राजस्थान

कोटा एयरपोर्ट: RTU को बड़ी जिम्मेदारी: कोटा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए RTU निभाएगा बड़ी भूमिका, 800 करोड़ के प्रोजेक्ट की गुणवत्ता जांचने की मिली जिम्मेदारी

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 11 अप्रैल 2026, 10:39 दोपहर
राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (RTU), कोटा को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने 800 करोड़ रुपये की कोटा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना के लिए थर्ड पार्टी क्वालिटी एश्योरेंस की जिम्मेदारी सौंपी है। यह विश्वविद्यालय की तकनीकी विशेषज्ञता की बड़ी जीत है।

कोटा | राजस्थान के कोटा शहर के लिए एक बहुत ही गर्व की खबर सामने आई है। शहर में बनने वाले नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के निर्माण की गुणवत्ता अब राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (RTU) की निगरानी में होगी। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने इस 800 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी "कोटा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना" के लिए RTU को थर्ड पार्टी क्वालिटी एश्योरेंस (TPQA) की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। यह उपलब्धि न केवल विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है, बल्कि यह कोटा की तकनीकी विशेषज्ञता को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाने वाली साबित होगी।

RTU की तकनीकी विशेषज्ञता पर मुहर

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ ने बताया कि यह जिम्मेदारी RTU की तकनीकी दक्षता और अनुसंधान क्षमताओं की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति का प्रतीक है। कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी के निर्देशन में मिली इस सफलता ने RTU को तकनीकी परामर्श और गुणवत्ता मूल्यांकन के क्षेत्र में देश के अग्रणी संस्थानों की कतार में खड़ा कर दिया है। ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाएं देश की आधुनिक अवसंरचना का अहम हिस्सा हैं। इनमें सुरक्षा और गुणवत्ता के मानकों का पालन करना सबसे जरूरी होता है।

800 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट

कोटा में बनने वाला यह नया एयरपोर्ट लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। इस पूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 2 वर्ष का समय निर्धारित किया गया है। इस बड़े प्रोजेक्ट को सुचारू रूप से चलाने के लिए दो मुख्य भागों में बांटा गया है। पहला भाग 'एयरसाइड वर्क्स' है और दूसरा 'बिल्डिंग वर्क्स' के नाम से जाना जाएगा। एयरसाइड वर्क्स के तहत रनवे, टैक्सीवे और उससे जुड़े तकनीकी ढांचों का निर्माण होगा। वहीं, बिल्डिंग वर्क्स में शानदार टर्मिनल भवन और अन्य जरूरी संरचनाएं बनाई जाएंगी।

IIT और NIT को पीछे छोड़ RTU का चयन

इस प्रोजेक्ट के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों को आमंत्रित किया था। इसमें कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली थी। इनमें आईआईटी (IIT) और एनआईटी (NIT) जैसे बड़े नाम भी शामिल थे। लेकिन अपनी बेहतरीन कार्ययोजना और विशेषज्ञता के दम पर RTU कोटा ने यह बाजी मार ली। हाल ही में कार्यादेश का औपचारिक हस्तांतरण एएआई के जीएम (प्रोजेक्ट) सुनील प्रसाद द्वारा आरटीयू के कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी को किया गया।

कैसे काम करेगी RTU की टीम?

कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी ने कहा कि यह हमारे लिए गौरव का क्षण है। विश्वविद्यालय की विशेषज्ञ टीम पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ इस जिम्मेदारी को निभाएगी। RTU की दो विशेष टीमें इस प्रोजेक्ट पर तैनात की जाएंगी। ये टीमें निर्माण स्थल पर जाकर सामग्री की गुणवत्ता और डिजाइन मानकों की बारीकी से जांच करेंगी। टीम का मुख्य काम यह सुनिश्चित करना होगा कि एयरपोर्ट का हर कोना अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों और तकनीकी दिशानिर्देशों के अनुसार ही निर्मित हो।

निगरानी और मूल्यांकन की प्रक्रिया

विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ इंजीनियरों द्वारा निर्माण सामग्री, डिजाइन मानकों और कार्य निष्पादन की गुणवत्ता का नियमित निरीक्षण किया जाएगा। RTU की टीम समय-समय पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट एएआई को प्रस्तुत करेगी। इससे परियोजना में पारदर्शिता बनी रहेगी और कार्य समय पर पूरा हो सकेगा। इस प्रक्रिया से न केवल निर्माण मजबूत होगा, बल्कि भविष्य में यात्रियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी।

कोटा के विकास को मिलेगी नई रफ़्तार

इस एयरपोर्ट के बनने से कोटा और आसपास के इलाकों में पर्यटन और व्यापार के नए रास्ते खुलेंगे। यह प्रोजेक्ट क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को तेज करने वाला साबित होगा। कोटा के युवाओं और व्यापारियों को इस एयरपोर्ट से सीधा लाभ मिलेगा। इसके अलावा, विश्वविद्यालय के छात्रों और शोधकर्ताओं को भी इस प्रोजेक्ट से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। विद्यार्थियों को इस तरह की बड़ी राष्ट्रीय परियोजनाओं में व्यावहारिक अनुभव मिलेगा, जो उनके भविष्य के करियर के लिए एक मजबूत नींव तैयार करेगा। कुल मिलाकर, कोटा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट न केवल यातायात की सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि कोटा को तकनीकी और आर्थिक रूप से एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

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