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रॉयल गाँव पहुंचीं सर्व समाज की 500 बेटियां: रॉयल गाँव में सर्व समाज की 500 बेटियों का स्नेह मिलन, सामाजिक समरसता का दिया संदेश

thinQ360 · 24 अक्टूबर 2026, 09:47 रात
सीकर जिले के खण्डेला क्षेत्र स्थित रॉयल गाँव में आयोजित ‘बुआ, बहन, बेटी स्नेह मिलन समारोह’ में सभी जातियों और सामाजिक वर्गों की करीब 500 बेटियां शामिल हुईं। आयोजक मेघराज सिंह रॉयल ने इसे जातिवाद का जहर दूर करने की कोशिश बताते हुए शिक्षा, बेरोजगारी और विकास के मुद्दों पर एकजुट होने का आह्वान किया।

रॉयल गाँव (खण्डेला, सीकर)। सीकर जिले के खण्डेला क्षेत्र स्थित रॉयल गाँव में आयोजित ‘बुआ, बहन, बेटी स्नेह मिलन समारोह’ सामाजिक समरसता का उदाहरण बना। कार्यक्रम में सभी जातियों, समाजों और वर्गों की करीब 500 बेटियां, बहनें और बुआएं अपने पीहर पहुंचीं। गाँव की ओर से उनका पारम्परिक स्वागत और बहुमान किया गया तथा उनसे गाँव, परिवार और समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर संवाद किया गया।

आयोजन की विशेषता यह रही कि इसमें किसी एक जाति या परिवार के बजाय पूरे गाँव की बेटियों को आमंत्रित किया गया। विवाह के बाद अलग-अलग शहरों और गाँवों में रह रही बेटियां जब अपने पीहर लौटीं तो रॉयल गाँव का माहौल उत्सव जैसा दिखाई दिया। बचपन की सखियों, बहनों और परिवार की अलग-अलग पीढ़ियों को एक साथ मिलने का अवसर मिला।

सर्व समाज की बेटियों का हुआ बहुमान

समारोह में हर जाति, समाज और आर्थिक वर्ग से जुड़ी महिलाओं की भागीदारी रही। गाँव की बेटियों, बहनों, बुआओं और मातृशक्ति का स्वागत करते हुए उन्हें सम्मान दिया गया। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य बेटियों को अपने पीहर और गाँव से दोबारा जोड़ने के साथ सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर आपसी सहयोग तथा अपनत्व की भावना को मजबूत करना था।

कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने पुराने परिचितों और बचपन की सखियों से मुलाकात की। अलग-अलग पीढ़ियों की महिलाओं ने अपनी स्मृतियां साझा कीं और गाँव में हुए बदलावों पर भी बातचीत की। इस दौरान नई पीढ़ी को पारिवारिक रिश्तों, ग्रामीण संस्कृति और सामूहिक सहभागिता की परम्परा से परिचित होने का अवसर मिला।

जातिवाद का जहर दूर करने की कोशिश: मेघराज सिंह रॉयल

कार्यक्रम के आयोजक मेघराज सिंह रॉयल ने कहा कि यह आयोजन जातिवाद का जहर दूर करने और गाँव को सामाजिक समरसता के सूत्र में जोड़ने की एक कोशिश है। उन्होंने कहा कि गाँव की प्रत्येक बेटी सम्मान की अधिकारी है, चाहे वह किसी भी जाति, समाज या वर्ग से आती हो। इसी भावना के साथ सर्व समाज की बेटियों, बहनों और बुआओं को पीहर बुलाकर उनका बहुमान किया गया।

जातिवाद पर अपनी बात रखते हुए मेघराज सिंह रॉयल ने कहा, “जातिवाद समुद्र का पानी है, मर्जी है उतना मीठा डाल लेना, वह कभी पीने लायक नहीं होगा।” उन्होंने लोगों से जातिवाद की राजनीति से ऊपर उठकर शिक्षा, बेरोजगारी और विकास जैसे वास्तविक मुद्दों पर एकजुट होने की अपील की।

उन्होंने कहा कि समाज में स्थायी बदलाव केवल आर्थिक संसाधनों से नहीं आता। इसके लिए सेवा भावना, परिवार का सहयोग, पूरे गाँव का आशीर्वाद और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। कोई भी बड़ा सामाजिक कार्य तभी सफल हो सकता है, जब गाँव के प्रतिनिधि और आम लोग मिलकर उसकी जिम्मेदारी संभालें।

