राजस्थान

रेवदर: नंदगांव से द्वारका की ओर पधारे जगद्गुरु शंकराचार्य, विदाई के क्षणों में भावुक हुए गोभक्त

गणपत सिंह मांडोली · 27 सितम्बर 2026, 05:46 शाम

रेवदर। श्री सुरभि हरिहर चातुर्मास आराधना महोत्सव की पूर्णाहुति के बाद नंदगांव की पावन धरा से परम श्रद्धेय जगद्गुरु शंकराचार्य शारदा पीठाधीश्वर पूज्य श्री सदानंद सरस्वतीजी महाराज द्वारका के लिए पधारे। उनके प्रस्थान का क्षण संत-महात्माओं, गोभक्तों और गौसेवकों के लिए अत्यंत भावुक रहा। विदाई के दौरान कई गोभक्तों की आंखों से आंसू छलक पड़े और वातावरण भक्ति एवं करुणा के भाव से भर गया।

गोऋषि दत्तशरणानंदजी महाराज के सान्निध्य में आयोजित चातुर्मास आराधना महोत्सव के दौरान जगद्गुरु शंकराचार्यजी के पावन सान्निध्य में नंदगांव में धर्म, साधना, गौसेवा और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण का वातावरण बना रहा। महोत्सव की पूर्णाहुति के बाद जब शंकराचार्यजी द्वारका की ओर प्रस्थान करने लगे तो बड़ी संख्या में उपस्थित गोभक्त भावविभोर हो उठे।

विदाई के क्षणों में छलके आंसू

जगद्गुरु शंकराचार्यजी के प्रस्थान के समय उपस्थित संत-महात्माओं और गौसेवकों ने भावभीनी विदाई दी। कई गोभक्तों की आंखें नम हो गईं। श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद प्राप्त कर उनके मंगलमय द्वारका प्रवास की कामना की।

इस दौरान उपस्थित गोभक्तों के बीच यह भाव दिखाई दिया कि संतों का सान्निध्य केवल किसी धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज में गौसेवा, गोरक्षा, गोपालन और सनातन मूल्यों के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करता है।

गोसेवा को बताया सनातन संस्कृति की आत्मा

श्रीमद्भागवत कथा के दौरान जगद्गुरु शंकराचार्यजी ने गोसेवा को सनातन संस्कृति की आत्मा बताते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग से गौसेवा के महाभियान से जुड़ने का आह्वान किया था। उनके संदेशों का प्रभाव महोत्सव के दौरान उपस्थित गोभक्तों में देखने को मिला।

संत-महात्माओं सहित बड़ी संख्या में गोभक्त रहे मौजूद

जगद्गुरु शंकराचार्यजी के द्वारका प्रस्थान के अवसर पर गोऋषि दत्तशरणानंदजी महाराज, दिनेशगिरीजी महाराज, गोविंदवल्लभदासजी महाराज, चेतननाथजी महाराज, नंदरामदासजी महाराज, ऋषिचेतन्यजी महाराज एवं बलदेवदासजी महाराज सहित अनेक संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश बिंदल ने कृतज्ञता पत्र का वाचन किया, जबकि कार्यकारी अध्यक्ष रघुनाथसिंह राजपुरोहित ने निवेदन पत्र का वाचन किया। कार्यक्रम का संचालन सीईओ आलोक सिंहल ने किया।

इस अवसर पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष एस.एन. बंसल, महामंत्री अर्जुनसिंह अंकलेश्वर, कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश गर्ग, प्रतापजी राजपुरोहित, नरेन्द्र धानोल, देवाराम जागरवाल, धनराज चौधरी, ब्रह्मदत्त पुरोहित, भरत पुरोहित बसंत, राव मोहन सिंह चौहान, उदाराम वैष्णव, केवलाराम पुरोहित एवं रणछोड़ पुरोहित रेवदर सहित बड़ी संख्या में गोभक्त एवं गौसेवक मौजूद रहे।

गोमाता की जयकारों के बीच दो निर्माण कार्यों का लोकार्पण

इस अवसर पर भामाशाह करनाजी मोनाजी पुरोहित, धानोल की ओर से निर्मित लवगा मनोरमा गोदर्शन पथ तथा भामाशाह प्रतापजी उकराजजी राजपुरोहित, जेतपुरा द्वारा निर्मित मनोरमा मुख्य द्वार का पूज्य शंकराचार्यजी ने लोकार्पण किया। गोमाता की जयकारों के बीच हुए इस लोकार्पण अवसर पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

नंदगांव से जगद्गुरु शंकराचार्यजी का यह प्रस्थान भले ही द्वारका की ओर हुआ, लेकिन उनके सान्निध्य में मिले गौसेवा, साधना और सनातन संस्कृति के संदेश श्रद्धालुओं के मन में लंबे समय तक जीवंत रहेंगे। भावुक विदाई के बीच नंदगांव का वातावरण संत-वियोग और श्रद्धा के भाव से भर गया।

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