सिरोही |पिण्डवाड़ा तहसील क्षेत्र में कमलेश मेटा कास्ट की प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। इस परियोजना के विरोध में अब 12 गांवों के लोगों ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है, जिससे स्थानीय प्रशासन में हलचल मच गई है।
12 गांवों का सामूहिक फैसला
चार ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 12 गांवों के ग्रामीणों ने एक सामूहिक बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में भारी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और सभी ने एकजुट होकर प्रस्तावित खनन परियोजना के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया।
बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि जब तक यह खनन परियोजना निरस्त नहीं हो जाती, तब तक वे किसी भी चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे।
चुनाव बहिष्कार का ऐलान
ग्रामीणों ने एक स्वर में पंचायती राज से लेकर हर स्तर के चुनाव के पूर्ण बहिष्कार का ऐलान किया है। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं और परियोजना को रद्द नहीं किया गया, तो वे मतदान प्रक्रिया का पूरी तरह से बहिष्कार करेंगे।
- सभी चुनावों का पूर्ण बहिष्कार।
- मतदान प्रक्रिया में कोई भागीदारी नहीं।
- परियोजना रद्द होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
नेताओं के प्रवेश पर भी रोक
ग्रामीणों का आक्रोश केवल चुनाव बहिष्कार तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि वे अपने गांवों में किसी भी नेता को प्रवेश नहीं करने देंगे। उनका कहना है कि जब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं होता, वे किसी भी राजनीतिक दल के प्रतिनिधि से नहीं मिलेंगे।
कलेक्टर से करेंगे मुलाकात
अपने आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए, ग्रामीणों ने तय किया है कि वे जल्द ही जिला कलेक्टर से मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात के दौरान वे अब तक इस मामले में हुई जांच, उसकी प्रगति और समीक्षा रिपोर्ट की मांग करेंगे। ग्रामीणों में इस परियोजना को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है और वे किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
राजस्थान के सिरोही जिले की पिंडवाड़ा तहसील में मेसर्स कमलेश मेटाकास्ट प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित 801 हेक्टेयर की लाइमस्टोन (चूना पत्थर) खनन परियोजना का स्थानीय ग्रामीणों और सर्व समाज द्वारा भारी विरोध किया जा रहा है।
विरोध के मुख्य कारण
पर्यावरण और जल संकट: ग्रामीणों का अनुमान है कि इस विशाल परियोजना से क्षेत्र के पेड़, पहाड़, अरावली की पहाड़ियां और जीवनदायिनी सुकली नदी के अस्तित्व व जलस्रोत नष्ट हो जाएंगे।आजीविका और भूमि का नुकसान: प्रस्तावित क्षेत्र में उपजाऊ निजी कृषि भूमि और चारागाह शामिल हैं, जिससे सैकड़ों किसानों और पशुपालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।
स्वास्थ्य का खतरा: खनन और क्रशर प्लांट से उड़ने वाली धूल से सिलिकोसिस जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी फैलने का भारी डर है।आंदोलन की मुख्य बातेंविशाल जनसैलाब और महापंचायत: वाटेरा, भीमाना, भारजा और रोहिड़ा समेत दर्जनों गांवों के हजारों लोग गोलबंद होकर इस प्रोजेक्ट को तुरंत रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
अल्टीमेटम: विभिन्न समाजों (जैसे राजपुरोहित व देवासी समाज) और 36 कौमों के समर्थन के साथ ग्रामीणों ने सरकार को अल्टीमेटम देकर उग्र व अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान किया है।
*Edit with Google AI Studio