जयपुर | राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को बड़ी सफलता मिली है। विभाग के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया गया है।
960 करोड़ का बड़ा घोटाला
यह पूरा मामला करीब 960 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार से जुड़ा है। सुबोध अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने पीएचईडी में पद पर रहते हुए नियमों की भारी अनदेखी की थी। उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए दो निजी फर्मों को अनुचित लाभ पहुंचाया। जांच में पाया गया कि इन फर्मों को गलत तरीके से टेंडर आवंटित किए गए थे।
दिल्ली से हुई गिरफ्तारी
सुबोध अग्रवाल लंबे समय से फरार चल रहे थे। एसीबी ने उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया था और उन्हें आधिकारिक रूप से भगोड़ा घोषित कर दिया गया था। अंततः एसीबी की विशेष टीम ने उन्हें दिल्ली से दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद शुक्रवार को उन्हें जयपुर की कोर्ट में पेश किया गया, जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे।
कोर्ट में साधी चुप्पी
पेशी के दौरान जब मीडिया ने उनसे सवाल पूछे, तो उन्होंने चुप्पी साधे रखी। उन्होंने बस इतना कहा कि मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है। उन्होंने आगे कहा कि लंबित याचिकाओं के बारे में उनके वकील ही जवाब देंगे। सुबोध अग्रवाल के चेहरे पर गिरफ्तारी का तनाव साफ देखा जा सकता था।
फर्जी प्रमाण-पत्रों का खेल
जांच में सामने आया कि 'मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल' और 'श्री श्याम ट्यूबवेल' ने इरकॉन इंटरनेशनल के फर्जी सर्टिफिकेट लगाए थे। इन दस्तावेजों के आधार पर टेंडर लिए गए। आरोप है कि सुबोध अग्रवाल के पास इन फर्मों के खिलाफ कई शिकायतें आईं, लेकिन उन्होंने उन्हें दरकिनार कर दिया। उनके कार्यकाल में इन कंपनियों को टेंडर मिलते रहे।
अन्य अधिकारियों की संलिप्तता
इस घोटाले में केवल अग्रवाल ही नहीं, बल्कि विभाग के अन्य अधिकारी भी शामिल हैं। एसीबी पहले ही एक्सईएन विशाल सक्सेना और मुकेश पाठक को गिरफ्तार कर चुकी है। मुकेश पाठक ने खुद को इरकॉन का फर्जी सीईओ बताकर जाली दस्तावेजों को अप्रूव किया था। असली इरकॉन अधिकारियों की शिकायत पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।
कानूनी राहत से इनकार
सुबोध अग्रवाल ने गिरफ्तारी से बचने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। हालांकि, जस्टिस अनिल उपमन की बेंच ने इस मामले की सुनवाई से साफ इनकार कर दिया था। एसीबी ने इस मामले की तह तक जाने के लिए अब तक 250 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की है। इस कार्रवाई से राजस्थान प्रशासनिक हलके में हड़कंप मचा हुआ है।