जयपुर | जयपुर के सांगानेर इलाके में टेक्सटाइल इकाइयों द्वारा फैलाए जा रहे जल प्रदूषण को लेकर सरकार अब एक्शन मोड में आ गई है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदूषण फैलाने वालों को सख्त चेतावनी दी गई है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण से खिलवाड़ करने वाली इकाइयों पर कानूनी डंडा चलेगा। जो इकाइयां ड्रेनेज सिस्टम का हिस्सा नहीं हैं और प्रदूषित पानी खुले में बहा रही हैं, उनके खिलाफ तुरंत दंडात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने द्रव्यवती नदी में केमिकल युक्त पानी छोड़ने वाली इकाइयों की पहचान के लिए JDA और प्रदूषण नियंत्रण मंडल को संयुक्त सर्वे शुरू करने को कहा है।
CETP की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
बैठक के दौरान कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) की सुस्त रफ्तार पर भी चिंता जताई गई। बताया गया कि 12.3 MLD क्षमता का यह प्लांट अपनी क्षमता से काफी कम यानी केवल 3.1 MLD पर चल रहा है। इसके कई महत्वपूर्ण कलपुर्जे जैसे मैकेनिकल बार स्क्रीन और स्लज थिकनर फिलहाल खराब हैं। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को आदेश दिए कि 30 अप्रैल तक CETP की सभी तकनीकी खामियों को दुरुस्त किया जाए। उन्होंने कहा कि प्लांट का सुचारू संचालन शहर की स्वच्छता और नदी के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डेडलाइन हुई तय
सांगानेर की कुल 892 टेक्सटाइल इकाइयों में से अब तक 758 को ही CETP से जोड़ा गया है। शेष 134 इकाइयों को पाइपलाइन और पम्पिंग स्टेशन से जोड़ने के लिए 31 मई तक की समय सीमा तय की गई है। मुख्य सचिव ने कहा कि इस तारीख के बाद कोई बहाना नहीं चलेगा। इस बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार, प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष देबाशीष पृष्टि और जेडीए आयुक्त सिद्धार्थ महाजन सहित कई आला अधिकारी मौजूद रहे। सरकार का लक्ष्य सांगानेर के टेक्सटाइल उद्योग को प्रदूषण मुक्त बनाकर द्रव्यवती नदी को पुनर्जीवित करना है।