कोटपूतली-बहरोड़ | राजस्थान की ऐतिहासिक जीवनरेखा रही साबी नदी को 49 साल बाद पुनर्जीवित करने की बड़ी तैयारी शुरू हो गई है। जल संरक्षण विभाग ने इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली है।
इस महत्वाकांक्षी योजना से क्षेत्र के गिरते भूजल स्तर में सुधार होगा। यह नदी कभी पूरे वर्ष बहती थी, लेकिन पिछले तीन दशकों से अतिक्रमण के कारण सूख गई है।
पुनर्जीवन के लिए मास्टर प्लान तैयार
योजना के तहत पारंपरिक नालों, जोहड़ों और वर्षाजल मार्गों को फिर से सक्रिय किया जाएगा। इन सभी को साबी नदी के मुख्य तंत्र से जोड़ा जाएगा ताकि वर्षाजल का संचयन हो सके।
इससे न केवल सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि पशुपालन और पेयजल की समस्या भी हल होगी। विभाग अब अंतिम रिपोर्ट के आधार पर धरातल पर कार्य शुरू करेगा।
इतिहास और ग्रामीणों की उम्मीदें
बुजुर्गों के अनुसार, 1977 की विनाशकारी बाढ़ के बाद नदी का स्वरूप बदलने लगा था। 1988 के बाद से इसका प्रवाह लगभग पूरी तरह समाप्त हो गया, जिससे खेती प्रभावित हुई।
"योजना सफल होने पर नदी से जुड़े क्षेत्रों में भूजल स्तर बढ़ेगा और किसानों को सिंचाई के बेहतर संसाधन मिल सकेंगे।"
इस पहल से पर्यावरण को लाभ होगा और कृषि पर निर्भर हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी। साबी नदी का यमुना तंत्र से जुड़ाव क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगा।
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