जयपुर | जयपुर के गुलाबी शहर में खेती-किसानी को लेकर एक नई इबारत लिखी गई है। यहां आयोजित पश्चिम क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इस कार्यक्रम में राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा के कृषि मंत्रियों ने हिस्सा लिया। शिवराज सिंह ने साफ किया कि अब केंद्र सरकार अपनी योजनाएं राज्यों पर नहीं थोपेगी। उन्होंने माना कि हर राज्य की भौगोलिक और कृषि परिस्थितियां अलग होती हैं। इसलिए अब राज्यों को 18 विभिन्न कृषि योजनाओं में से अपनी पसंद की योजना चुनने की पूरी छूट होगी।
राज्यों को मिली बड़ी आजादी
बजट का उपयोग भी राज्य अपनी जरूरत के हिसाब से कर सकेंगे। शिवराज सिंह ने कहा कि अन्नदाता किसान हमारे लिए जीवनदाता है। देश की 140 करोड़ आबादी की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए राज्यों के साथ समन्वय बनाना बहुत जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल से ही खेती को लाभ का सौदा बनाया जा सकता है। इसके लिए एक नई कार्ययोजना तैयार की गई है।
फार्मर आईडी: खेती का नया आधार
सम्मेलन की सबसे बड़ी खबर 'फार्मर आईडी' को लेकर रही। अब किसानों को खाद और सरकारी मदद इसी डिजिटल पहचान पत्र के जरिए मिलेगी। यह आईडी किसानों के लिए आधार कार्ड की तरह काम करेगी। इसमें किसान की जमीन, फसल और बैंक खाते की पूरी जानकारी डिजिटल रूप में दर्ज होगी। शिवराज सिंह ने बताया कि देशभर में किसानों की डिजिटल आईडी बनाने का काम तेजी से चल रहा है। राजस्थान में अभी 10 लाख किसानों की आईडी बनना बाकी है।
खाद वितरण में आएगी पारदर्शिता
आने वाले समय में खाद का वितरण भी फार्मर आईडी के जरिए ही किया जाएगा। इससे कालाबाजारी पर लगाम लगेगी और असली किसानों को फायदा होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस काम को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। डिजिटल कृषि मिशन के तहत यह एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुंच सकेगा। बिचौलियों की भूमिका अब पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।
आलू-प्याज किसानों को बड़ी राहत
हाल के दिनों में आलू और प्याज के दामों में गिरावट पर केंद्रीय मंत्री ने चिंता जताई। उन्होंने किसानों को एक बड़ी राहत देने का ऐलान किया है। यदि किसान सरकारी एजेंसी के माध्यम से अपनी उपज दूसरे राज्यों के बाजारों में बेचना चाहते हैं, तो उसका ट्रांसपोर्टेशन खर्च केंद्र सरकार उठाएगी। यह कदम किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य दिलाने में मदद करेगा। अक्सर परिवहन खर्च अधिक होने के कारण किसान अपनी फसल स्थानीय मंडियों में ही औने-पौने दाम पर बेच देते हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का विजन
सम्मेलन को संबोधित करते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि देश का विकास गांवों की पगडंडियों से ही संभव है। पीएम मोदी के विजन को आगे बढ़ाते हुए राजस्थान सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने किसानों को रिसर्च आधारित खेती अपनाने की सलाह दी। सीएम ने कहा कि लागत कम करने और पशुपालन को आय का जरिया बनाने पर जोर देना चाहिए। राजस्थान फसल बीमा के मामले में देश में पहले स्थान पर है।
राजस्थान सरकार की अतिरिक्त मदद
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार किसानों को केंद्रीय सम्मान निधि में अपनी ओर से 3 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता दे रही है। इससे प्रदेश के लाखों किसानों को आर्थिक संबल मिल रहा है। इसके साथ ही ईआरसीपी योजना के जरिए 17 जिलों तक सिंचाई जल पहुंचाने का काम तेजी से जारी है। भजनलाल शर्मा ने सुझाव दिया कि जहां फसल उत्पादन अधिक है, वहां प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाई जानी चाहिए। इससे किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर दाम मिलेगा।
खेती के प्रति बदलता नजरिया
हालांकि, सीएम ने एक कड़वी सच्चाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बदलते दौर में खेती अब घाटे का सौदा समझी जाने लगी है। पहले जहां खेती पहली पसंद होती थी, अब लोग नौकरी को पहली और खेती को तीसरी पसंद मानने लगे हैं। इस मानसिकता को बदलने की जरूरत है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर खेती को फिर से गौरवशाली पेशा बनाएं।
धरती की सेहत पर चिंता
शिवराज सिंह चौहान ने उर्वरकों के बढ़ते उपयोग से धरती की घटती उपजाऊ क्षमता पर भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हमें अपनी मिट्टी को बचाना होगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस पर गंभीर चर्चा करें और ठोस निष्कर्ष निकालें। रासायनिक उर्वरकों के बजाय जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना होगा। आने वाली पीढ़ियों को उपजाऊ भूमि सौंपना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए किसानों को जागरूक करना बहुत आवश्यक है।
विकसित कृषि संकल्प अभियान
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित कृषि संकल्प अभियान के लिए राज्य अपनी जरूरत बताएं। जिस क्षेत्र के वैज्ञानिकों की जरूरत होगी, केंद्र उन्हें भेजेगा। राज्यों के कृषि रोडमैप बनाने के लिए भी केंद्र सरकार पूरी मदद करेगी। राजस्थान ने इस दिशा में पहल कर दी है और जल्द ही एक विशेष टीम गठित की जाएगी। इस सम्मेलन में मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना, गोवा के सुभाष फलदेसाई और महाराष्ट्र के दत्तात्रेय भारणे ने भी अपने सुझाव साझा किए।
भविष्य की रणनीति
सम्मेलन का समापन एक साझा संकल्प के साथ हुआ। सभी राज्यों ने कृषि क्षेत्र में तकनीक और पारदर्शिता को अपनाने पर सहमति जताई। दलहन और तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना भारत का अगला बड़ा लक्ष्य है। इसके लिए उन्नत बीज और नई तकनीकों का सहारा लिया जाएगा। किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सरकार अब हर स्तर पर प्रयास कर रही है। जयपुर का यह सम्मेलन भारतीय कृषि के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।