राजस्थान

रेवदर: नाव को मंजिल मत समझिए, मंजिल है परमात्मप्राप्ति: शंकराचार्य

गणपत सिंह मांडोली · 23 अगस्त 2026, 06:25 शाम
रेवदर में शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने प्रवचन में कहा कि नाव को मंजिल नहीं समझना चाहिए, असली मंजिल परमात्मप्राप्ति है। उन्होंने जगत, साधन और साध्य का रहस्य समझाया।

रेवदर |अर्बुदारण्य की पावन धरा पर स्थित श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा की ओर से नंदगांव में आयोजित 'श्री सुरभि हरिहर चातुर्मास आराधना महोत्सव' में आध्यात्मिक ज्ञान की गंगा बह रही है। इस महोत्सव में हजारों की संख्या में गोभक्त शामिल हो रहे हैं।

शंकराचार्य ने समझाया माण्डूक्योपनिषद् का रहस्य

इसी क्रम में, जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज ने माण्डूक्योपनिषद् प्रवचनमाला में अपनी बात रखी। उन्होंने श्रीगौड़पादाचार्य द्वारा रचित माण्डूक्यकारिका के तृतीय प्रकरण की 25वीं कारिका का विस्तार से विवेचन किया।

प्रवचन के दौरान महाराजश्री ने कर्म, ज्ञान, अद्वैततत्त्व और साधन-साध्य के विवेक को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया।

कर्म और ज्ञान का संबंध

उन्होंने ईशावास्योपनिषद् के मंत्र “अविद्यया मृत्युं तीर्त्वा विद्ययाऽमृतमश्नुते” का उल्लेख किया। इसके माध्यम से उन्होंने कर्म और ज्ञान के क्रमिक संबंध को स्पष्ट किया।

शंकराचार्य ने बताया कि शास्त्र कर्म और ज्ञान को एक साथ करने का निर्देश नहीं देता है, बल्कि दोनों का अपना-अपना क्रम और महत्व होता है।

परमात्मप्राप्ति ही परम लक्ष्य

भगवद्गीता के “यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम” वचन का उल्लेख करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि परमात्मप्राप्ति ही मानव जीवन का परम लक्ष्य है।

अध्यारोप-अपवाद पद्धति को समझाते हुए उन्होंने बताया कि श्रुति पहले जगत के विभिन्न तत्त्वों का वर्णन करती है। फिर उनके पारमार्थिक स्वतंत्र अस्तित्व का निषेध करते हुए साधक को एकमात्र परमात्मतत्त्व की ओर ले जाती है।

नाव के उदाहरण से समझाया साधन-साध्य का अंतर

महाराजश्री ने एक सुंदर उदाहरण देते हुए कहा कि नदी पार करने के लिए नाव एक साधन है और दूसरा किनारा साध्य है।

उन्होंने समझाया, “यदि व्यक्ति नाव को ही मंजिल समझ ले, तो वह कभी दूसरे तट तक नहीं पहुंच पाएगा।”

इसी प्रकार, यह जगत् आत्मज्ञान की यात्रा का एक साधन मात्र है, यह अंतिम साध्य नहीं है। जगत् को ही अंतिम सत्य मान लेने पर आत्मज्ञान रूपी परम पुरुषार्थ की प्राप्ति नहीं हो सकती।

हजारों गोभक्त रहे मौजूद

इस आध्यात्मिक अवसर पर ऋषिचैतन्यजी महाराज, चेतननाथजी महाराज, मोहन बाबा, श्री भक्तमाल कथा मनोरथी भूरजी अदरींगजी राजपुरोहित सांथू, विशनसिंह सांथू, दिनेश कुमार सांथू, प्रकाश कुमार सांथू, रघुनाथसिंह राजपुरोहित, देवाराम जागरवाल, रामचन्द्र नेहरा, बलवंतराज अणखोल, सीईओ आलोक सिंहल, भरतसिंह बसंत, मंगलसिंह बागरा, कैलाश सांथू, बिहारीलाल बसंत, हरिभगवान बंग, चम्पालाल मोदी, सांवलाराम वागावास सहित हजारों गोभक्त उपस्थित रहे।

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