नांदेड़ | सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और समाज सेवा में अग्रणी भूमिका निभाने वाले श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज को एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने उन्हें 13 मणि का अध्यक्ष नियुक्त किया है।
जूना अखाड़ा की सबसे बड़ी मणि
जूना अखाड़ा में कुल चार मणियां होती हैं, जिनमें 13 मणि सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण मानी जाती है। इससे दुनिया भर के हजारों संत जुड़े हुए हैं। इस नियुक्ति के बाद से ही विश्व भर से बधाई संदेश मिल रहे हैं।
श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने बताया कि नारायण गिरि महाराज का जीवन धर्म और अध्यात्म के लिए समर्पित है। वे बच्चों को संस्कारवान बनाने और समाज को नशा व दहेज मुक्त करने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।
सेवा और समर्पण का सम्मान
महाराजश्री वर्तमान में गाजियाबाद के सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ के पीठाधीश्वर भी हैं। इसके अलावा वे दिल्ली संत महामंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और श्री दूधेश्वर वेद विद्या संस्थान के प्रमुख के रूप में भी सेवा दे रहे हैं।
उनकी इन सेवाओं को देखते हुए ही उन्हें यह प्रतिष्ठित पद दिया गया है। श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने कहा कि वे सनातन धर्म को एकजुट करने और युवाओं को सही मार्ग दिखाने का कार्य बखूबी कर रहे हैं।
भविष्य का संकल्प
अपनी नियुक्ति पर महाराजश्री ने कहा कि वे आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज और हरि गिरि महाराज के मार्गदर्शन में कार्य करेंगे। उनका लक्ष्य सनातन वैदिक धर्म को विश्व के शिखर पर ले जाना है।
इस नियुक्ति से न केवल जूना अखाड़ा बल्कि पूरे संत समाज में उत्साह है। संतों का मानना है कि उनके नेतृत्व में 13 मणि और अधिक सशक्त होगी। जिससे सनातन धर्म की एकता और मजबूती को नया बल मिलेगा।
वे यूनाइटेड हिंदू फ्रंट के अध्यक्ष के रूप में भी सक्रिय हैं। उनकी नियुक्ति के बाद माहुरगढ़, नांदेड़ और गाजियाबाद सहित देशभर में उनके भक्तों के बीच भारी उत्साह देखा जा रहा है।