोगों को बताया जाएगा कि आपातकाल में उन्हें किस दिशा में जाना चाहिए।

गृह मंत्रालय के निर्देश और भविष्य की योजना



यह अभ्यास केवल एक स्थानीय आयोजन नहीं है, बल्कि गृह मंत्रालय द्वारा 2026 के लिए निर्धारित हवाई हमला सुरक्षा योजना का एक हिस्सा है।

जिला कलक्टर को निर्देशित किया गया था कि वे हवाई हमले और ब्लैकआउट की स्थितियों के लिए शहर को तैयार करें। रावतभाटा अपनी संवेदनशीलता के कारण इस सूची में सबसे ऊपर है।

परमाणु नगरी होने के कारण यहां की सुरक्षा व्यवस्था को हमेशा उच्चतम स्तर पर रखना अनिवार्य है। यह ड्रिल उसी कड़ी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

परमाणु बिजलीघर की सुरक्षा का महत्व



रावतभाटा में स्थित राजस्थान परमाणु ऊर्जा केंद्र देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसकी सुरक्षा में कोई भी चूक भारी पड़ सकती है।

इसीलिए सीआईएसएफ (CISF) के जवान इस ड्रिल में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे बाहरी खतरों से संयंत्र की रक्षा करने की अपनी क्षमताओं को धार देंगे।

मॉक ड्रिल के दौरान संयंत्र के भीतर और बाहर के सुरक्षा घेरे का समन्वय देखा जाएगा। इससे सुरक्षा खामियों को पहचानने और उन्हें दूर करने में मदद मिलेगी।

जनभागीदारी और जागरूकता



प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस अभ्यास की सफलता काफी हद तक जनता के सहयोग पर निर्भर करती है। लोगों को सायरन और ब्लैकआउट के दौरान अनुशासन बनाए रखना होगा।

विभिन्न सामाजिक संगठनों और नगर पालिका के पार्षदों को भी इस ड्रिल के बारे में जागरूक किया गया है ताकि वे वार्ड स्तर पर लोगों को जानकारी दे सकें।

स्कूलों और कॉलेजों में भी इस अभ्यास के महत्व को बताया जा रहा है। युवाओं को आपातकालीन स्थितियों में प्राथमिक उपचार और बचाव के तरीके सिखाए जा रहे हैं।

आपदा प्रबंधन की नई तकनीकें



इस बार की ड्रिल में कई नई तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। ड्रोन के माध्यम से पूरे शहर की निगरानी की जाएगी और राहत कार्यों की समीक्षा होगी।

कंट्रोल रूम से पल-पल की जानकारी ली जाएगी और वायरलेस सेट के माध्यम से सूचनाओं का आदान-प्रदान होगा। यह तकनीकी रूप से एक उन्नत अभ्यास होगा।

अतिरिक्त जिला कलक्टर ने कहा कि इस अभ्यास के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसमें ड्रिल के दौरान पाई गई कमियों और सुधार के सुझावों को शामिल किया जाएगा।

निष्कर्ष और भविष्य की चुनौतियां



रावतभाटा का यह महा-अभ्यास न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए एक उदाहरण पेश करेगा। यह बताता है कि हम किसी भी अप्रिय घटना के लिए कितने तैयार हैं।

हवाई हमले और ब्लैकआउट जैसी स्थितियां डरावनी हो सकती हैं, लेकिन यदि तैयारी पुख्ता हो, तो नुकसान को न्यूनतम किया जा सकता है।

प्रशासन की यह पहल सराहनीय है और इससे रावतभाटा के निवासियों में सुरक्षा की भावना और अधिक मजबूत होगी। 23 अप्रैल की शाम शहर के इतिहास में दर्ज होगी।

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