thinQ360
thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 📍 राज्य 📰 लाइफ स्टाइल 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 📰 जालोर 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 📰 मनचाही ▶️ YouTube
राजस्थान

रिटायर्ड जज: समाज की अनमोल धरोहर: रिटायर्ड जजों का अनुभव सुलझाएगा विवाद: जस्टिस सूर्यकांत

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

जस्टिस सूर्यकांत और सीएम भजनलाल ने बताया क्यों जरूरी हैं रिटायर्ड जज और मध्यस्थता केंद्र।

HIGHLIGHTS

  • जस्टिस सूर्यकांत ने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को समाज के लिए अनुभव की 'बावड़ी' और 'लाइब्रेरी' बताया।
  • मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आमजन से अदालती कार्यवाही से पहले मध्यस्थता केंद्रों का रुख करने की अपील की।
  • राजस्थान हाईकोर्ट के नए नवाचार 'यूनिफॉर्म रजिस्ट्रेशन नंबर सिस्टम' को आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया गया।
  • भारतीय न्याय संहिता के माध्यम से दंड के स्थान पर अब न्याय को प्राथमिकता दी जा रही है।
retired judges role in mediation justice surya kant cm bhajan lal

जयपुर | सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की भूमिका को समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित एक विशेष सम्मेलन को संबोधित किया। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि बुजुर्ग हमारे समाज में एक प्राचीन बावड़ी की तरह कार्य करते हैं। वे समय आने पर अपने अनुभवों के भंडार से किसी भी जटिल समस्या का सही समाधान दे सकते हैं।

सेवानिवृत्त न्यायाधीशों का अनुभव है समाज की अनमोल थाती

उन्होंने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की तुलना एक लाइब्रेरी से की जिससे नई पीढ़ी को सीखना चाहिए। जस्टिस सूर्यकांत के अनुसार एक न्यायाधीश हमेशा न्यायाधीश ही रहता है, चाहे वह पद पर हो या न हो। वर्तमान में सेवानिवृत्त न्यायाधीश लोक अदालतों में मध्यस्थता के जरिए सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। उनका अनुभव और कानूनी ज्ञान समाज में विवादों को प्रेमपूर्वक सुलझाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। जस्टिस सूर्यकांत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा मध्यस्थता की अपील की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता किसी भी विवाद का सबसे त्वरित और प्रभावी समाधान दिला सकती है। सम्मेलन का विषय 'द बेंच बियॉन्ड रिटायरमेंट' रखा गया था, जो सेवानिवृत्त जजों की सक्रियता पर केंद्रित था। इसमें राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RALSA) की भूमिका को भी रेखांकित किया गया।

न्यायपालिका: लोकतंत्र का रक्षक और जनता की अटूट उम्मीद

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कार्यक्रम में कहा कि समाज हमेशा न्यायाधीशों के शब्दों का अनुसरण करता है। न्यायाधीशों द्वारा दिए गए ऐतिहासिक फैसलों ने करोड़ों लोगों के जीवन में बड़े सुधार किए हैं। मुख्यमंत्री ने न्यायपालिका को लोकतंत्र का सबसे मजबूत स्तंभ और संविधान का रक्षक बताया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका हर नागरिक को समान अधिकार और न्याय की गारंटी देती है। न्यायाधीश केवल मुकदमे ही नहीं सुनते, बल्कि वे हर उस व्यक्ति की उम्मीद होते हैं जिसे न्याय चाहिए। चाहे मौलिक अधिकारों की रक्षा हो या भ्रष्टाचार पर प्रहार, न्यायपालिका हमेशा अग्रणी रही है। अनुभवी न्यायाधीशों की विद्वता और न्याय-दृष्टि आज भी देश की अमूल्य धरोहर मानी जाती है। मुख्यमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अनुभवी लोगों के ज्ञान का उपयोग राष्ट्र हित में करें। उन्होंने कहा कि जब विवाद प्रेम से सुलझते हैं, तो समाज में समरसता और भाईचारा बढ़ता है।

लोक अदालत और मध्यस्थता: विवादों का सरल और सुलभ समाधान

मुख्यमंत्री ने आमजन से अपील की कि कोर्ट में वाद दायर करने से पहले एक बार मध्यस्थता केंद्र जरूर जाएं। लोक अदालत और बातचीत से विवादों को न सिर्फ कम समय में, बल्कि बिना कड़वाहट के सुलझाया जा सकता है। इससे अदालतों पर मुकदमों का बोझ कम होगा और लोगों को अदालती चक्करों से मुक्ति मिलेगी। मध्यस्थता की प्रक्रिया सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। सरकार का प्रयास है कि विधिक जागरूकता बढ़ाकर हर व्यक्ति को उसके अधिकारों के प्रति सजग किया जाए। रिटायर्ड जज इस अभियान में अपनी विशेषज्ञता के साथ महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। राजस्थान में लोक अदालतों के माध्यम से हजारों लंबित मामलों का निस्तारण सफलतापूर्वक किया जा रहा है। यह प्रक्रिया गरीब और वंचित वर्ग के लिए न्याय को सुलभ बनाने का काम करती है।

डिजिटल इंडिया और भारतीय न्याय संहिता का नया दौर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन हर व्यक्ति को त्वरित और पारदर्शी न्याय दिलाना है। डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस के माध्यम से न्याय प्रणाली को अब पहले से अधिक प्रभावी बनाया गया है। भारतीय दंड संहिता के स्थान पर अब भारतीय न्याय संहिता को लागू किया गया है। नए कानूनों में दंड देने के बजाय न्याय देने को प्राथमिकता दी गई है, जो एक क्रांतिकारी बदलाव है। राज्य सरकार पुलिस और अभियोजन विभाग को इन नए कानूनों के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षण दे रही है। अदालतों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ न्यायालय भवनों का आधुनिकीकरण भी किया जा रहा है। न्याय प्रणाली में तकनीक के समावेश से पारदर्शिता बढ़ी है और आमजन का विश्वास सुदृढ़ हुआ है। न्याय को दरवाजे तक पहुंचाने के संकल्प के साथ सरकार लगातार नवाचारों को बढ़ावा दे रही है।

राजस्थान हाईकोर्ट के नए नवाचार और भविष्य की राह

राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने रालसा की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आमजन को जागरूक करने और सुलभ न्याय पहुंचाने में यह संस्था महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। कार्यक्रम के दौरान 'यूनिफॉर्म रजिस्ट्रेशन नंबर सिस्टम' नामक एक नए डिजिटल सिस्टम को लॉन्च किया गया। यह सिस्टम अदालती कामकाज को अधिक व्यवस्थित और सुगम बनाने में मददगार साबित होगा। साथ ही, पूर्व न्यायाधीशों द्वारा लिखे गए लेखों के संकलन वाली एक विशेष पुस्तक का विमोचन भी किया गया। विधिक सेवाओं को सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए मल्टी यूटिलिटी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी और कई वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में कानून के विद्यार्थियों ने भी इस सम्मेलन में भाग लेकर विशेषज्ञों के विचार सुने। यह आयोजन सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के अनुभव को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का एक सफल प्रयास रहा। न्याय प्रणाली में सुधार और जागरूकता के लिए ऐसे सम्मेलन भविष्य की दिशा तय करते हैं।

*Edit with Google AI Studio

शेयर करें: