सिरोही | आबूरोड में सफाई सेवा के ठेकेदार ने टैक्स विभाग के अधिकारी पर प्रताडऩा का आरोप लगाया है। साथ ही इस मामले में विभाग को जांच के लिए शिकायत भेजी है। आरोप है कि टैक्स मुक्त सेवा के लिए उसे नोटिस भेजा गया था, जो पूर्व में भी टैक्स, ब्याज व जुर्माने के मामले में शून्य घोषित किया जा चुका है। अब पांच माह बाद उसी मामले में साढ़े पांच लाख रुपए अदा करने का नोटिस जारी किया है। जिस अधिकारी ने इसे शून्य घोषित किया था उसी ने अपने फैसले को पलटते हुए अब पांच माह बाद नोटिस भेजा है। आरोप है कि इस कार्रवाई के जरिए करदाताओं में भय व दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है। ठेकेदार मनोजकुमार सेंदर ने आबूरोड के सहायक आयुक्त हरचंदराम चौहान पर आरोप लगाते हुए वित्त विभाग को शिकायत भेजी है।
शिकायत पर पारित किया था शून्य आदेश
शिकायत में बताया है कि दिसम्बर, 25 में किसी ने सम्पर्क पोर्टल पर उसकी व अन्य दो फर्म की शिकायत दर्ज कराई थी। राज्य कर विभाग से नोटिस मिलने पर सभी कागजात प्रस्तुत किए तथा पूरा सहयोग किया। शिकायतकर्ता कौन थे इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई। मामले में 15 दिसम्बर, 25 को पारित आदेश में अधिकारी ने टैक्स, ब्याज व जुर्माने को शून्य कर दिया।
शून्य मामले में तथ्य छुपाने की धारा लगाई
आरोप है कि इन्हीं अधिकारी ने इस घटना के पांच माह बाद 27 मई, 26 को एक नोटिस जारी कर साढ़े पांच लाख रुपए की वापस मांग खड़ी कर दी। इस बार धारा 74 के तहत धोखाधड़ी व जानबुझकर तथ्य छुपाने का आरोप लगाया गया है। जब मामले में शून्य घोषित किया जा चुका हो और पुराने भुगतान आदेश के अलावा कोई नए कागज या कोई नई बात नहीं होने पर पांच माह बाद इस तरह का नोटिस किस तरह जारी हो सकता है या कागज छुपाने वाली बात भी कैसे हो सकती है।
सरकारी रिकॉर्ड में है तो तथ्य कैसे छुपेंगे
आरोप है कि सहायक आयुक्त ने नोटिस देकर करोड़ों की टैक्स चोरी का मामला दर्शाते हुए समाचार पत्रों में भी जानकारी साझा की है, जिससे वे आहत है। सारा भुगतान नगर पालिका से आया है तो एक-एक पैसे का इंद्राज सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है। ऐसे में तथ्य छुपाने वाली कोई बात ही नजर नहीं आती। आरोप है कि शिकायतकर्ता व सहायक आयुक्त की मिलीभगत है इसलिए निष्पक्षता से कार्रवाई नहीं की जा रही। यहां तक कि वे शिकायतकर्ता का नाम भी नहीं बता रहे।
शिकायत में रखी निष्पक्ष जांच की मांग
वित्त विभाग को भेजी शिकायत में ठेकेदार ने मामले में निष्पक्ष जांच करवाने की गुहार लगाई है। साथ ही आबूरोड से बाहर के किसी स्वतंत्र व निष्पक्ष अधिकारी से जांच कराने, 27 मई को दिए गए नोटिस को शिकायत का फैसला आने तक रोकने, गोपनीय सूचना का अखबारों तक पहुंचने, बंद हो चुके मामले को वापस खोले जाने, पूरे प्रकरण का रिकॉर्ड व फाइल मुख्यालय में सुरक्षित रखवाने एवं कागजों की फॉरेंसिक ऑडिट करवाने, प्रकरण में शामिल अधिकारियों को निलम्बित किए जाने की भी मांग रखी है।
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