बीकानेर | भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी), बीकानेर ने रविवार को अपना 43वाँ स्थापना दिवस बड़े उत्साह और गरिमा के साथ मनाया। इस अवसर पर एक राष्ट्रीय किसान संगोष्ठी और कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में किसानों और विशेषज्ञों ने भाग लिया।
ऊँट संरक्षण से विकसित भारत: ऊँट संरक्षण से विकसित भारत का संकल्प होगा पूरा: सतीश पूनिया
बीकानेर में राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र के 43वें स्थापना दिवस पर सांसद सतीश पूनिया ने ऊँट संरक्षण और उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
HIGHLIGHTS
- राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, बीकानेर ने अपना 43वाँ स्थापना दिवस मनाया।
- कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद डॉ. सतीश पूनिया थे।
- ऊँटनी के दूध से निर्मित मूल्य संवर्धित उत्पाद 'राजभोग आइसक्रीम' को लॉन्च किया गया।
- डॉ. पूनिया ने ऊँट संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।
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ऊँट संरक्षण पर राष्ट्रीय संगोष्ठी
यह कार्यक्रम "उष्ट्र संरक्षण एवं उद्यमिता विकास : विकसित भारत–2047 की दिशा में" विषय पर केंद्रित था।
इसमें लगभग 400 किसानों, पशुपालकों, वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों, विद्यार्थियों और आईसीएआर के विभिन्न संस्थानों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यसभा के नवनिर्वाचित सांसद डॉ. सतीश पूनिया थे, जिनका बीकानेर में आगमन हुआ।
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संस्कृति और अर्थव्यवस्था का आधार है ऊँट: पूनिया
मुख्य अतिथि डॉ. सतीश पूनिया ने अपने संबोधन में कहा कि वे ऊँट की विलक्षणताओं को निकट से समझने की जिज्ञासा लेकर केंद्र में आए हैं।
उन्होंने कहा कि ऊँट केवल मरुस्थल का जहाज़ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर जीवन का एक सशक्त आधार है।
डॉ. पूनिया ने कहा कि कोरोना महामारी जैसे कठिन समय में भारतीय कृषि ने देश की अर्थव्यवस्था को सहारा दिया था।
उन्होंने ऊँट को विपरीत परिस्थितियों में धैर्य, सहनशीलता और जीवटता का अद्वितीय प्रतीक बताया।
घटती संख्या पर चिंता और संरक्षण का आह्वान
सांसद ने ऊँटों की तेजी से घटती संख्या पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस पशु की बहुआयामी उपयोगिता के कारण यह आज भी प्रासंगिक है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर हमें अपनी मरुस्थलीय संस्कृति, खेजड़ी और पारंपरिक धरोहर को सुरक्षित रखना है, तो ऊँट संरक्षण को एक जन-आंदोलन बनाना होगा।
'राजभोग आइसक्रीम' का लॉन्च
इस अवसर पर डॉ. पूनिया ने ऊँटनी के दूध से बने एक नए मूल्य संवर्धित उत्पाद 'राजभोग आइसक्रीम' को लॉन्च किया।
उन्होंने इस उत्पाद की सराहना करते हुए कहा कि ऊँटनी के दूध में पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने इस क्षेत्र में और अधिक व्यापक अनुसंधान की आवश्यकता पर बल दिया और 'एक ऊँट मेरे नाम' के संकल्प के लिए सभी को प्रोत्साहित किया।
विशेषज्ञों ने रखे अपने विचार
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि, राजुवास, बीकानेर के कुलगुरू डॉ. सुमन्त व्यास ने कहा कि ऊँट संरक्षण तभी सफल होगा जब ऊँट पालकों की आजीविका को मजबूत किया जाएगा।
उन्होंने ऊँट आधारित उद्यमिता और पारंपरिक साधनों के लिए ऋण सुविधा की आवश्यकता पर बल दिया।
केन्द्र के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने कहा कि ऊँट संरक्षण का सबसे सशक्त माध्यम ऊँट पालकों का सशक्तीकरण है।
उन्होंने ऊँटनी के दूध को "रेगिस्तान की डेयरी" बताते हुए 'आई लव कैमल मिल्क' अभियान को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
स्थापना दिवस पर विविध कार्यक्रम
मुख्य अतिथि ने केंद्र परिसर में एनआरसीसी स्थापना स्मृति स्तम्भ का अनावरण किया और वृक्षारोपण भी किया।
उन्होंने उष्ट्र संग्रहालय का भ्रमण किया और ऊँटनी के दूध, बाल और चमड़े से बने उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
समारोह की शुरुआत किसान-वैज्ञानिक संवाद से हुई और अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत किसानों को कृषि आदानों का वितरण किया गया।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्र गीत के साथ हुआ, जिसमें आयोजन सचिव डॉ. राकेश रंजन ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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