राजस्थान

सीकर के हर्ष पर्वत पर भीषण आग: सीकर के हर्ष पर्वत पर लगी भीषण आग: 8 हेक्टेयर में फैली लपटें, 10 किमी दूर से दिखा मंजर

thinQ360 · 18 अप्रैल 2026, 08:56 रात
राजस्थान के सीकर में स्थित प्रसिद्ध हर्ष पर्वत पर भीषण आग लग गई है। करीब 8 हेक्टेयर में फैली इस आग ने पेड़-पौधों और घास को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे भारी नुकसान की आशंका है।

सीकर | राजस्थान के सीकर जिले में स्थित प्रसिद्ध पर्यटन और धार्मिक स्थल हर्ष पर्वत से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां की ऊंची पहाड़ियों पर भीषण आग लग गई है। यह आग इतनी भयावह है कि इसने देखते ही देखते करीब 7 से 8 हेक्टेयर के बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लिया है। इस आग के कारण पर्वत पर मौजूद बेशकीमती पेड़-पौधे और घास जलकर राख हो गए हैं।

मंदिर के ठीक पीछे मची तबाही

जानकारी के अनुसार, यह भीषण आग हर्ष पर्वत पर स्थित भगवान शिव और भेरुजी के मंदिर के ठीक पिछले हिस्से में लगी है। आग लगने के बाद इलाके में धुएं का गुबार छा गया। मंदिर के आसपास के जंगलों में आग फैलने से वहां मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों में हड़कंप मच गया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि उन्हें रोकना मुश्किल हो रहा था।

10 किलोमीटर दूर से दिखा मंजर

हर्ष पर्वत की ऊंचाई करीब 3100 फीट है, जिसके कारण यहां लगी आग दूर-दूर तक दिखाई दे रही थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, आग की लपटें करीब 10 किलोमीटर दूर दुजोद गांव से भी साफ नजर आ रही थीं। रात के अंधेरे में या धुंध के बीच भी आग का लाल घेरा साफ दिखाई दे रहा था। इस घटना ने प्रशासन और वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि पहाड़ी इलाका होने के कारण बचाव कार्य कठिन है।

दमकल विभाग की चुनौतियां

आग की सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियों को मौके पर रवाना किया गया। हालांकि, पहाड़ी रास्ता दुर्गम होने और आग के ऊंचाई पर होने के कारण दमकल कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। भैरूजी मंदिर के पुजारी विजय पाराशर ने बताया कि आग दोपहर के समय शुरू हुई थी। हवा के प्रभाव और सूखी घास के कारण यह आग धीरे-धीरे विकराल रूप धारण करती चली गई।

वन्यजीवों और पर्यावरण को नुकसान

हर्ष पर्वत अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता के लिए जाना जाता है। 8 हेक्टेयर में फैली इस आग ने न केवल हरियाली को नष्ट किया है, बल्कि वहां रहने वाले छोटे जीवों के लिए भी संकट पैदा कर दिया है। राजस्थान के इस क्षेत्र में पहले से ही गर्मी का असर बढ़ रहा है, ऐसे में सूखी झाड़ियों ने आग में घी का काम किया। अभी तक आग लगने के सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है।

सुरक्षा को लेकर चिंता

पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। मंदिर के आसपास के क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि आग मुख्य परिसर तक न पहुंचे। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पहाड़ों पर पुख्ता इंतजाम होने चाहिए। आग बुझाने के प्रयासों में स्थानीय युवाओं ने भी अपनी ओर से सहयोग करने की कोशिश की।

निष्कर्ष और वर्तमान स्थिति

फिलहाल प्रशासन आग पर पूरी तरह काबू पाने का प्रयास कर रहा है। वन विभाग की टीम भी नुकसान का आकलन करने में जुटी है। यह घटना पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से एक बड़ी चेतावनी है। हर्ष पर्वत जैसे ऊंचे स्थानों पर आग बुझाने के लिए आधुनिक उपकरणों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। उम्मीद है कि जल्द ही स्थिति सामान्य हो जाएगी और प्रकृति को और नुकसान नहीं होगा।

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