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शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 1456 अंक गिरा: 4 दिन में डूबे 3500 अंक

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 12 मई 2026, 05:08 शाम
सेंसेक्स 1,456 अंक गिरकर 74,559 पर बंद, निवेशकों में डर का माहौल।

मुंबई | भारतीय शेयर बाजार में आज जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही इंडेक्स बुरी तरह धराशायी हो गए। इस भारी गिरावट ने निवेशकों की रातों की नींद उड़ा दी है।

सेंसेक्स आज 1,456 अंक गिरकर 74,559 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी में भी 436 अंकों की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। यह लगातार चौथा दिन है जब बाजार लाल निशान में बंद हुआ है।

पिछले चार कारोबारी दिनों की बात करें तो सेंसेक्स करीब 3,500 अंक टूट चुका है। वहीं निफ्टी में भी लगभग 1,000 अंकों की गिरावट आई है। बाजार की इस चाल ने निवेशकों को सकते में डाल दिया है।

आज के कारोबार में रियल्टी और आईटी सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई। टीसीएस, इंफोसिस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक के शेयर 4.5% तक गिर गए। इन दिग्गजों के गिरने से इंडेक्स पर दबाव बढ़ा।

ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज और एफएमसीजी सेक्टर में भी 2.5% तक की गिरावट रही। फार्मा और पीएसयू बैंक भी बिकवाली के दबाव से नहीं बच पाए। बाजार के हर कोने में आज सिर्फ लाल रंग ही नजर आया।

शेयर बाजार में गिरावट के 8 प्रमुख कारण

पहला बड़ा कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड 0.93% बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा है।

दूसरा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। डोनाल्ड ट्रंप के बयानों के बाद वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। निवेशक अब जोखिम लेने के बजाय सुरक्षित ठिकानों की ओर रुख कर रहे हैं।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने आग में घी का काम किया है। सोमवार को ही इन्होंने ₹8,437.56 करोड़ के शेयर बेचे। यह बिकवाली भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

भारतीय रुपया भी आज डॉलर के मुकाबले 95.5 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गया। रुपये की कमजोरी से विदेशी निवेशकों का भरोसा डगमगाया है। उन्हें अपनी इन्वेस्टमेंट वैल्यू घटने का डर सता रहा है।

बाजार में डर को मापने वाला 'इंडिया विक्स' 2% बढ़कर 18.87 पर पहुंच गया। इसका बढ़ना साफ संकेत देता है कि आने वाले दिनों में बाजार में भारी उतार-चढ़ाव बना रहेगा।

आईटी सेक्टर और ग्लोबल मार्केट का दबाव

निफ्टी आईटी इंडेक्स आज 3% से ज्यादा टूट गया। बाजार की गिरावट के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार यही स्टॉक्स रहे। चूंकि इनका इंडेक्स में भारी वजन है, इसलिए इनकी गिरावट ने पूरे मार्केट को डुबो दिया।

वैश्विक स्तर पर भी हालात ठीक नहीं हैं। एशियाई बाजारों में, खासकर कोरिया के कोस्पी और चीन के शंघाई इंडेक्स में भारी गिरावट रही। अमेरिकी बाजारों के भी कमजोर खुलने के संकेत मिल रहे हैं।

"बाजार की मौजूदा स्थिति वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता का प्रतिबिंब है। निवेशकों को जल्दबाजी में कोई भी बड़ा फैसला लेने से बचना चाहिए और सही समय का इंतजार करना चाहिए।"

आज शाम आने वाले अप्रैल रिटेल इन्फ्लेशन डेटा से पहले भी निवेशकों में घबराहट है। सबको डर है कि तेल की बढ़ती कीमतों का असर सीधे तौर पर महंगाई के आंकड़ों पर दिखाई देगा।

बाजार की इस अस्थिरता ने छोटे निवेशकों के पोर्टफोलियो को भारी नुकसान पहुंचाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक विदेशी निवेश वापस नहीं आता, तब तक बाजार में स्थिरता आना मुश्किल लग रहा है।

बाजार की इस गिरावट ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वैश्विक खबरें घरेलू मार्केट पर कितना गहरा असर डालती हैं। निवेशकों को अब अगले कुछ दिनों तक बहुत सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

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