राजस्थान

सरदार पटेल यूनिवर्सिटी दीक्षांत समारोह: पुलिस यूनिवर्सिटी दीक्षांत: राज्यपाल बोले- सेवा ही परम धर्म

ललित पथमेड़ा · 26 अप्रैल 2026, 08:29 रात
जोधपुर में पुलिस यूनिवर्सिटी का चौथा दीक्षांत समारोह संपन्न, राज्यपाल ने दी डिग्रियां।

जयपुर | राजस्थान के राज्यपाल और कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने जोधपुर स्थित सरदार पटेल पुलिस सुरक्षा एवं दाण्डिक न्याय विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक यात्रा का अंत नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थी जीवन के एक अत्यंत महत्वपूर्ण और नवीन आरंभ का अवसर है।

शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य और समर्पण

राज्यपाल श्री बागडे ने जोर देकर कहा कि अर्जित ज्ञान को समाज और राष्ट्र के व्यापक हित में समर्पित करना ही दीक्षांत का मूल और वास्तविक उद्देश्य है। उन्होंने समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को हार्दिक बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए अपनी मंगलकामनाएं और आशीर्वाद व्यक्त किया। प्राचीन गुरुकुलों की महान परंपरा ‘समावर्तन संस्कार’ का भावपूर्ण उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा का असली लक्ष्य सत्य, धर्म और विनम्रता के साथ आगे बढ़ना है। राज्यपाल ने युवाओं का आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान को समाज की भलाई के लिए इस्तेमाल करें और नागरिकों की सुरक्षा के प्रति हमेशा समर्पित रहें। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने, अपराधों की प्रभावी रोकथाम करने और न्याय की रक्षा करने के लिए युवाओं को सजग प्रहरी के रूप में कार्य करना होगा।

“जन सेवा ही परम धर्म की पवित्र भावना के साथ कार्य करते हुए और जनता को अपना मित्र मानकर ही पुलिस विभाग अपनी सकारात्मक छवि स्थापित कर सकता है।”

आधुनिक पुलिसिंग और भविष्य की चुनौतियां

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत में पुलिसिंग का कार्य आज के दौर में अत्यंत चुनौतीपूर्ण और जटिल होता जा रहा है। वर्तमान समय में साइबर अपराध, अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद, नशीले पदार्थों का अवैध प्रसार और सामाजिक असंतुलन जैसी कई गंभीर चुनौतियां हमारे सामने खड़ी हैं। इन आधुनिक चुनौतियों का सामना करने के लिए पुलिस बल को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निरंतर दक्ष और अपडेट रहने की सख्त आवश्यकता है। उन्होंने डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल फोरेंसिक एवं साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने पर विशेष बल दिया ताकि अपराधियों से दो कदम आगे रहा जा सके। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि तकनीक के बढ़ते उपयोग के बीच हमें मानवीय मूल्यों और संवेदनाओं को कभी भी पीछे नहीं छोड़ना चाहिए।

सरदार पटेल के आदर्श और राष्ट्र निर्माण

राज्यपाल ने लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के अविस्मरणीय योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि देश की एकता और अखंडता हम सभी के लिए सर्वोपरि होनी चाहिए। सभी विद्यार्थियों को सरदार पटेल के महान आदर्शों से प्रेरणा लेनी चाहिए और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने शिक्षा के समग्र स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा केवल रोजगार पाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह चरित्र निर्माण का मुख्य आधार है। नैतिकता के ठोस धरातल पर ही जीवन को श्रेष्ठ, सार्थक और समाज के लिए उपयोगी बनाया जा सकता है, इसलिए युवाओं को अपने नैतिक विकास पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से लक्ष्य निर्धारित कर पूरी एकाग्रता और समर्पण के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया ताकि वे देश के विकास में अपना योगदान दे सकें।

न्याय और सेवा से सशक्त होगा भारत

राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि न्याय धर्म की असली जड़ है और निःस्वार्थ सेवा ही राष्ट्र का प्राण है। उन्होंने दीक्षांत समारोह को एक ‘संकल्प दिवस’ के रूप में परिभाषित किया और विद्यार्थियों से राष्ट्र सेवा एवं मानवीय मूल्यों को आत्मसात करने का आग्रह किया। देवनानी ने कहा कि यह विश्वविद्यालय पुलिसिंग, आंतरिक सुरक्षा और दाण्डिक न्याय के क्षेत्र में देश भर में एक उत्कृष्ट और शोध आधारित कार्य कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि यहाँ से शिक्षित होकर निकलने वाले युवा देश की आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने में अपनी महत्वपूर्ण और प्रभावी भूमिका निभाएंगे।

सकारात्मक छवि और विश्वविद्यालय की भूमिका

राज्यपाल ने कहा कि पुलिस विभाग की छवि को जनता की नजरों में बेहतर और विश्वसनीय बनाने की पूरी जिम्मेदारी अब देश की युवा पीढ़ी पर टिकी हुई है। केवल अपराधों पर नियंत्रण पाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग का अटूट विश्वास और सहयोग अर्जित करना भी पुलिस के लिए उतना ही आवश्यक है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा पुलिसिंग और फोरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में किए जा रहे शिक्षण एवं अनुसंधान कार्यों की सराहना की और भारतीय पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने को कहा। समारोह के समापन पर राज्यपाल ने मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक और डिग्रियां प्रदान कीं, जिससे विद्यार्थियों के चेहरे खुशी और गर्व से खिल उठे। यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धि का प्रमाण था, बल्कि एक सुरक्षित और न्यायपूर्ण समाज बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम भी साबित हुआ।

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