राजस्थान

सवाईमाधोपुर: एक ही चिता पर तीन अर्थियां।: सवाईमाधोपुर: जयपुर रिंग रोड हादसे में उजड़ा हंसराज का परिवार, एक ही चिता पर जलीं माता-पिता और बेटे की अर्थियां, बिलख उठा पूरा गांव

thinQ360 · 05 अप्रैल 2026, 07:12 शाम
सवाईमाधोपुर के बरनावदा गांव का एक हंसता-खेलता परिवार जयपुर रिंग रोड पर हुए हादसे में उजड़ गया। माता-पिता और 9 वर्षीय बेटे की मौत के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है।

सवाईमाधोपुर | राजस्थान के सवाईमाधोपुर जिले के बरनावदा गांव में आज हर आंख नम है और हर दिल भारी है। यहां की गलियों में केवल सिसकियों की आवाज सुनाई दे रही है।

एक ही घर से जब तीन अर्थियां एक साथ निकलीं, तो पत्थर दिल इंसान की आंखें भी छलक उठीं। यह मंजर इतना हृदयविदारक था कि पूरे गांव ने चूल्हा तक नहीं जलाया।

मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालने वाले हंसराज बैरवा का हंसता-खेलता परिवार एक पल में खत्म हो गया। नियति ने ऐसा क्रूर मजाक किया कि अब घर में केवल सन्नाटा शेष है।

भीषण सड़क हादसे ने छीनी खुशियां

यह दर्दनाक हादसा जयपुर के रिंग रोड पर सीतारामपुरा सर्विस रोड के पास हुआ। हंसराज अपनी पत्नी और छोटे बेटे के साथ मजदूरी के सिलसिले में बाहर निकले थे।

तभी एक तेज रफ्तार पिकअप काल बनकर आई और उनके वाहन को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दुपहिया वाहन के परखच्चे उड़ गए और चीख-पुकार मच गई।

हादसे में नौ वर्षीय मासूम सुनील की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं हंसराज और उनकी पत्नी श्यामा गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें राहगीरों की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया।

अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सिर में गंभीर चोटें होने के कारण दोनों ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। एक साथ तीन मौतों की खबर गांव पहुंची।

एक ही चिता पर जलीं तीन अर्थियां

जैसे ही तीनों के शव देर रात गांव पहुंचे, वहां कोहराम मच गया। बूढ़े माता-पिता अपने जवान बेटे और बहू के शवों को देखकर बेसुध हो गए। बड़ा भाई सदमे में बैठा रहा।

ग्रामीणों ने नम आंखों से तीनों की अंतिम विदाई की तैयारी की। श्मशान घाट पर एक ही बड़ी चिता सजाई गई, जिस पर माता-पिता और उनके मासूम बेटे के शव रखे गए।

जब चिता को मुखाग्नि दी गई, तो वहां मौजूद सैकड़ों ग्रामीण फफक-फफक कर रो पड़े। बरनावदा गांव के इतिहास में ऐसा दुखद और काला दिन पहले कभी किसी ने नहीं देखा था।

किस्मत ने मासूम निशा को बचाया

इस पूरे हादसे में अगर कोई सुरक्षित बचा है, तो वह है हंसराज की 11 साल की बेटी निशा। निशा की जान उसकी किस्मत ने बचा ली, क्योंकि वह उस समय वहां मौजूद नहीं थी।

निशा इन दिनों गर्मियों की छुट्टियां बिताने के लिए अपने ननिहाल रेड़ावत गांव गई हुई थी। उसे क्या पता था कि घर से निकलते वक्त वह आखिरी बार अपने माता-पिता और भाई को देख रही है।

अब निशा के सिर से माता-पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है। गांव वाले और रिश्तेदार इस मासूम के भविष्य और उसकी मानसिक स्थिति को लेकर बेहद चिंतित और दुखी नजर आ रहे हैं।

मजदूरी से चलता था परिवार का गुजारा

हंसराज बैरवा एक बेहद मेहनती इंसान थे। वह दिन-भर कड़ी मजदूरी करते थे ताकि अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और जिंदगी दे सकें। उनकी पत्नी भी घर चलाने में सहयोग करती थी।

परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन वे अपनी छोटी सी दुनिया में खुश थे। इस हादसे ने न केवल तीन जिंदगियां लीं, बल्कि एक पूरे वंश का आधार ही खत्म कर दिया।

गांव वालों में भारी आक्रोश और शोक

हादसे के बाद से ग्रामीणों में तेज रफ्तार वाहनों को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि रिंग रोड पर आए दिन लापरवाही के कारण ऐसे भीषण हादसे होते रहते हैं।

प्रशासन से मांग की जा रही है कि सर्विस रोड पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। साथ ही पीड़ित परिवार के बचे हुए सदस्यों को उचित सरकारी मुआवजा देने की भी गुहार लगाई गई है।

बूढ़े मां-बाप का अब कोई सहारा नहीं बचा है। उनके पास अब केवल कड़वी यादें और एक छोटी सी पोती रह गई है, जिसकी परवरिश की जिम्मेदारी अब समाज और उनके कंधों पर है।

यह हृदयविदारक घटना हमें याद दिलाती है कि सड़क पर एक छोटी सी लापरवाही किसी का पूरा संसार उजाड़ सकती है। बरनावदा गांव अब बस न्याय और मासूम निशा के लिए मदद की उम्मीद कर रहा है।

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