नई दिल्ली | गर्मियों के मौसम में बच्चों की सेहत का खास ख्याल रखना बेहद जरूरी है। आजकल स्कारलेट फीवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसे अक्सर माता-पिता मामूली वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यह बीमारी बच्चों के लिए काफी कष्टदायक हो सकती है। यह एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है जो मुख्य रूप से ग्रुप ए स्ट्रेप्टोकोकस बैक्टीरिया के कारण फैलता है। अगर आपके बच्चे को तेज बुखार के साथ शरीर पर अचानक लाल दाने या चकत्ते दिखने लगें, तो इसे हल्के में न लें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
क्या है स्कारलेट फीवर और इसके कारण?
स्कारलेट फीवर मुख्य रूप से उन बच्चों को प्रभावित करता है जिनके गले में पहले से इंफेक्शन या खराश होती है। यह वही बैक्टीरिया है जो स्ट्रेप थ्रोट का कारण बनता है। यह बैक्टीरिया शरीर के भीतर प्रवेश कर एक खास प्रकार का जहरीला टॉक्सिन छोड़ने का काम करता है। इसी टॉक्सिन की वजह से बच्चे की पूरी त्वचा पर लाल रंग के खुरदरे चकत्ते पड़ने लगते हैं। यह संक्रमण बहुत संक्रामक होता है और पीड़ित बच्चे के छींकने, खांसने या सीधे संपर्क में आने से दूसरे स्वस्थ बच्चों में भी बहुत तेजी से फैल सकता है।
इन लक्षणों को समय रहते पहचानना है जरूरी
इस बीमारी का सबसे प्रमुख और स्पष्ट लक्षण शरीर पर निकलने वाले चमकीले लाल दाने हैं। इसके अलावा बच्चे को अचानक 101 डिग्री फारेनहाइट से ज्यादा तेज बुखार आ सकता है। गले के अंदरूनी हिस्से में सूजन और तेज दर्द की शिकायत भी रहती है। गले के अंदर टॉन्सिल्स पर सफेद धब्बे और जीभ का रंग गहरा लाल व दानेदार होना इसके विशेष संकेत हैं। इसे 'स्ट्रॉबेरी टंग' भी कहा जाता है। इसके अलावा बच्चे के होंठों के आसपास का हिस्सा पीला पड़ने लगता है और उसे निगलने में कठिनाई होती है।
डॉ. विकास पाटिल (एमबीबीएस, डीसीएच) कहते हैं, "स्कारलेट फीवर का सही समय पर इलाज होना बहुत जरूरी है। अगर इसका उपचार समय पर नहीं किया गया, तो यह संक्रमण हृदय और गुर्दे जैसे शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।"
बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां
संक्रमण से बचाव के लिए बच्चों को नियमित रूप से साबुन और साफ पानी से हाथ धोने की अच्छी आदत डालें। यह किसी भी तरह के बैक्टीरिया को फैलने से रोकने का सबसे सरल और सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। साफ-सफाई का ध्यान रखना प्राथमिक सुरक्षा है। अगर घर का कोई सदस्य या बच्चा बीमार है, तो उसके इस्तेमाल किए गए बर्तन, तौलिया और कपड़े बिल्कुल अलग रखें। खांसते या छींकते समय हमेशा मुंह पर रुमाल या टिश्यू रखने की सलाह दें ताकि बैक्टीरिया हवा के जरिए दूसरों तक न पहुंच सके और अन्य लोग सुरक्षित रहें। यदि आपके बच्चे के स्कूल या आसपास के क्षेत्र में किसी अन्य बच्चे को यह इंफेक्शन होने की जानकारी मिलती है, तो एहतियात के तौर पर अपने बच्चे को कुछ दिनों तक उससे दूर रखें। भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना भी एक बेहतर विकल्प हो सकता है। स्कारलेट फीवर भले ही डरावना लगे, लेकिन सही जानकारी और समय पर चिकित्सीय परामर्श से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। बच्चों के खान-पान और उनकी व्यक्तिगत स्वच्छता पर ध्यान देकर आप उन्हें इस संक्रमण की चपेट में आने से सुरक्षित रख सकते हैं।
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