जयपुर | सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित रीको फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स ने उद्यमियों के बीच अपनी खास पहचान बना ली है।
इस 'प्लग एंड प्ले' परियोजना को उद्यमियों से लगातार शानदार और सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।
पिछले साल शुरू हुए इस प्रोजेक्ट में अब तक 14 मॉड्यूल्स आवंटित किए जा चुके हैं।
इसका मुख्य उद्देश्य उद्यमियों को बिना किसी देरी के उद्योग शुरू करने के लिए तैयार स्थान उपलब्ध कराना है।
सीतापुरा की यह फ्लैटेड फैक्ट्री अब महज एक इमारत नहीं रह गई है।
यह छोटे और मध्यम उद्यमियों के लिए कम निवेश में अपना उज्ज्वल भविष्य संवारने का एक सशक्त माध्यम बन चुकी है।
उद्यमियों का नया ठिकाना: रेडीमेड गारमेंट और आईटी सेक्टर
इस कॉम्प्लेक्स में रेडीमेड गारमेंट, जेम्स एंड ज्वेलरी और आईटी सेक्टर से जुड़े उद्यमियों ने अपनी इकाइयां लगाने की तैयारी कर ली है।
कुछ इकाइयों में उत्पादन कार्य भी शुरू हो चुका है।
उद्यमियों का मानना है कि सीतापुरा जैसे प्राइम लोकेशन पर कम लागत में आधुनिक सुविधाएं मिलना एक बड़ा अवसर है।
यह उन्हें व्यापार विस्तार और बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।
गारमेंट क्षेत्र के उद्यमी शुभ जैन ने बताया कि सीतापुरा पहले से ही गारमेंट इंडस्ट्री का केंद्र है।
यहां यूनिट स्थापित करना उनके व्यवसाय के लिए एक रणनीतिक और लाभकारी कदम साबित हुआ है।
वर्तमान में शुभ जैन की इकाई में 8 लोग काम कर रहे हैं।
उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में इस कॉम्प्लेक्स में गारमेंट क्षेत्र की और भी कई नई इकाइयां जुड़ेंगी।
लागत में कमी और मुनाफे में बढ़ोतरी
आईटी क्षेत्र से जुड़े "कोहेसिव टीम्स" के संचालक मयंक अग्रवाल ने अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने बताया कि किसी भी नए व्यवसाय की शुरुआत में फिक्स्ड एसेट्स पर बहुत भारी खर्च होता है।
मयंक ने कहा कि इस कॉम्प्लेक्स में व्यवसाय शुरू करने से उनकी प्रारंभिक लागत काफी कम हो गई है।
वह यहां एक आधुनिक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट यूनिट स्थापित कर रहे हैं।
रीको के इस मॉडल ने छोटे उद्यमियों के लिए लागत घटाकर मुनाफे को बढ़ाने का रास्ता खोल दिया है।
जहां पहले काम शुरू करने में सालों लगते थे, वहीं अब काम तुरंत शुरू हो रहा है।
रीको का यह प्रोजेक्ट लोकेशन और सुविधाओं के मामले में मेरे व्यवसाय के लिए उपयुक्त है। सुरक्षा और ऑफिस डिजाइनिंग पर निवेश नहीं करना पड़ा।
आधुनिक सुविधाएं और रीको का सराहनीय सहयोग
विजय सिंह सेंगर ने "शिल्पायान इंडिया" के नाम से गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाई है।
उन्होंने बताया कि ई-ऑक्शन से लेकर आवंटन तक की पूरी प्रक्रिया में रीको का सहयोग बहुत ही सराहनीय रहा।
रीको द्वारा सीतापुरा में 4,167 वर्गमीटर क्षेत्रफल पर इस भव्य कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया गया है।
यह राजस्थान की पहली ऐसी परियोजना है जहां लाइसेंस फीस के आधार पर आवंटन हुआ है।
कॉम्प्लेक्स में कुल 33 मॉड्यूल्स हैं, जिनमें से 30 मॉड्यूल्स गारमेंट, आईटी और जेम्स एंड ज्वेलरी के लिए आरक्षित हैं।
बाकी तीन मॉड्यूल्स सामान्य श्रेणी के उद्योगों के लिए रखे गए हैं।
यहां उद्यमियों के लिए प्रशासनिक कार्यालय, बैंक और प्रशिक्षण कक्ष जैसी सुविधाएं मौजूद हैं।
इसके अलावा सभा कक्ष, कैंटीन, मालवाहक और यात्री लिफ्ट की भी आधुनिक व्यवस्था की गई है।
सूक्ष्म उद्योगों के लिए यहां 1236 से 1566 वर्गफीट के स्पेस उपलब्ध हैं।
रीको द्वारा निर्धारित 35 करोड़ रुपये के टर्नओवर की सीमा छोटे उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए रखी गई है।
प्रशासनिक भवन में मीटिंग्स और सेमिनार के लिए पर्याप्त स्थान दिया गया है।
सुरक्षा के लिहाज से पूरे कॉम्प्लेक्स में सीसीटीवी और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है।
परिवहन की सुगमता के लिए मालवाहक लिफ्ट की क्षमता को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।
इससे उद्यमी बिना किसी इंफ्रास्ट्रक्चर की चिंता के काम शुरू कर सकते हैं।
औद्योगिक विकास की नई दिशा
रीको की इस पहल से राजस्थान में सूक्ष्म और लघु उद्योगों को एक नई ऊर्जा मिली है।
'प्लग एंड प्ले' की सुविधा ने उद्यमियों के समय और धन दोनों की बचत की है।
सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र की कनेक्टिविटी और यहां उपलब्ध कुशल श्रमिक सफलता में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
भविष्य में ऐसे और भी प्रोजेक्ट्स की मांग राजस्थान के अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ रही है।
उद्यमियों के फीडबैक से स्पष्ट है कि यह मॉडल सूक्ष्म उद्योगों के लिए सफल रहा है।
इससे न केवल स्थानीय रोजगार बढ़ेगा, बल्कि निर्यात के क्षेत्र में भी मजबूती आएगी।
निष्कर्षतः, रीको फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स ने जयपुर के औद्योगिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है।
यह नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाला एक बेहतरीन मंच साबित हो रहा है।
यह राज्य के आर्थिक विकास और 'मेक इन राजस्थान' के सपने को साकार कर रहा है।
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