मुंबई | भारतीय मनोरंजन जगत की चकाचौंध जितनी लुभावनी दिखती है, इसके पीछे छिपे संघर्ष और उतार-चढ़ाव उतने ही चुनौतीपूर्ण होते हैं। यहां सफलता की ऊंचाइयां जितनी जल्दी मिलती हैं, कई बार किस्मत का सितारा उतनी ही बेरहमी से गर्दिश में भी चला जाता है।
यह कहानी एक ऐसी ही अभिनेत्री की है, जिसने बचपन में ही वह मुकाम हासिल कर लिया था जिसे पाने में लोगों की उम्र गुजर जाती है। लेकिन फिर वक्त ने कुछ ऐसी करवट बदली कि उन्हें बदनामी और गुमनामी के दौर से गुजरना पड़ा।
अभिनय की दुनिया में जादुई शुरुआत
श्वेता बसु प्रसाद का फिल्मी सफर किसी चमत्कार से कम नहीं था। साल 2002 में निर्देशक विशाल भारद्वाज ने फिल्म 'मकड़ी' में एक 11 साल की नन्ही बच्ची पर बड़ा दांव खेला था।
श्वेता ने इस फिल्म में चुन्नी और मुन्नी जैसी दोहरी भूमिकाएं इतनी परिपक्वता के साथ निभाईं कि पूरा देश दंग रह गया। इस बेमिसाल अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार के नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया।
इसके बाद फिल्म 'इकबाल' में खदीजा के किरदार ने उनकी प्रतिभा को और पुख्ता कर दिया। छोटे पर्दे पर 'कहानी घर-घर की' जैसे मेगा धारावाहिकों ने उन्हें घर-घर की पहचान बना दी।
विवादों का काला साया
सफलता की सीढ़ियां चढ़ते हुए श्वेता के जीवन में साल 2014 एक काला अध्याय बनकर आया। हैदराबाद के एक होटल से पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और मीडिया में उनका नाम विवादों में उछला।
महज 23 साल की उम्र में उन पर ऐसे लांछन लगाए गए जिनसे उनका सामाजिक और पेशेवर जीवन पूरी तरह बिखर गया। कुछ महीनों के लिए उन्हें सुधार गृह में भी समय बिताना पड़ा।
मीडिया ट्रायल ने उन्हें दोषी करार देने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन बाद में अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया। यह स्पष्ट हुआ कि श्वेता निर्दोष थीं और उन्हें गलत फंसाया गया था।
निजी जीवन की उथल-पुथल
विवादों से निकलने के बाद श्वेता ने अपनी जिंदगी को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश की। साल 2018 में उन्होंने अपने मित्र और फिल्म निर्माता रोहित मित्तल के साथ शादी रचाई।
हालांकि नियति को कुछ और ही मंजूर था। आपसी मतभेदों के चलते शादी के महज एक साल बाद 2019 में दोनों ने अलग होने का फैसला कर लिया। इस कठिन समय में भी श्वेता ने हिम्मत नहीं हारी।
ओटीटी की नई रानी का उदय
श्वेता बसु प्रसाद का असली पुनर्जन्म तब हुआ जब उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की ओर रुख किया। उन्होंने साबित कर दिया कि असली प्रतिभा को कभी दबाया नहीं जा सकता।
'क्रिमिनल जस्टिस' में एक वकील की भूमिका हो या 'इंडिया लॉकडाउन' जैसी सीरीज, उन्होंने हर बार अपनी अदाकारी से क्रिटिक्स को प्रभावित किया। आज श्वेता ओटीटी स्पेस की एक सशक्त अभिनेत्री बन चुकी हैं।
उनकी यह वापसी उन सभी के लिए एक कड़ा जवाब है जिन्होंने उनके करियर को खत्म मान लिया था। श्वेता का जीवन प्रमाण है कि साहस हो तो आप दोबारा चमक सकते हैं।