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सावलाजी मंदिर भूमि विवाद: हजारों का प्रदर्शन: सावलाजी मंदिर भूमि विवाद: सिरोही में हजारों का शक्ति प्रदर्शन

गणपत सिंह मांडोली · 13 जुलाई 2026, 08:31 रात
सिरोही में सावलाजी मंदिर भूमि विवाद पर राजपूत समाज सहित हजारों लोगों ने शक्ति प्रदर्शन कर कलेक्ट्रेट का घेराव किया और निष्पक्ष जांच व अतिक्रमण हटाने की मांग की।

सावलाजी मंदिर भूमि विवाद पर हजारों का शक्ति प्रदर्शन

सिरोही | शिवगंज तहसील के छीबा गांव में स्थित सावलाजी मंदिर की भूमि पर चल रहे विवाद को लेकर सोमवार को जिला मुख्यालय पर हजारों लोगों ने एकजुट होकर शक्ति प्रदर्शन किया। राजपूत समाज के साथ-साथ विभिन्न अन्य समाजों के लोगों ने इस प्रदर्शन में भाग लिया और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।

कलेक्ट्रेट का घेराव और ज्ञापन

प्रदर्शनकारियों ने राम झरोखा मैदान से एक विशाल जुलूस का आयोजन किया, जो नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट तक पहुंचा। वहां पहुंचकर उन्होंने कलेक्ट्रेट का घेराव किया और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन अतिरिक्त कलेक्टर को सौंपा।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

ज्ञापन के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने कई प्रमुख मांगें प्रशासन के सामने रखीं। उनकी सबसे बड़ी मांग मंदिर की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना है।

निष्पक्ष जांच की अपील

इसके अलावा, उन्होंने इस मामले में ग्रामीणों पर दर्ज किए गए मुकदमों की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस इस मामले में एकतरफा कार्रवाई कर रही है, जिस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।

प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल

सुबह करीब 9:30 बजे से ही लोग राम झरोखा मैदान में इकट्ठा होने लगे थे। वहां आयोजित सभा में विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए।

विवाद बढ़ने का कारण

ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि यदि तहसील प्रशासन ने समय पर प्रभावी कार्रवाई की होती, तो यह विवाद इतना गंभीर रूप नहीं लेता। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासन ने अतिक्रमणकारियों को हटाने के बजाय उन्हें कई दिनों का समय दे दिया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।

पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप

लोगों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि पुलिस ने कथित अतिक्रमणकारियों की शिकायत पर ग्रामीणों और मंदिर समिति के सदस्यों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एकतरफा मुकदमे दर्ज कर दिए हैं।

क्या है भूमि का ऐतिहासिक महत्व?

मंदिर समिति ने अपने दावे में कहा है कि संबंधित भूमि राजस्व रिकॉर्ड में सावलाजी मंदिर के नाम पर दर्ज है। यह भूमि 'माफी की डोली' भूमि है, जिसे शिवगंज के देवड़ा जागीरदारों ने मंदिर के संचालन और रखरखाव के लिए दान किया था।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

समिति के अनुसार, वर्षों से इस भूमि पर ग्रामीणों के माध्यम से खेती करवाई जाती थी। इससे होने वाली आय का उपयोग मंदिर के रखरखाव और अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए किया जाता था। आरोप है कि पहले जो लोग अनुमति लेकर खेती करते थे, उन्होंने बाद में इस पर स्थायी कब्जा करने का प्रयास शुरू कर दिया। जब समिति ने उन्हें आगे खेती करने की अनुमति नहीं दी तो विवाद बढ़ गया।

देवस्थान विभाग के निर्देशों की अनदेखी

ज्ञापन में इस बात का भी उल्लेख है कि 19 मार्च 2026 को मंदिर का पंजीकरण देवस्थान विभाग में हो गया था। इसके बाद विभाग ने उपखंड अधिकारी, विकास अधिकारी और तहसीलदार को निर्देश दिए थे कि मंदिर की खातेदारी भूमि ट्रस्ट को सौंपी जाए और उसे कब्जाधारियों से मुक्त कराया जाए, लेकिन इन निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन नहीं किया गया।

अन्य मांगें

प्रदर्शनकारियों ने अपनी अन्य मांगों में अनुसूचित जाति के अजराम भूल से मारपीट के आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और कथित अतिक्रमित भूमि पर दिए गए बिजली कनेक्शनों को तुरंत काटने की भी मांग की है।

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