टोंक |
टोंक के देवली-उनियारा उपचुनाव के दौरान उपखंड अधिकारी (एसडीएम) को थप्पड़ मारने के चर्चित मामले में निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीणा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
इस मामले में कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी होने के लगभग 10 दिन बाद, अब नगरफोर्ट थाना पुलिस ने नरेश मीणा की चल-अचल संपत्ति का रिकॉर्ड तलब किया है।
पुलिस ने मांगा संपत्ति का ब्योरा
नगरफोर्ट थाना पुलिस ने नरेश मीणा की संपत्ति का रिकॉर्ड मांगा है, जिसे एससी, एसटी मामलों की विशेष अदालत, टोंक में पेश किया जाएगा।
इस नए घटनाक्रम के बाद यह माना जा रहा है कि एसडीएम को थप्पड़ मारने के आरोपी नरेश मीणा की फिर से गिरफ्तारी हो सकती है, जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ सकती हैं।
सरपंच को भेजा गया पत्र
नगरफोर्ट थानाधिकारी राजेंद्र ताड़ा की ओर से इस संबंध में एक पत्र ग्राम पंचायत नयागांव उर्फ नानवता के सरपंच (प्रशासक) को भेजा गया है।
पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि टोंक कोर्ट द्वारा अभियुक्त नरेश पुत्र कल्याण सिंह मीणा, निवासी नयागांव उर्फ नानवता, थाना मोठपुर, जिला बांरा का चल-अचल सम्पत्ति का रिकॉर्ड मांगा गया है।
पुलिस ने सरपंच से अनुरोध किया है कि नरेश मीणा की चल-अचल सम्पत्ति का रिकॉर्ड जल्द से जल्द उपलब्ध कराया जाए, ताकि इसे समय पर कोर्ट के समक्ष पेश किया जा सके।
10 दिन पहले जारी हुआ था गिरफ्तारी वारंट
गौरतलब है कि समरावता थप्पड़ कांड के आरोपी और पूर्व निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा की जमानत अर्जी 13 जुलाई को एससी, एसटी मामलों की विशेष अदालत, टोंक ने निरस्त कर दी थी।
अदालत ने जमानत अर्जी खारिज करते हुए उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया था।
जमानत की शर्तों का उल्लंघन
नरेश मीणा को इस प्रकरण में 13 जुलाई 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिली थी।
आरोप है कि उन्होंने जमानत के दौरान दी गई शर्तों का उल्लंघन किया। इसी को आधार बनाते हुए नगरफोर्ट थाना पुलिस ने कोर्ट में जमानत निरस्त करने का आवेदन दिया था।
पुलिस ने विशेष लोक अभियोजक रामावतार सोनी के माध्यम से एससी, एसटी कोर्ट में यह आवेदन प्रस्तुत किया था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पुलिस द्वारा प्रस्तुत तथ्यों को गंभीरता से लिया और मीणा की जमानत रद्द कर दी।
सहयोगी ने लगाया सरकार पर बड़ा आरोप
इस पूरी कार्रवाई पर नरेश मीणा के सहयोगी राकेश बैंसला ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नरेश मीणा की बढ़ती लोकप्रियता से घबरा गई है।
'लोकप्रियता से घबराई सरकार'
राकेश बैंसला ने कहा, "सरकार पंचायत चुनाव से पहले उन्हें जेल में रखकर किसानों और छात्रों की आवाज को दबाना चाहती है।"
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले एक स्पेशल लोक अभियोजक नियुक्त करवाकर जमानत रद्द कराई गई और अब उनकी संपत्ति का रिकॉर्ड मंगवाया जा रहा है, जो कि एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।
'न्यायपालिका पर पूरा भरोसा'
हालांकि, बैंसला ने यह भी कहा कि वे न्यायपालिका के आदेश का पूरा सम्मान करते हैं।
उन्होंने कहा, "हमें पूरा भरोसा है कि अदालत नरेश मीणा को न्याय देगी और सच्चाई की जीत होगी।"
क्या है समरावता थप्पड़ कांड?
यह पूरा मामला 13 नवंबर 2024 को देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान शुरू हुआ था।
वोटिंग के दिन समरावता गांव में नरेश मीणा ने कथित तौर पर उपखंड अधिकारी (एसडीएम) अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया था, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया था।
इस घटना के बाद, उनके समर्थकों ने कथित तौर पर पुलिस पर पथराव किया, कई वाहनों में आग लगा दी और नरेश मीणा को पुलिस हिरासत से छुड़ा लिया था।
अगले दिन, 14 नवंबर को, भारी पुलिस बल ने नरेश मीणा को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इस मामले में कुल 59 लोगों को नामजद किया था। बाद में, नरेश मीणा को समरावता मामले में राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी और वह टोंक जेल से रिहा हुए थे।
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