शिक्षा, बेरोजगारी और विकास पर हो चर्चा

मेघराज सिंह रॉयल ने कहा कि समाज की ऊर्जा को जातिगत विवादों के बजाय बच्चों की शिक्षा, युवाओं के रोजगार और गाँव के विकास पर लगाया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से सामाजिक सहयोग बढ़ाने और विकास से जुड़े मुद्दों पर सामूहिक रूप से काम करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक परिवार और गाँव को यह विचार करना होगा कि बच्चों को अच्छी शिक्षा, रोजगार के अवसर और आगे बढ़ने के लिए आवश्यक संसाधन कैसे उपलब्ध कराए जाएं। समाज जब जातिगत सीमाओं से ऊपर उठकर साझा समस्याओं पर बात करेगा, तभी व्यापक बदलाव संभव होगा।

तकनीक के दौर में आधुनिक शिक्षा और कौशल जरूरी: ब्रिगेडियर जितेन्द्र सिंह

समारोह में ब्रिगेडियर जितेन्द्र सिंह ने महिलाओं, बेटियों और मातृशक्ति की बड़ी भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि गाँव की बहन-बेटियों और माताओं की उपस्थिति तथा आशीर्वाद ने आयोजन को सार्थक बनाया है। उन्होंने इच्छा जताई कि ऐसे स्नेह मिलन और सामाजिक आयोजन बार-बार होने चाहिए, ताकि लोग मिलकर समाज के लिए निरंतर प्रयास कर सकें।

आरक्षण और रोजगार के विषय पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक और बदलती कार्यप्रणाली के कारण आने वाले समय में पारम्परिक सरकारी नौकरियों की संख्या और स्वरूप में बदलाव आ सकता है। ऐसी स्थिति में केवल आरक्षण या सरकारी नौकरी पर निर्भर रहने के बजाय बच्चों को आधुनिक शिक्षा, कौशल, तकनीकी दक्षता और आत्मनिर्भरता की दिशा में तैयार करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि समाज को भविष्य की चुनौतियों को समझते हुए नई पीढ़ी को ऐसा हुनर देना चाहिए, जिससे वह बदलते रोजगार बाजार में अपने लिए अवसर तैयार कर सके। बच्चों की शिक्षा और कौशल विकास को सामाजिक प्राथमिकता बनाना समय की आवश्यकता है।

केवल पैसे से नहीं, सहयोग से सफल होते हैं आयोजन

ब्रिगेडियर जितेन्द्र सिंह ने कहा कि कोई भी बड़ा आयोजन केवल पैसे के बल पर सफल नहीं होता, क्योंकि आर्थिक संसाधन अनेक लोगों के पास हो सकते हैं। किसी सामाजिक प्रयास को सफल बनाने के लिए सेवा भावना, परिवार का समर्पण, गाँव का सहयोग और स्थानीय प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी जरूरी होती है।

उन्होंने समारोह में सहयोग करने वाले परिवारों, ग्रामीणों और आयोजकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से समाज में संवाद बढ़ता है और लोगों को सामूहिक उद्देश्य के लिए साथ आने की प्रेरणा मिलती है।

नई पीढ़ी तक पहुंचा सामाजिक समरसता का संदेश

रॉयल गाँव में आयोजित स्नेह मिलन ने बेटियों के सम्मान के साथ सामाजिक समरसता, शिक्षा, कौशल और विकास का संदेश दिया। करीब 500 बेटियों, बहनों और बुआओं की उपस्थिति ने आयोजन को व्यापक सामाजिक स्वरूप प्रदान किया।

कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि गाँव की पहचान किसी एक जाति या वर्ग से नहीं, बल्कि वहां रहने और उससे जुड़े सभी परिवारों से बनती है। सामाजिक सहयोग, सेवा भावना और सामूहिक भागीदारी के जरिए ही गाँव और समाज को आगे बढ़ाया जा सकता है।

नोट: जातिवाद, आरक्षण, सरकारी नौकरियों और तकनीकी बदलाव को लेकर प्रकाशित विचार कार्यक्रम में वक्ताओं द्वारा व्यक्त किए गए हैं।

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