शिवगंज, सिरोही | नगरपालिका अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर शिवगंज की राजनीति में नया और अप्रत्याशित मोड़ आ गया है। पार्षद का चुनाव हारने के बावजूद राजेश सोनी ने नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। उनके नामांकन की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि कांग्रेस पार्षद दलपत परमार उनके प्रस्तावक बने।
इस नामांकन के बाद शिवगंज नगरपालिका अध्यक्ष पद का चुनाव महज संख्या बल का मुकाबला नहीं रह गया है। अब संभावित क्रॉस वोटिंग, पार्षदों की बाड़ेबंदी और आखिरी समय में बनने वाले राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
कांग्रेस पार्षद बने राजेश सोनी के प्रस्तावक
राजेश सोनी के नामांकन के दौरान कांग्रेस पार्षद दलपत परमार प्रस्तावक के रूप में उनके साथ उपस्थित रहे। इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है।
कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की रणनीति को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। राजनीतिक हलकों में इसे अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले किसी बड़े सियासी दांव के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि कांग्रेस अथवा संयम लोढ़ा की ओर से रणनीति को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
भाजपा के पास 18 पार्षदों का बहुमत
नगरपालिका में संख्या बल के लिहाज से भाजपा मजबूत स्थिति में है। भाजपा के पास कुल 18 पार्षद हैं, जबकि कांग्रेस के 14 पार्षद निर्वाचित हुए हैं।
यदि कांग्रेस को दो निर्दलीय पार्षदों का समर्थन मिल जाता है, तो कांग्रेस समर्थित खेमे का आंकड़ा 16 तक पहुंच सकता है। इसके बावजूद सामान्य परिस्थितियों में भाजपा संख्या बल के आधार पर आगे दिखाई देती है।
भाजपा के तीन पार्षद बाड़ेबंदी से बाहर
अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले भाजपा की चिंता उस समय बढ़ गई, जब उसके 18 पार्षदों में से तीन पार्षद कथित रूप से बाड़ेबंदी से बाहर आ गए। इस घटनाक्रम के बाद अध्यक्ष चुनाव में क्रॉस वोटिंग की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
यदि भाजपा के तीन पार्षद पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ मतदान करते हैं और उनका मत कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में जाता है, तो चुनावी गणित पूरी तरह बदल सकता है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस समर्थित खेमे का आंकड़ा 16 से बढ़कर 19 तक पहुंच सकता है, जबकि भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में प्रभावी संख्या घटकर 15 रह सकती है। हालांकि यह गणना संभावित क्रॉस वोटिंग की अटकलों पर आधारित है। वास्तविक स्थिति मतदान के बाद ही स्पष्ट होगी।
संयम लोढ़ा के ‘बड़े खेल’ की चर्चा
कांग्रेस पार्षद का राजेश सोनी के प्रस्तावक के रूप में सामने आना और भाजपा के तीन पार्षदों का बाड़ेबंदी से बाहर होना—इन दोनों घटनाक्रमों को जोड़कर स्थानीय राजनीति में संयम लोढ़ा की रणनीति की चर्चा की जा रही है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यदि कांग्रेस अपने 14 पार्षदों के साथ दोनों निर्दलीयों का समर्थन हासिल कर लेती है और भाजपा खेमे में सेंध लगाने में सफल रहती है, तो बहुमत के बावजूद भाजपा के सामने अपना बोर्ड बनाने की चुनौती खड़ी हो सकती है।
भाजपा के सामने पार्षदों को एकजुट रखने की चुनौती
भाजपा के पास स्पष्ट संख्या बल होने के बावजूद अब सबसे बड़ी चुनौती अपने सभी पार्षदों को एकजुट रखने की है। अध्यक्ष पद के मतदान तक यदि भाजपा के सभी 18 पार्षद पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में बने रहते हैं तो उसकी स्थिति मजबूत रहेगी। लेकिन क्रॉस वोटिंग होने की स्थिति में चुनाव का परिणाम अप्रत्याशित हो सकता है।
नगरपालिका अध्यक्ष का चुनाव अब केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला नहीं दिखाई दे रहा। राजेश सोनी के नामांकन, निर्दलीय पार्षदों की भूमिका और भाजपा खेमे की संभावित नाराजगी ने इसे रणनीति एवं राजनीतिक प्रबंधन की लड़ाई में बदल दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल—किसका बनेगा बोर्ड?
शिवगंज की राजनीति में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बहुमत होने के बावजूद क्या भाजपा अपना बोर्ड बनाने में सफल हो पाएगी या नामांकन से शुरू हुआ यह सियासी घटनाक्रम कांग्रेस समर्थित खेमे के पक्ष में नया समीकरण तैयार कर देगा?
अध्यक्ष पद के चुनाव की अंतिम तस्वीर मतदान, पार्षदों के वास्तविक रुख और संभावित क्रॉस वोटिंग के बाद ही साफ होगी। फिलहाल शिवगंज नगरपालिका में संख्या बल से अधिक चर्चा राजनीतिक रणनीति और आखिरी समय में बदलने वाले समीकरणों की है।