रेवदर | श्रीगोधाम महातीर्थ नंदगांव में इन दिनों आध्यात्मिक रस की धारा बह रही है। गोऋषि दत्त शरणानंद महाराज के सान्निध्य में चल रहे सुरभि हरिहर चातुर्मास के तहत श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ रहा है।
इस भव्य आयोजन में पूज्य द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानन्द सरस्वती जी महाराज अपने श्रीमुख से कथा का वाचन कर रहे हैं। श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और आध्यात्मिक ज्ञान का रसपान कर रहे हैं।
श्रीमद्भागवत का आध्यात्मिक महत्व
कथा के दौरान जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती ने श्रीमद्भागवत महापुराण के आध्यात्मिक और व्यावहारिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने समय के अनुसार कथा श्रवण के लाभों पर जोर दिया।
प्रातःकालीन कथा श्रवण के लाभ
व्यासपीठ से प्रवचन करते हुए शंकराचार्य ने बताया कि सूर्योदय और प्रातःकाल का समय सत्त्वगुण प्रधान होता है। इस पवित्र समय में श्रीमद्भागवत का श्रवण करने से विशेष लाभ मिलते हैं।
- बुद्धि और विवेक निर्मल होते हैं।
- अज्ञानता का अंधकार मिटता है।
- मन में सात्विक संस्कारों का बीजारोपण होता है।
- दिनभर के सांसारिक दायित्वों को धर्म और ईमानदारी से निभाने की सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
संध्याकालीन कथा का महत्व
इसी प्रकार, शंकराचार्य ने संध्याकालीन कथा के महत्व को भी समझाया। उन्होंने कहा कि दिनभर की भागदौड़, चिंता और तनाव के बाद भगवान की कथा का श्रवण मन को अद्भुत शांति प्रदान करता है।
उन्होंने बताया कि संध्या में कथा सुनने से चित्त की चंचलता कम होती है और मन भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में सहजता से एकाग्र हो जाता है।
"भागवत श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरूप है"
जगद्गुरु ने श्रद्धालुओं को सचेत करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत को केवल एक सामान्य पौराणिक ग्रंथ समझने की भूल नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा, "यह साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरूप है।" शंकराचार्य ने समझाया कि भागवत का श्रवण और चिंतन जीव के आध्यात्मिक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है और उसे मोक्ष की ओर ले जाता है।
कथा के समापन पर एक भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। इस अवसर पर नंदगांव (केसुआ) सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में यजमान और श्रद्धालु उपस्थित हुए और महाआरती में भाग लेकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।