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राजनीति

गहलोत सरकार का आखिरी बजट सत्र 23 से : राजस्थान विधानसभा में भाजपा के राजेन्द्र राठौड़ पर निर्दलीय विधायक संयम लोढा ने विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पेश किया

गणपत सिंह मांडोली

लोढ़ा ने विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव में भारत के संविधान के अनुच्छेद 190 (3) (ख) के प्रावधान का उल्लेख किया है जो कि त्याग पत्र से संबंधित है। इसी तरह प्रस्ताव में राजस्थान विधानसभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 173 (2) का भी प्रस्ताव में उल्लेख किया है जो कि सदस्यों के त्याग पत्र से संबंधित है। 

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HIGHLIGHTS

  • लोढ़ा ने विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव में भारत के संविधान के अनुच्छेद 190 (3) (ख) के प्रावधान का उल्लेख किया है जो कि त्याग पत्र से संबंधित है। इसी तरह प्रस्ताव में राजस्थान विधानसभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 173 (2) का भी प्रस्ताव में उल्लेख किया है जो कि सदस्यों के त्याग पत्र से संबंधित है। 
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जयपुर | अशोक गहलोत सरकार का आखिरी बजट सत्र सोमवार 23 जनवरी से प्रारंभ होगा। यह बड़ा हंगामेदार सत्र रहेगा, इसमें कतई दो राय नहीं है। राज्यपाल कलराज मिश्र के अभिभाषण से बजट सत्र की शुरूआत होगी।

यही नहीं नए सदस्य का शपथ ग्रहण और दिवंगत हो चुके लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। शोकाभिव्यक्ति में इस बार भूंगरा में हादसे में मारे गए लोगों को भी श्रद्धासुमन अर्पित किए जाएंगे। यह कार्यक्रम तो विधानसभा अध्यक्ष की ओर से जारी हुआ है, लेकिन संयम लोढ़ा की एंट्री ने नई बहस खड़ी कर दी है।

राजस्थान विधानसभा के 81 विधायकों के त्याग पत्र संबंधित प्रकरण में विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय से पूर्व प्री मैच्योर स्टेज पर भाजपा विधायक दल के उप नेता राजेन्द्र राठौड़ द्वारा राजस्थान उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका को लेकर निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने राजस्थान विधानसभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियम 157 के अंतर्गत राजस्थान विधानसभा के सचिव महावीर शर्मा के समक्ष विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव प्रस्तुत किया है।

लोढ़ा ने इसे 23 जनवरी से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र के दौरान 24 जनवरी को सदन में उठाने की अनुमति मांगी है।

लोढ़ा ने विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव में भारत के संविधान के अनुच्छेद 190 (3) (ख) के प्रावधान का उल्लेख किया है जो कि त्याग पत्र से संबंधित है। इसी तरह प्रस्ताव में राजस्थान विधानसभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 173 (2) का भी प्रस्ताव में उल्लेख किया है जो कि सदस्यों के त्याग पत्र से संबंधित है। 

लोढ़ा ने प्रस्ताव में कहा कि सदस्यों के त्याग पत्र का मामला विचाराधीन था और विधानसभा अध्यक्ष ने इस प्रकरण में अपना कोई निर्णय नहीं दिया था। उससे पूर्व ही 1 दिसम्बर 2022 को जनहित याचिका हाइकोर्ट में प्रस्तुत करने से न केवल विधानसभा अध्यक्ष की अवमानना की गई है।

बल्कि राजस्थान विधानसभा के विशेष अधिकारों का भी हनन किया गया है। लोढ़ा ने इस प्रस्ताव के जरिये 24 जनवरी को राजस्थान विधानसभा में विशेष अधिकार हनन का प्रस्ताव उठाने की अनुमति मांगी है।

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