राजस्थान

रेवदर: रामराज्य का रास्ता धर्म, संस्कार और राष्ट्रधर्म से होकर जाता है: शंकराचार्य सदानन्द सरस्वती

गणपत सिंह मांडोली · 02 सितम्बर 2026, 05:39 शाम
रेवदर में आयोजित चातुर्मास महोत्सव में शंकराचार्य सदानन्द सरस्वती ने रामराज्य की व्याख्या की। उन्होंने धर्म, संस्कार और राष्ट्रधर्म को इसका आधार बताया और युवाओं को भारतीय संस्कृति का ज्ञान देने पर जोर दिया।

रेवदर। अर्बुदारण्य की पावन धरा पर श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा की ओर से गो ऋषि दत्त शरणानंद जी महाराज के सानिध्य में नंदगांव में आयोजित ‘श्री सुरभि हरिहर चातुर्मास आराधना महोत्सव’ में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती जी महाराज ने धर्म, शिक्षा, संस्कार, राष्ट्रधर्म और भारतीय संस्कृति पर महत्वपूर्ण संदेश दिया। जगद्गुरु ने रामराज्याभिषेक के प्रसंग की व्याख्या करते हुए आज देशभर आए गो भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि रामराज्य केवल राजसत्ता नहीं, बल्कि धर्म, सदाचार, कर्तव्य और लोककल्याण पर आधारित व्यवस्था है।

महाराज श्री ने कहा कि जिस राष्ट्र के नागरिकों में धर्म और कर्तव्य का बोध होता है, वहां संस्कार, संयम और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना मजबूत होती है। उन्होंने बच्चों और युवाओं को गीता, रामायण, महाभारत, उपनिषद सहित भारतीय संस्कृति का ज्ञान देने पर जोर दिया। कहा कि धर्मशिक्षा व्यक्ति को सत्य, सेवा, त्याग, संयम और राष्ट्रभक्ति का मार्ग दिखाती है।

मंदिर और शिक्षालय बनें संस्कार के केंद्र

शंकराचार्य ने मंदिरों को भारतीय संस्कृति और संस्कारों के प्रमुख केंद्र बताते हुए उनके धार्मिक स्वरूप के संरक्षण की आवश्यकता जताई। उन्होंने सनातन समाज से ऐसे शिक्षालय स्थापित करने का आह्वान किया, जहां आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कारों का भी शिक्षण हो। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल रोजगार नहीं, बल्कि चरित्र और राष्ट्र निर्माण के केंद्र बनने चाहिए।

नशामुक्त युवा शक्ति से बनेगा मजबूत भारत

महाराज श्री ने नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाना है तो युवा शक्ति को नशामुक्त करना होगा। राजनीति में भी धर्मनीति, सत्य, न्याय और राष्ट्रहित का समन्वय जरूरी है। उन्होंने कहा कि राजनीति का उद्देश्य सत्ता नहीं, लोककल्याण होना चाहिए। गौसेवा और गौसंरक्षण को भारतीय संस्कृति की विशिष्ट पहचान बताते हुए इसे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बताया।

चातुर्मास सेवा समिति की समीक्षा बैठक भी हुई

इसी क्रम में परम श्रद्धेय गो ऋषि स्वामी श्री दत्तशरणानंद जी महाराज की पावन सन्निधि में चातुर्मास सेवा समिति की समीक्षा बैठक अभिनव व्रत मंडल नंदगांव के समन्वय सभा कक्ष में आयोजित हुई। बैठक में जगद्गुरु शंकराचार्यजी के सानिध्य में चल रहे चातुर्मास की व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई तथा आगामी दिनों में होने वाले कार्यक्रमों की तैयारियों पर विस्तार से मंथन हुआ।

बैठक में महंत दिनेशगिरी महाराज, योगी चेतननाथ महाराज, संत गोविंदवल्लभदास महाराज, ऋषिचैतन्य महाराज, नंदरामदास महाराज, बलदेवदास महाराज, गोपालदास महाराज, रघुनाथसिंह राजपुरोहित, धनराज चौधरी, बद्रीदान चारण, केसाराम पुरोहित, आलोक सिंहल, रणछोड़ पुरोहित, डूंगराराम पुरोहित, भरतसिंह बसंत, सांवलसिंह वागावास, ब्रह्मदत्त नानरवाड़ा, भूराराम पुरोहित, कैलाश कुमार राजपुरोहित, प्रागाराम पुरोहित, कैलाश माली, मोहन भाई जाधव, अमृत भाई डीसा, नानजीभाई रतनगढ़ सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

प्रवचन और समीक्षा बैठक के माध्यम से महोत्सव में धर्म, संस्कार, सेवा और राष्ट्रहित के व्यापक संदेश के साथ आगामी आयोजनों को सफल बनाने के लिए कार्यकर्ताओं को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

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