सिरोही। उपखंड क्षेत्र में रोवाड़ा से मनादर को जोड़ने वाली मनादर घाटा सड़क और गोल पुलिया के पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो जाने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सड़क कई स्थानों पर धंस गई है, जबकि गोल पुलिया को भी नुकसान पहुंचा है। मामले को लेकर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता (एसई) का घेराव कर जवाब मांगा तथा निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
जानकारी के अनुसार तत्कालीन सरकार के दौरान पूर्व विधायक संयम लोढ़ा के प्रयासों से मनादर घाटा सड़क, गोल पुलिया सहित अन्य सड़क निर्माण कार्य स्वीकृत हुए थे। प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद इन कार्यों को हाल ही में पूरा किया गया। लेकिन पहली ही बारिश में सड़क कई जगहों से धंस गई तथा कुछ हिस्सों में बह भी गई। गोल पुलिया भी क्षतिग्रस्त होने से निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
लोढ़ा ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
शुक्रवार को पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने इस मामले को लेकर प्रदेश सरकार को घेरते हुए राज्यमंत्री ओटाराम देवासी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने विक्रम टैक्स का जिक्र करते हुए कहा कि निर्माण कार्य में अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार के कारण पहली ही बारिश में सड़क और पुलिया की यह स्थिति हुई है।
अधीक्षण अभियंता का घेराव, कार्रवाई का आश्वासन
लोढ़ा ने जिला मुख्यालय पहुंचकर सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता रमेश बडाला का घेराव किया और क्षतिग्रस्त सड़कों को लेकर जवाब मांगा। उन्होंने बताया कि माकरोड़ा से भाटकड़ा सड़क, जिसका निर्माण भी हाल ही में हुआ है, वह भी कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई है। अधीक्षण अभियंता ने निर्माण कार्य में हुई त्रुटियों को स्वीकार करते हुए संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने तथा क्षतिग्रस्त सड़कों की पांच दिन में मरम्मत कराने का आश्वासन दिया।
अतिरिक्त मुख्य सचिव से फोन पर की शिकायत
मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने सार्वजनिक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता से भी फोन पर बातचीत कर निर्माण कार्य में कथित भ्रष्टाचार और गुणवत्ता में कमी की शिकायत की। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने का भरोसा दिया।
गुणवत्ता पर उठे सवाल, जांच की मांग तेज
पहली ही बारिश में सड़क और पुलिया के क्षतिग्रस्त होने से क्षेत्रवासियों में भी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि नई सड़कें पहली बारिश भी नहीं झेल पा रही हैं तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।