राजनीति

शिवगंज: निजी कंपनी को 3800 बीघा जमीन देने के विरोध में ग्रामीणों का हुंकार

गणपत सिंह मांडोली · 01 सितम्बर 2026, 03:59 दोपहर
शिवगंज के कैलाशनगर में ग्रामीणों ने 3800 बीघा जमीन एक निजी सोलर कंपनी को देने के खिलाफ विशाल धरना-प्रदर्शन किया। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

शिवगंज | शिवगंज। मनादर-1 एवं मनादर-2 क्षेत्र की करीब 3800 बीघा राजकीय एवं राजस्व भूमि एक निजी सोलर कंपनी को आवंटित किए जाने की कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को कैलाशनगर में ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एकजुट होकर धरना-प्रदर्शन किया। धरने में पूर्व विधायक संयम लोढ़ा भी शामिल हुए और उन्होंने राज्य सरकार पर ग्रामीणों के हितों की अनदेखी कर निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाते हुए जमकर निशाना साधा। धरने के बाद ग्रामीणों ने उप-तहसीलदार कैलाशनगर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर भूमि आवंटन प्रक्रिया तत्काल निरस्त करने की मांग की।

धरना स्थल पर ग्रामीणों को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने कहा कि एक पंजीकृत निजी कंपनी के हित में राज्य की भाजपा सरकार ग्रामीणों के अधिकारों और हितों से कुठाराघात करने पर आमादा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनादर क्षेत्र की 3800 बीघा से अधिक की बहुमूल्य सरकारी एवं राजस्व भूमि निजी कंपनी को सौंपने की कार्रवाई की जा रही है। लोढ़ा ने कहा कि 400 मेगावाट की सोलर परियोजना के लिए 23 मार्च 2026 को आवेदन किए जाने के बाद जिस तेजी से विभागीय स्तर पर अनुशंसाएं की गईं, उससे सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े होते हैं।

‘ग्रामीणों की नहीं, उद्योगपतियों की चिंता कर रही सरकार’

लोढ़ा ने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में भूमि का निजी कंपनी के पक्ष में आवंटन केवल जमीन के हस्तांतरण का मामला नहीं है, बल्कि इससे क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों की पारंपरिक आजीविका और भविष्य की जरूरतें प्रभावित होंगी। उन्होंने कहा कि मनादर क्षेत्र के विभिन्न खसरा नंबरों में स्थित इस भूमि का ग्रामीण वर्षों से सामुदायिक, पारंपरिक एवं पशुपालन संबंधी आवश्यकताओं के लिए उपयोग करते आ रहे हैं। ऐसे में भूमि निजी हाथों में चले जाने से ग्रामीणों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर ग्रामीणों के अधिकारों को समाप्त नहीं किया जा सकता। ग्रामीण अपने क्षेत्र के वर्तमान के साथ-साथ भावी विकास और संसाधनों पर अपने अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने सरकार से मांग की कि किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले स्थानीय ग्रामीणों के हितों और उनकी आपत्तियों को गंभीरता से सुना जाए।

आवंटन निरस्त नहीं हुआ तो जिला स्तर पर आंदोलन की चेतावनी

पूर्व विधायक ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि ग्रामीणों की भावनाओं और हितों की अनदेखी कर भूमि आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने यदि इस प्रस्ताव को तत्काल निरस्त नहीं किया तो जिला स्तर पर बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा और ग्रामीणों के हक की लड़ाई सड़क से लेकर प्रशासनिक स्तर तक लड़ी जाएगी।

धरना स्थल पर ग्रामीणों ने भी भूमि आवंटन प्रक्रिया के विरोध में अपना आक्रोश जताया और सरकार से प्रस्ताव वापस लेने की मांग की। ग्रामीणों का कहना था कि जिस भूमि का उपयोग लंबे समय से क्षेत्र की सामुदायिक एवं पशुपालन संबंधी आवश्यकताओं के लिए होता आया है, उसे निजी कंपनी को आवंटित किया जाना ग्रामीण हितों के विपरीत है।

मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

धरना-प्रदर्शन के समापन पर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की मौजूदगी में ग्रामीणों ने उप-तहसीलदार कैलाशनगर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मनादर-1 एवं मनादर-2 क्षेत्र की हजारों बीघा भूमि के निजी कंपनी को आवंटित किए जाने के प्रस्ताव को अविलंब निरस्त करने तथा सार्वजनिक एवं ग्रामीण हितों की रक्षा करने की मांग की गई।

धरना-प्रदर्शन में मनादर सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। भूमि आवंटन के मुद्दे को लेकर ग्रामीणों की एकजुटता और विरोध को देखते हुए आने वाले दिनों में आंदोलन के और तेज होने के संकेत भी मिले हैं।इस अवसर पर सरपंच प्रतिनिधि राजेंद्र रावल,कैलाशनगर सरपंच तेजाराम, गंगासिंह,पूर्व प्रधान अचलाराम,प्रवीण रावल,हरीश राठौड़,प्रागाराम देवासी, लकमाराम सुथार तोलाराम देवासी,सवाराम देवासी ,सरदारमल पुरोहित, माधोसिंह राजपूत,जेठाराम चौधरी, विसाराम रावल, भंवर घांची,शांतिलाल लोहार,नारायण सुथार,,रावणा शैतानसिंह,रतन माली,पुनित दिनेश पटेल,ईश्वर सिंह,रविंद्र रावल सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे

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