जयपुर | केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत की है। जयपुर में आयोजित इस पहली रीजनल कृषि कॉन्फ्रेंस के माध्यम से देश के कृषि परिदृश्य को बदलने के लिए एक व्यापक और रणनीतिक खाका पेश किया गया है। इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य हर राज्य की भौगोलिक और जलवायु संबंधी विशिष्टताओं के आधार पर एक अलग कृषि रोडमैप तैयार करना है। शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि अब कृषि नीतियों का निर्धारण केवल दिल्ली के बंद कमरों में नहीं, बल्कि राज्यों के खेतों की जमीनी हकीकत को देखकर किया जाएगा।
रीजनल कृषि कॉन्फ्रेंस: एक नई परंपरा की शुरुआत
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पहले खरीफ और रबी फसलों के लिए केवल राष्ट्रीय स्तर पर एक ही कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाती थी। उस राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में समय की कमी के कारण राज्यों की स्थानीय समस्याओं और विशिष्ट जरूरतों पर विस्तार से चर्चा नहीं हो पाती थी। इसी कमी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने अब देश को पांच अलग-अलग एग्रो-क्लाइमेटिक जोनों में बांटकर रीजनल कॉन्फ्रेंस करने का निर्णय लिया है। जयपुर में आयोजित यह कार्यक्रम इसी श्रृंखला की पहली कड़ी है, जिसमें राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा के प्रतिनिधि शामिल हुए।
हर राज्य का अपना अलग कृषि रोडमैप
अब हर राज्य की जलवायु, मिट्टी की गुणवत्ता, पानी की उपलब्धता और स्थानीय संसाधनों के आधार पर एक वैज्ञानिक रोडमैप तैयार किया जाएगा। यह रोडमैप यह तय करने में मदद करेगा कि किस क्षेत्र में कौन सी फसल उगाई जानी चाहिए और कौन सी कृषि पद्धति वहां के लिए सर्वोत्तम होगी। इससे न केवल उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि किसानों की लागत में भी कमी आएगी क्योंकि वे अपनी जमीन के अनुकूल ही खेती करेंगे। केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि इस प्रक्रिया में वैज्ञानिकों, प्रगतिशील किसानों और कृषि विशेषज्ञों की राय को सर्वोपरि रखा जाएगा।
फार्मर आईडी: पारदर्शिता की नई रीढ़
किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बिचौलिए के सीधे पहुंचाने के लिए 'फार्मर आईडी' बनाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। श्री चौहान ने विश्वास जताया कि अगले तीन महीनों के भीतर देश के सभी किसानों की एक एकीकृत डिजिटल पहचान यानी फार्मर आईडी तैयार हो जाएगी। यह आईडी खाद, बीज, फसल बीमा और मुआवजा वितरण की पूरी प्रणाली को पूरी तरह से पारदर्शी और लक्षित बनाने का काम करेगी। मध्य प्रदेश में लागू खाद वितरण के सफल मॉडल को अब इस फार्मर आईडी के जरिए पूरे देश में लागू करने की योजना है।
बिना लाइन लगे मिलेगा खाद और बीज
फार्मर आईडी के माध्यम से किसान को अपनी जमीन और फसल की जरूरत के अनुसार खाद की मात्रा पहले से पता होगी। इससे किसानों को खाद के लिए लंबी लाइनों में नहीं लगना पड़ेगा और कालाबाजारी पर पूरी तरह से लगाम लग सकेगी। इतना ही नहीं, बटाईदार या टेनेंट किसानों को भी जमीन मालिक की सहमति से इस आईडी के जरिए सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। यह डिजिटल क्रांति भारतीय कृषि के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
तिलहन मिशन: आत्मनिर्भरता की ओर बड़े कदम
खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए 'राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन' को एक नई गति दी गई है। वर्ष 2024-25 में तिलहन का उत्पादन रिकॉर्ड 429.89 लाख टन तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है। सरकार ने अब तिलहन के क्षेत्र को 29 मिलियन हेक्टेयर से बढ़ाकर 33 मिलियन हेक्टेयर करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। साथ ही, तिलहन के कुल उत्पादन को 39.2 मिलियन टन से बढ़ाकर 69.7 मिलियन टन तक ले जाने की योजना है।
दलहन मिशन: दालों में भी बनेगा भारत आत्मनिर्भर
