राजस्थान

सीकर अस्पताल में भारी बवाल: सीकर के श्री कल्याण अस्पताल में संविदाकर्मियों की छुट्टी, इंटर्न के भरोसे इलाज, नर्सिंग स्टाफ का अनिश्चितकालीन धरना

मानवेन्द्र जैतावत · 10 अप्रैल 2026, 02:33 दोपहर
सीकर के श्री कल्याण अस्पताल में राजमेश के निर्देश पर बड़ी संख्या में संविदाकर्मियों को हटा दिया गया है। इसके विरोध में नर्सिंग स्टाफ ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है।

सीकर | शेखावाटी के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र, श्री कल्याण अस्पताल (SK Hospital) में शुक्रवार को स्थिति उस समय विस्फोटक हो गई जब प्रशासन ने अचानक बड़ी संख्या में संविदाकर्मियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस फैसले ने न केवल अस्पताल के कामकाज को प्रभावित किया है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

संविदाकर्मियों का अनिश्चितकालीन धरना

हटाए गए नर्सिंग कर्मियों ने तत्काल प्रभाव से अस्पताल परिसर में ही अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। आंदोलित कर्मचारियों का कहना है कि यह निर्णय उनके साथ घोर अन्याय है और वे तब तक नहीं हटेंगे जब तक उन्हें बहाल नहीं किया जाता। अस्पताल में भारी नारेबाजी के बीच तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।

राजमेश के निर्देशों पर कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसाइटी (राजमेश) ने वित्तीय स्वीकृति की कमी का हवाला देते हुए इन नियुक्तियों को रद्द करने का निर्देश दिया था। अस्पताल प्रबंधन ने इस आदेश का पालन करते हुए कर्मियों को कार्यमुक्त कर दिया। प्रबंधन का तर्क है कि यह एक प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

55 इंटर्न संभालेंगे मोर्चा

प्रशासन ने रिक्त पदों को भरने के लिए 55 नर्सिंग इंटर्न स्टूडेंट्स को तैनात करने का निर्णय लिया है। अधिकारियों का मानना है कि इससे नियमित स्टाफ की कमी पूरी होगी और छात्रों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा। हालांकि, इस फैसले की चिकित्सा जगत में काफी आलोचना हो रही है।

अनुभवहीनता से मरीजों को खतरा

धरने पर बैठी मनीषा चौधरी ने बताया कि वे पिछले तीन वर्षों से बहुत कम वेतन पर काम कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अनुभवी कर्मियों की जगह अनुभवहीन छात्रों से काम कराना मरीजों की जान जोखिम में डालना है। अस्पताल में गंभीर रोगों का इलाज होता है, जहां विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।

बिना नोटिस निकाले जाने का आरोप

कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के नौकरी से निकाल दिया गया। उन्होंने बताया कि पिछले साल भी उन्होंने बिना वेतन के कई महीनों तक सेवाएं दी थीं। इस बार टेंडर रिन्यू करने के बजाय उन्हें धक्के मारकर बाहर कर दिया गया, जो अमानवीय है।

भ्रष्टाचार और भेदभाव के दावे

विजेंद्र नामक एक नर्सिंगकर्मी ने प्रशासन की नीयत पर सवाल उठाते हुए भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अन्य जिलों के मेडिकल कॉलेजों में संविदाकर्मी अभी भी काम कर रहे हैं, लेकिन सीकर में ही भेदभाव क्यों? उन्होंने इसे राजनीतिक दबाव में लिया गया फैसला करार दिया है।

प्रशासन की सफाई और तर्क

दूसरी ओर, चिकित्सा अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संविदाकर्मियों का तीन साल का अनुबंध पूरा हो चुका था। प्रशासन का दावा है कि इंटर्न के आने से व्यवस्थाएं और अधिक सुदृढ़ होंगी और अस्पताल सुचारू रूप से चलेगा। उन्होंने कहा कि वित्तीय सीमाओं के कारण यह कदम उठाना अनिवार्य था।

उग्र आंदोलन की चेतावनी

आंदोलित कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें वापस काम पर नहीं रखा गया, तो यह आंदोलन और उग्र रूप लेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल में होने वाली किसी भी अनहोनी की पूरी जिम्मेदारी सरकार और स्थानीय प्रशासन की होगी। वे अपने हक के लिए पीछे नहीं हटेंगे।

स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता असर

नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल और अचानक हुई इस कटौती से ओपीडी और वार्ड की सेवाओं पर आंशिक असर दिखने लगा है। अगर यह गतिरोध लंबा चला, तो पूरे शेखावाटी क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा सकती हैं। मरीज और उनके परिजन इस खींचतान के बीच खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।

विपक्ष ने साधा सरकार पर निशाना

स्थानीय स्तर पर राजनीतिक पारा भी चढ़ गया है। विपक्ष ने सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। नेताओं का कहना है कि सरकार बजट कटौती के नाम पर गरीबों के इलाज और युवाओं के रोजगार के साथ मजाक कर रही है।

निष्कर्ष और भविष्य की राह

सीकर का यह संकट अब राज्य स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन अपने फैसले पर पुनर्विचार करता है या संविदाकर्मियों को अपने हक की लड़ाई लंबी लड़नी पड़ती है। फिलहाल, अस्पताल में विरोध प्रदर्शन जारी है और समाधान के आसार कम ही दिख रहे हैं।

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