दालों के मामले में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए दलहन मिशन के तहत बीज उत्पादन और नई किस्मों पर जोर दिया जा रहा है। अरहर, उड़द और मसूर जैसी दालों का उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को प्रति क्विंटल विशेष वित्तीय सहायता दी जा रही है। सरकार ने इच्छुक किसानों से 100 प्रतिशत दाल की उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदने का वादा किया है। इससे किसानों को गेहूं और चावल की तरह ही दालों की खेती में भी आर्थिक सुरक्षा और भरोसे का एहसास होगा।
16,000 वैज्ञानिकों का 'लैब टू लैंड' अभियान
विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत देश के 16,000 कृषि वैज्ञानिक अब प्रयोगशालाओं से निकलकर सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचेंगे। यह 'लैब टू लैंड' मॉडल आधुनिक कृषि तकनीकों और अनुसंधान के लाभों को सीधे जमीन पर उतारने का एक सशक्त माध्यम बनेगा। वैज्ञानिक किसानों को बताएंगे कि मिट्टी के स्वास्थ्य के अनुसार उन्हें किस तरह के उर्वरकों और बीजों का उपयोग करना चाहिए। इससे किसानों की उत्पादकता बढ़ेगी और वे वैश्विक मानकों के अनुरूप खेती करने में सक्षम हो सकेंगे।
नकली खाद और बीजों पर होगा कड़ा प्रहार
बाजार में बिकने वाले नकली खाद और कीटनाशकों से किसानों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए सरकार सख्त कदम उठा रही है। केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि 1968 के पुराने और नरम कानूनों को बदलकर अब बेहद कठोर कानून लाए जा रहे हैं। नकली कृषि इनपुट बेचने वाली कंपनियों और व्यक्तियों के खिलाफ अब भारी जुर्माने के साथ-साथ जेल की सजा का प्रावधान होगा। एक नया ट्रैकिंग सिस्टम भी विकसित किया जा रहा है, जिससे खाद की फैक्ट्री से लेकर किसान के हाथ तक पहुंचने की निगरानी होगी।
इंटीग्रेटेड और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
छोटी जोत वाले किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार 'इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल' को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित कर रही है। इसमें किसान केवल अनाज पर निर्भर न रहकर फल, फूल, सब्जियां, पशुपालन और मछली पालन जैसी गतिविधियों से भी जुड़ेंगे। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है ताकि किसानों को प्रीमियम दाम मिल सकें। मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग और जैविक खाद पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
प्राकृतिक आपदा और फसल सुरक्षा
फसल खराबे की स्थिति में किसानों को तुरंत राहत देने के लिए सैटेलाइट आधारित रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इससे फसल-क्षति का वैज्ञानिक और सटीक आकलन संभव होगा, जिससे बीमा राशि और मुआवजे के वितरण में देरी नहीं होगी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को फार्मर आईडी से जोड़कर इसे और अधिक प्रभावी और किसान-अनुकूल बनाया जा रहा है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि प्राकृतिक आपदा के समय किसान अकेला न रहे और उसे समय पर आर्थिक मदद मिले।
आलू, प्याज और टमाटर (APT) के लिए विशेष रणनीति
अक्सर देखा जाता है कि बंपर पैदावार होने पर आलू, प्याज और टमाटर की कीमतें गिर जाती हैं और किसानों को नुकसान होता है। ऐसी स्थिति से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों को सीधे खरीद करने और बड़े शहरों में आपूर्ति करने का निर्देश दिया है। इस पूरी प्रक्रिया में परिवहन और भंडारण का खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी ताकि किसान को उसकी मेहनत का सही फल मिले। उपभोक्ताओं को भी वाजिब दाम पर सब्जियां उपलब्ध कराना इस रणनीति का एक मुख्य हिस्सा है।
निष्कर्ष और भविष्य की राह
जयपुर की इस कॉन्फ्रेंस ने भारतीय कृषि के एक नए युग की आधारशिला रख दी है, जहां तकनीक और नीति का संगम होगा। शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में कृषि मंत्रालय अब राज्यों के साथ मिलकर 'टीम इंडिया' की भावना से काम कर रहा है। इन सुधारों का उद्देश्य न केवल उत्पादन बढ़ाना है, बल्कि किसान के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार लाना भी है। विकसित भारत के निर्माण में 'विकसित कृषि' सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ साबित होने जा रही है।